Nipah Virus Outbreak: WHO ने जारी की चेतावनी, क्या आम लोगों को डरने की है ज़रूरत?
WHO की ताजा रिपोर्ट के बाद निपाह वायरस एक बार फिर चर्चा में है। भारत में सामने आए नए मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। निपाह वायरस कितना खतरनाक है, यह कैसे फैलता है, इसके लक्षण क्या हैं और आम लोग इससे कैसे बच सकते हैं?
देश में निपाह वायरस के संक्रमण के मामले सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने निपाह वायरस (Nipah Virus) से जुड़े मामलों पर जानकारी दी है। कोरोना के बाद लोगों के मन में इस वायरस को लेकर कई तरह के सवाल हैं, चलिए जानते हैं क्या है वायरस और इससे खुद को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है?
पश्चिम बंगाल के बरासात इलाके में जनवरी 2026 में दो लोगों में निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई। दोनों संक्रमित स्वास्थ्य कर्मी थे, एक महिला और एक पुरुष नर्स। उन्हें राष्ट्रीय virology लैब में परीक्षण के बाद NiV पॉज़िटिव पाया गया। एक मरीज गंभीर हालत में है, जबकि दूसरा बेहतर हो रहा है। WHO को भारत से इस सूचना की आधिकारिक जानकारी 26 जनवरी को दी गई थी।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 190 से ज़्यादा लोगों का संपर्क परीक्षण (contact tracing) किया, जिनमें से सभी के नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई, यानी किसी में संक्रमण नहीं मिला। इससे संकेत मिलता है कि वायरस का आगे फैलाव फिलहाल सीमित रखा गया है।
यह घटना भारत में निपाह वायरस (NiV) संक्रमण का 13वाँ मामला है और पश्चिम बंगाल में तीसरी बार यह बीमारी सामने आई है। साल 2001 से अब तक भारत में कुल 12 प्रकोप पहले हो चुके हैं, इनमें से 10 केरल में और 2 पश्चिम बंगाल में थे। पश्चिम बंगाल में पहले मामले 2001 में सिलीगुड़ी और 2007 में नदिया जिले में मिले थे।
भारत में हर साल निपाह के मामले ज्यादा नहीं होते। 2001 में सबसे ज्यादा 66 मामले आए थे और 2018 में 18 मामले दर्ज हुए थे। पिछले 5 सालों में करीब 12 मामले सामने आए हैं और ये सभी केरल में पाए गए। भारत सरकार ने बीमारी पर नजर रखने के लिए निगरानी व्यवस्था बनाई है, रैपिड रिस्पॉन्स टीमें तैनात हैं और जांच की सुविधा भी तेजी से उपलब्ध कराई जाती है।
निपाह वायरस क्या है?
निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है और इंसान-से-इंसान भी फैल सकता है। इसका प्राकृतिक घर फल खाने वाले चमगादड़ (Fruit bats) हैं। ये चमगादड़ वायरस के होस्ट माने जाते हैं और उनके संपर्क, उनके संक्रमित रहने वाले भोजन से इंसानों को संक्रमण हो सकता है।
यह वायरस पहली बार 1998 में मलेशिया में पहचाना गया था और तब इसे निपाह नाम उस गांव के नाम पर दिया गया था जहाँ यह पहली बार पाया गया था। इसके बाद यह वायरस बांग्लादेश, भारत, मलेशिया और सिंगापुर के कुछ हिस्सों में भी समय-समय पर देखा गया है।
संक्रमण के लक्षण
निपाह वायरस का संक्रमण कई तरह के लक्षण दिखा सकता है। चलिए जानते हैं इसके शुरूआती लक्षण क्या होते हैं?
संक्रमण होने के बाद तेज़ बुखार, सिरदर्द, खांसी और गले में दर्द, सांस लेने में मुश्किल, जी मचलाना या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
कई मामलों में यह दिमाग की सूजन (encephalitis) का कारण बन सकता है, जिससे चक्कर, नींद-सी अवस्था, भ्रम या दौरे भी हो सकते हैं। गंभीर स्थितियों में मरीज को कोमा तक आ सकता है।
वायरस की मौत दर बहुत अधिक होती है — लगभग 40 % से 75 % तक, इस पर निर्भर करता है कि संक्रमण कब और कैसे पाया गया और स्थानीय स्वास्थ्य-प्रणाली कितनी सक्षम है।
कैसे फैलता है?
निपाह वायरस कई तरह से फैलता है से फैल सकता है, जैसे संक्रमित चमगादड़ या जानवरों के सीने के तरल पदार्थ, लार या मूत्र के संपर्क से, संक्रमित व्यक्ति से नज़दीकी संपर्क में आने पर, ऐसे खाद्य पदार्थ खाने से जिन पर चमगादड़ का संक्रमण हो, जैसे कच्चा ताड़ का रस (date palm sap)। इसलिए स्वास्थ्य अधिकारियों ने आम लोगों को सतर्क रहने और जानवरों, खासकर चमगादड़ों के सम्पर्क से बचने की सलाह दी है।
क्या फैलाव का जोखिम है?
WHO का कहना है कि राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर फैलाव का जोखिम अभी कम माना जा रहा है। अब तक न तो अन्य लोगों में संक्रमण का सबूत मिला है और न ही संक्रमित मरीज ने सिम्पटम के दौरान कहीं यात्रा की है।
हालाँकि कई एशियाई देशों ने विमानस्थलों पर स्क्रीनिंग और तापमान जांच जैसे कदम उठाए हैं, यह ज़्यादातर यात्री सुरक्षा और मानसिक सकून के लिए है, न कि वैज्ञानिक रूप से फैलाव रोकने वाला कदम। विशेषज्ञ इन जांचों को सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के प्रयास मानते हैं।
क्या इलाज या टीका उपलब्ध है?
अभी कोई निश्चित इलाज या वैक्सीन निपाह वायरस के लिए मान्य नहीं है, लेकिन शोध और विकास जारी है।
क्या सावधानियाँ अपनानी चाहिए?
WHO के अनुसार संक्रमण से बचने के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें, जैसे चमगादड़ और संदिग्ध जानवरों से दूरी बनाएँ, फल या खाद्य पदार्थ, खासकर कच्चा ताड़ का रस जैसे पेय, पहले अच्छी तरह धोएं या पकाएँ, संदिग्ध मरीजों के नज़दीक जाने से बचें और चिकित्सकीय सलाह लें।