INDvsPAK : कप्तान कोहली ने ये गलतियां न की होती तो कप हमारा होता
नई दिल्ली। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी, 2017 (ICC Champions Trophy) के फाइनल में टीम इंडिया को पाकिस्तान ने उम्मीद के विपरीत 180 रन से करारी मात देते हुए पहली बार इस खिताब पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तान की ओर से रखे गए 339 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया की पारी 30.3 ओवर में 158 रन बनाकर सिमट गई।
हार्दिक पांड्या ने 76 रन (43 गेंद, 4 चौके, 6 छक्के) की तूफानी पारी खेली और सम्मान बचाने की कोशिश की। उन्होंने 32 गेंदों में फिफ्टी पूरी की. पाकिस्तान ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 4 विकेट पर 338 रन बनाए थे, जिसमें फखर जमां के 114 रन (106 गेंद, 12 चौके, 3 छक्के) का अहम योगदान रहा। गेंदबाजी में पाक की ओर से मोहम्मद आमिर और हसन अली के खाते में तीन-तीन विकेट गए, तो शादाब खान ने दो विकेट और जुनैद खान ने एक विकेट लिया. भारत का एक बल्लेबाज (हार्दिक पांड्या) रनआउट हुआ। नजर डालते हैं उन पांच कारणों पर जिस कारण भारत की हार हुयी।
टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला
भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को देखते हुए विराट कोहली का टॉस जीतकर पाकिस्तान को बल्लेबाजी के लिए उतारना फैंस के गले नहीं उतरा। पाकिस्तान ने उसका पूरा फायदा उठाया, हालांकि किस्मत भी उसके साथ दिखी। फखर जमां जब तीन रन पर पर थे, तभी जसप्रीत बुमराह की गेंद पर वह लपक लिए गए थे, लेकिन वह नोबॉल निकली। आखिरकार टीम इंडिया फखर के शतक से बड़े स्कोर के दबाव में आ गई।
अश्विन से पूरे ओवर कराना
रविचंद्रन अश्विन को एक दिन पहले घुटने में प्रैक्टिस के दौरान चोट लगी थी। उनके खेलना तय नहीं माना जा रहा था। आखिरकार उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। विराट ने उन पर ज्यादा ही भरोसा जताया और उनसे कोटे के पूरे ओवर फेंकवाए। लेकिन 10 ओवर में उन्होंने 70 रन खर्च कर डाले। उन्हें एक भी सफलता नहीं मिली।
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केदार जाधव को देर से लगाना
बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में केदार जाधव खासे काम आए थे। लेकिन इस मैच में कप्तान ने काफी देर बाद उन्हें याद किया। स्लॉग ओवर्स में उनसे गेंदें फेंकवाई गईं। 39वें ओवर में जाधव ने 7 रन दिए। 43 वें ओवर में हालांकि उन्होंने 4 देकर 1 विकेट लिया। लेकिन 45वें ओवर में जाधव को 16 रन चुकाने पड़े। जिसके बाद उन्हें गेंदबाजी से हटाना पड़ा।
युवराज सिंह गेंदबाजी क्यों नहीं
फैंस का मानना था कि विराट कोहली ऐसे मौके पर युवराज सिंह का इस्तेमाल करना चाहिए थे। एक चेंज बॉलर के तौर पर युवराज टीम इंडिया के लिए फायदेमंद साबित हो सकते थे।
मध्य क्रम का फेल होना
चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत का शीर्ष बल्लेबाजी क्रम बिखर गया। फाइनल में पहुंचने से पहले तक चार मुकाबलों में टीम इंडिया के मध्य क्रम की परीक्षा हो ही नहीं पाई थी। और फाइनल में जब मिडिल ऑर्डर पर पारी संभालने की बारी आई तो, टीम इंडिया की पोल खुल गई। मध्य क्रम बुरी तरह फ्लॉप रहा। कोई भी फिनिशर बनकर क्रीज पर खड़ा नहीं हो पाया।