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खानपान में गड़बड़ी दे सकती है पथरी का मर्ज

Bidyut Majumdar | Sep 16, 2016, 16:06 IST
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India
लखनऊ। कई बार अचानक से पेट में दर्द को रवि कुमार (26) टाल देते थे लेकिन जब ये दर्द बढ़ने लगा और उन्होनें डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि उनके किडनी में पथरी है। धीरे धीरे दवा से इसे खत्म किया गया।

रवि कुमार बताते हैं, ''मैं हॉस्टल में रहता था और खाना भी बाहर खाता था, साफ पानी भी नहीं मिलता था इसलिए मुझे स्टोन हो गया। डॉक्टरों ने यही कारण बताया फिर लगातार चार महीने के इलाज के बाद सही हुआ है।"

बदलती जीवनशैली और खानपान में बदलाव ने कई बीमारियां इजात की हैं जिनमें पथरी भी एक है। ये ज्यादातर किडनी, मूत्राशय, मूत्र नलिका में होती है। इसके इलाज एलोपैथी, होमोपैथी और आयुर्वेद में अलग अलग हैं

पथरी के कारण

शरीर में अंत:स्त्रावी ग्रंथियों के असंतुलन के कारण कई बार पेशाब में कैल्शियम जमा हो जाता है। अगर पेशाब के साथ कैल्शियम निकल जाता है तो ठीक है वरना गुर्दे में जमा होकर पथरी बना देता है। कैल्शियम के जमा होने के कारण भोजन में ज्यादा कैल्शियम होना है। पथरी किसी भी उम्र में हो सकती है, कई बार आनुवांशिक कारणों से पथरी होती है। खान पान में असंतुलन भी पथरी का कारण बनती है।

लक्षण

किसी भी भाग में पथरी होती है तो पेशाब करने में दिक्कत आती है। पेशाब रूक-रूक कर होती है कभी कभी पेशाब के साथ खून भी आता है। पेट में दर्द, लगातार कब्ज या दस्त होना।

बचाव

इसके बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए ताकि गुर्दे में नियमित पानी पहुंचें और कोशिकाओं को भी पानी की कमी न होने पाए, जिन लोगों को एक बार पथरी हो चुकी हो उन्हें दोबारा यह समस्या हो सकती है। ऐसे लोगों को पालक, टमाटर, आलू, चाय, चावल, नमक आदि बचकर खाना चाहिए।

एलोपैथी में इलाज

लखनऊ के यूरोलॉजिस्ट डॉ संजीव प्रसाद बताते हैं, ''एलोपैथ में स्टोन का इलाज केवल काटपीट कर निकालना यानि सर्जरी है। समय से अगर पथरी नहीं निकाली गई तो वो अंग जहां स्टोन है वो पूरी तरह से खराब हो जाता है और उसे भी निकालना पड़ता है। इसमें मरीज को मैदे की चीजें, शराब, तम्बाकू और रेड मीट तो बिल्कुल जहर है, जितना मोटा अनाज खाएं और पानी पिए बेहतर होगा।"

होमोपैथी इलाज

लखनऊ के अलीगंज निवासी कविता सिंह (43वर्ष) बताती हैं, ''मेरे पथरी था और अचानक से बहुत तेज दर्द उठता था। डॉक्टर जब तक इंजेक्शन नहीं देते थे आराम नहीं होता था। हमेशा डर लगा रहता था क्योंकि दर्द बहुत भयानक होता था। एकमात्र इलाज ऑपरेशन बता रहा थे फिर होमोपैथिक दवा लेनी शुरू की तीन महीने में मुझे आराम मिला, अब दर्द नहीं होता।" होमोपैथ में पथरी का इलाज बताते हुए डॉ अविनाश श्रीवास्तव बताते हैं, ''होमोपैथी दवा से डेढ़ से दो महीने मे ही पथरी टूट कर निकल जाती है। इन दवाओं का साइड इफेक्ट नहीं है। ये पथरी को गलाकर निकालती है इसमें समय लगता है लेकिन काटपीट नहीं होती है। पथरी का सबसे कारगर इलाज होमोपैथ में ही है।"

आयुर्वेदिक इलाज

किडनी, मूत्राशय, मूत्र नलिका आदि में पथरी का होना या बनना कोई नया या अनजाना रोग नहीं है लेकिन अब तक इसके इलाज के लिए कोई चुनौतीपूर्ण और सटीक उत्पाद का बाजार में ना होना दुखद है। विभिन्न रसायनों से बने छोटे-छोटे कणों का जमाव पथरी का निर्माण करते हैं। पथरी मुख्यत: कैल्सियम फास्फेट, कैल्सियम ओक्सालेट, यूरिक एसिड और मैग्नेशियम अमोनियम फास्फेट जैसे रसायनों के क्रिस्टल्स के जमाव के कारण होती है। ज्यादातर जमीन में पाए जाने वाले कठोर पानी और ज्यादा मिनरल्स युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से पथरी होने की संभावनांए बढ़ जाती है।

लिथोट्रिप्सी जैसे उपचारो के चलते रोगी को काफ़ी हद तक आराम जरूर हो जाता है लेकिन 20 से 50 हजार के इस खर्च का वहन कर पाना हर किसी के बस का भी नहीं होता है। इतने महंगे रोगोपचार को आखिर हर इंसान कैसे अपना सकता है। कुछ परंपरागत हर्बल ज्ञान का इस्तेमाल कर इस रोग की छुट्टी कर सकते हैं।

क्या कहते हैं हर्बल जानकार डॉ.दीपक आचार्य बताते हैं

गिलोय- गिलोय को गुड़ूची के नाम से भी जाना जाता है। वनों में पायी जाने वाली इस बेल को पथरी और पथरी से जुड़े अन्य विकारों के इलाज के लिए जबरदस्त माना गया है। पेशाब करते समय यदि जलन महसूस हो तो गिलोय के तने का चूर्ण 10 ग्राम आंवला के फलों का चूर्ण 10 ग्राम सोंठ चूर्ण 5 ग्राम गोखरु के बीजों का चूर्ण 3 ग्राम और अश्वगंधा की जड़ों का चूर्ण 5 ग्राम लिया जाए और इसे 100मिली पानी में उबाला जाए, प्राप्त काढ़े को रोगी को दिन में एक बार प्रतिदिन एक माह तक दिया जाना चाहिए।

पुनर्नवा- खरपतवार समझे जाने वाला यह पौधा किडनी में पथरी के लिए एक महत्वपूर्ण पौधा है। पातालकोट के आदिवासियों के अनुसार पथरी की वजह से कमर और पेट में दर्द होने पर पुनर्नवा,कचूर और अदरक की समान मात्रा लेकर रोगी को खिलाना चाहिए, दर्द में तुरंत आराम मिलता है।

अश्वगंधा- अश्वगंधा की जड़ों का गुनगुना रस पीने से पथरी का दर्द कम होता है। अश्वगंधा की जड़ों का रस और आंवला के फ लों का रस समान मात्रा में आधा आधा कप लिया जाए तो मूत्राशय और मूत्र मार्ग में पेशाब करते समय जलन की शिकायत खत्म हो जाती है और माना जाता है कि यह पथरी को गलाकर पेशाब मार्ग से बाहर भी निकाल फेंकता है। अच्छे परिणामों के लिए इस नुस्खे का इस्तेमाल कम से कम दो माह तक किया जाना चाहिए।

सौंफ - सौंफ की चाय को पथरी के इलाज के लिए एक कारगर उपाय माना जाता है। सौंफ की चाय बनाने के लिए आधा चम्मच सौंफ के बीजों को कुचल लिया जाए और दो कप पानी में पांच मिनट तक उबाला जाए, जब यह गुनगुना हो जाए तो इसे पी लिया जाना चाहिए। ऐसा प्रत्येक दिन दो से तीन बार किया जाए तो पेट दर्द और किडनी के दर्द में राहत मिलती है। सौंफ की जड़ों का रस 25 मिली दिन में दो बार लेने से पेशाब से जुड़ी समस्याओं में तेजी से राहत मिलती है।

आंवला- पेशाब करते समय जलन या कम पेशाब होने की शिकायत हो तो आंवले से बेहतर उपचार कोई और नहीं। आंवले के फलों का रस, शक्कर और घी का मिश्रण अतिकारगर होता है। हर्बल जानकार भुमका आंवले के रस के साथ, इलायची के दानों को मिलाते है और हल्का गर्म करके पीने की सलाह देते हैं, इनके अनुसार उल्टियां, चक्कर या पेट दर्द जैसी समस्याओं में यह राहत देता ही है, साथ पथरी को भी निकाल फेंकने में सक्षम होता है। दारू, हल्दी और आंवले के फलों का चूर्ण समान मात्रा में लेने से पेशाब संबंधित समस्याओं में गजब का फायदा होता है।

बड़ा नींबू या कागज़ी नींबू - इसका एक गिलास रस तैयार कर सुबह-सुबह खाली पेट पी लिया जाए, पांच मिमी के आकार तक की पथरी घुलकर निकल आने का दावा ग्रामीण अंचलों के जानकार करते हैं।

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