सर्दियों का मज़ा दोगुना कर देगा: गरमा-गरम पूड़ी के साथ आलू भंटा साग

गरमा गरम आलू बैंगन साग को रोटी, पराँठे या पूरी के साथ परोसें और पुराने ज़माने की तरह ही असली भोजन का आनंद लें।

Sangeeta KhannaSangeeta Khanna   16 Jan 2019 6:15 AM GMT

सर्दियों का मज़ा दोगुना कर देगा: गरमा-गरम पूड़ी के साथ आलू भंटा साग

जाड़ों में नए आलू आ जाते हैं और साथ ही नरम पालक, चमकीले बैंगनी, हरे या सफ़ेद बैंगन, हरे लाल रसीले टमाटर वग़ैरा अपने रंग बिखेरने लगते हैं। गोभी मटर वग़ैरा तो सर्दियों में बनती ही है पर जो बात लोहे की कढ़ाई में धीमी आँच पर पकी हुई आलू बैंगन पालक की सब्ज़ी में हैं वो किसी और खाने में नहीं। थोड़ी काली काली सी घुटी हुई ये सब्ज़ी देखने में कोई ख़ास नहीं पर एक बार इसका स्वाद मुँह लग जाए तोये सब्ज़ी बार बार बनने लगती है। कुछ ऐसा ही जादू होता है दादी नानी के ज़माने से चले आ रहे खाने का।

उम्मीद है लोहे की कढ़ाई तो ज़रूर होगी आपके पास। अगर नहीं है तो किसी भी मोटी पेंदी की कढ़ाई या प्रेशर कुकर में भी बन जाती है ये सब्ज़ी। आइए मौसम की सब्ज़ियों से ये मिली जुली घुटी हुई आलू बैंगन पालक की सब्ज़ी बना लेते हैं। पुराने ज़माने के लोग इसे आलू भंटा साग भी कहते हैं और इसे बिना किसी रेसिपी और नाप तोल के ही बनाते थे। आज हम भी आलू भंटा साग बिना नापतोल के ही बनाएँगे।

क़रीब 200 गरम छोटे आलू धो छील कर काट लें।

एक बड़ा गोल बैंगन या क़रीब 4-5 छोटे बैंगन भी टुकड़ों में काट लें।

क़रीब 300 ग्राम पालक के पत्ते भी काट लें। थोड़े सोआ के पत्ते हों तो उन्हें भी इसी में मिला लें।

छोटा टुकड़ा अदरक का, 2-3 लाल मिर्च और 5-6 लहसुन एक साथ कूट कर रखें।

एक लोहे की कढ़ाई में 1 बड़ा चम्मच सरसों का तेल गरम करें, चुटकी भर हींग डालें और आधा आधा छोटा चम्मच मेथी दाना, ज़ीरा और मोटी सौंफ दाल दें। जैसे ही मसालों की ख़ुशबू आ जाये, कुटी हुई अदरक लहसुन मिर्च भी डाल दें और एक मिनट तक धीमी आँच पर भूनें।

अब आलू के टुकड़े और हल्दी डालें, थोड़ा मिला कर कटे बैंगन और स्वादानुसार नमक भी डालें और मिला जुला कर ढक कर 5 मिनट तक पकायें। अब पालक सोआ डाल कर, थोड़ा पानी भी डालें और ढक कर पका लें। गलने के बाद सब्ज़ी को थोड़ा कलछुल से चला मिला कर घुटने दें।

गरमा गरम आलू बैंगन साग को रोटी, पराँठे या पूरी के साथ परोसें और पुराने ज़माने की तरह ही असली भोजन का आनंद लें।

इस प्रकार का असली भोजन कढ़ाई में पकाया जाता है, प्लास्टिक के पैकेट और शीशे की बोतलों में नहीं मिलता। स्वाद भी असली है किसी सॉस या एसेन्स से नहीं बनाया गया।


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