सीताफल की प्रोसेसिंग से मुनाफा कमा रहीं हैं छत्तीसगढ़ की महिलाएं

Tameshwar Sinha | Nov 21, 2019, 08:36 IST
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सीताफल की प्रोसेसिंग से मुनाफा कमा रहीं हैं छत्तीसगढ़ की महिलाएं
कांकेर (छत्तीसगढ़)। गाँव की महिलाएं पहले जंगल से शरीफा (सीताफल) तोड़कर बेचती लेकिन उन्हें अच्छा दाम नहीं मिलता था, उसी शरीफे की प्रोसेसिंग से ये महिलाएं आज अच्छा मुनाफा कमा रही हैं।

छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड जैसे कई राज्यों में इस समय सीताफल बाजार में बिकने लगता है, छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले की महिला किसान खेतीबाड़ी के साथ "सीताफल" से अपनी आमदनी बढ़ाते आत्मनिर्भर बन रही हैं। कांकेर जिले के गांव में समूह की महिला किसान सीताफल से गरीबी को पछाड़ते अब लाखों का मुनाफा पा रही हैं।

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कांकेर जिला के पलेवा गांव की महिला किसान शशी भोयर कहती हैं, "पहले हम लोग सीताफल तोड़ के लाते थे उसको कोचिए लोग को 50 से 100 रुपया टोकरी में बेंच देते थे। फिर हम लोगों समूह बना कर कृषि विभाग से मदद लेते हुए ट्रेनिंग ली। ट्रेंनिग लेने के बाद आज हम प्रोसेसिंग से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

कांकेर में सीताफल उत्पादन पूर्णत: जैविक और प्राकृतिक है। सीताफल के पौधे में किसी भी प्रकार का रासायनिक खाद या कीटनाशक उपयोग नहीं होता है। इसके चलते यहां के सीताफल का स्वाद मीठा रहता है और मांग भी अधिक होती है। इसी मांग के अनुरूप आज गांव-गांव में स्वयं सहायता समूह बना कर महिलाएं सीताफल को तोड़ कर उसकी प्रोसेसिंग कर उसके पल्प को स्थानीय कीमत 200 रुपए तक और अन्य राज्यों में 500 रुपए से अधिक में बेच कर मुनाफा कमा रही हैं। सीताफल का न सिर्फ पल्पिंग किया जा रहा है बल्कि इसका "आइसक्रीम" भी बाजार में बेच कर मुनाफा कमाया जा रहा है।

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सीताफल का उपयोग आइसक्रीम, चाकलेट, जूस, और खीर के रूप में किया जाता है। अक्टूबर, नवंबर माह में समूह की महिलाओं को लाखों की आमदनी भी हो रही है। कभी गहने गिरवी रखने वाली गांव की साधारण महिलाएं अपनी मेहनत और लगन से जिंदगी बदल रही हैं, ऐसे एक नहीं जिले के हजारों महिलाओं ने अपनी काबिलियत का परिचय देते हुए सीताफल परियोजना में लाभ कमा रही हैं।

पुरे देश मे सबसे ज्यादा उत्पादन छत्तीसगढ़ में लगभग 12 हजार मैट्रिक टन से अधिक होता है, इसमें अकेले कांकेर जिले में 6000 मैट्रिक टन का उत्पादन शुद्ध प्राकृतिक रूप से पैदावार लगभग चार लाख पेड़ों से हो रही है। इसलिए कांकेर को सीताफल का द्वीप भी कहा जाता है, आज अन्य राज्यों से भी इस की डिमांड बढ़ती जा रही है।

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स्थानीय प्रशासन द्वारा सीताफल को न सिर्फ विशेष रूप से ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग में सहयोग कर रही है बल्कि इससे जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूह को लाभ पहुंचाने का काम किया जा रहा है, उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया जा रहा है। कलेक्टर केएल चौहान समय समय पर स्वयं महिला संगठनों के बीच पहुंच कर प्रोत्साहित भी करते हैं।

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