Assam Floods: सड़क किनारे कट रही है ज़िंदगी, घर लौटने से डर रहे हैं बाढ़ पीड़ित, असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों से रिपोर्ट
असम के शिवसागर ज़िले के बाढ़ प्रभावित गाँवों में लोगों की मुश्किलें अभी भी कम नहीं हुई हैं। जिन परिवारों के घर बाढ़ में बह गए, वे आज भी सड़क किनारे या ऊँचे स्थानों पर अस्थायी ठिकानों में रहने को मजबूर हैं। लगातार हो रही बारिश ने लोगों के मन में फिर से बाढ़ आने का डर पैदा कर दिया है।
गाँव कनेक्शन की टीम जब शिवसागर ज़िले के प्रभावित इलाकों में पहुँची तो सामने आया कि लोगों की सबसे बड़ी ज़रूरत सिर्फ़ राहत सामग्री नहीं, बल्कि सुरक्षित आश्रय, पका हुआ भोजन, दवाइयाँ और कपड़े हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन उनके लिए असली संघर्ष अब शुरू हुआ है।
ज़मीन पर दिखी तबाही की तस्वीर
गाँव कनेक्शन की टीम लगातार असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की स्थिति जानने के लिए ग्राउंड पर मौजूद है। शिवसागर ज़िले के कई गाँवों तक पहुँचने के लिए टीम को नाव, पानी और कीचड़ से होकर गुज़रना पड़ा। मौके पर पहुँचने पर हर तरफ़ तबाही के निशान दिखाई दिए। कई घर पूरी तरह उजड़ चुके थे, घरेलू सामान बर्बाद हो चुका था और लोग अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे थे। ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान टीम ने देखा कि कई परिवार अब भी अपने घरों में नहीं लौट पाए हैं। कुछ लोग सड़क किनारे ऊँचे स्थानों पर अस्थायी तौर पर रह रहे हैं, क्योंकि उनके घर बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। लगातार हो रही बारिश ने इन परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है।
लोगों ने बताया, सबसे बड़ी ज़रूरत एक सुरक्षित छत की है
गाँव कनेक्शन की टीम ने जब प्रभावित परिवारों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि इस समय उनकी सबसे बड़ी ज़रूरत सुरक्षित रहने की जगह है। लगातार बारिश के कारण खुले में रहना मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि यदि दोबारा पानी आ गया तो उनके पास बचने का कोई रास्ता नहीं होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि उन्हें जल्द से जल्द किसी सुरक्षित स्थान पर राहत शिविर में रखा जाए, ताकि वे लगातार बनी हुई बाढ़ की आशंका और डर से बाहर निकल सकें।
राशन है, लेकिन खाना बनाने का कोई साधन नहीं
बाढ़ प्रभावित लोगों ने बताया कि कई जगह राहत के रूप में राशन तो मिल रहा है, लेकिन उसे पकाने की व्यवस्था नहीं है। कई परिवारों के पास न गैस सिलेंडर बचा है और न ही खाना बनाने के लिए लकड़ी। ऐसे में उन्हें दिन में केवल एक बार पका हुआ भोजन मिल पाता है या फिर दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल सूखा राशन देना पर्याप्त नहीं है। जब तक खाना पकाने की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक राशन भी पूरी तरह उपयोगी नहीं हो पाएगा।
बारिश के बीच कपड़े और दवाइयों की भी कमी
लगातार बारिश के कारण लोगों के कपड़े भीग जाते हैं और उन्हें सुखाने की व्यवस्था नहीं है। कई परिवारों के पास बदलने के लिए अतिरिक्त कपड़े भी नहीं बचे हैं। इसके साथ ही भीगने की वजह से बुखार, सिरदर्द, त्वचा संबंधी समस्याएँ और पैरों में खुजली जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप बढ़ाने और दवाइयों की तत्काल व्यवस्था करने की ज़रूरत है, ताकि बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सबसे ज़्यादा दर्द लोगों के मन में बैठा डर था। ग्रामीणों ने बताया कि वे जिस सड़क पर रह रहे हैं, वहाँ से बाढ़ प्रभावित इलाका महज़ 500 मीटर दूर है। उन्हें हर रात यही डर सताता है कि यदि फिर से बारिश तेज़ हुई और पानी बढ़ा, तो वे कहाँ जाएँगे। कई लोगों ने बताया कि इसी डर की वजह से वे रातभर ठीक से सो भी नहीं पाते।
स्थानीय लोगों ने बताया कि राहत कार्य जारी हैं, लेकिन बड़ी संख्या में परिवारों को अब भी सुरक्षित आवास, पका हुआ भोजन, कपड़े और चिकित्सा सहायता की ज़रूरत है। लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी भले उतर गया हो, लेकिन सामान्य जीवन की वापसी अभी दूर है। असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों की यह ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि प्राकृतिक आपदा का असर केवल बाढ़ आने तक सीमित नहीं रहता। पानी उतरने के बाद लोगों के सामने पुनर्वास, आजीविका, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी नई चुनौतियाँ खड़ी हो जाती हैं। प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी मांग है कि उन्हें जल्द सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाए, ताकि वे भय और असुरक्षा के माहौल से निकलकर फिर से सामान्य जीवन शुरू कर सकें।
रिपोर्ट: मनीष मिश्रा
फ़ोटो: मोहम्मद आरिफ़