उत्तर प्रदेश की नहरों में नहीं हो रही सफाई, कहीं पाटकर बनाए जा रहे मकान तो कहीं हो रही खेती

उत्तर प्रदेश की नहरों में नहीं हो रही सफाई, कहीं पाटकर बनाए जा रहे मकान तो कहीं हो रही खेतीकई जिलों में ऐसे सूखी पड़ी है नहरें, उगी है घास। 

स्वयं प्रोजेक्ट टीम

लखनऊ। सिंचाई के लिए उत्तर प्रदेश में नहरों का जाल जरूर बिछा है, लेकिन किसान को सिंचाई के लिए समय पर पानी नहीं मिल पाता। हालात तो यहां तक हैं कि कहीं लोगों ने नहरों पर घर बना लिए, तो कहीं नहरों में खेती की जा रही है।

प्रदेश सरकार ने बरसात से पहले नहरों की सफाई और सिल्ट निकालने के आदेश दिए थे। लेकिन ‘गाँव कनेक्शन’ ने जब जिलों में नहरों की सफाई व्यवस्था देखी तो सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए अफसरों-कर्मचारियों की बंदरबांट सामने आई। किसी जिले में सिल्ट की सफाई नहीं हुई, तो कहीं नहर में घास उगी है। कई नहरें तो ऐसी भी हैं कि जहां 40 सालों से पानी ही नहीं आया।

इलाहाबाद के मेजा ब्लॉक के पकड़ी गाँव निवासी दिलीप सोनकर (46 वर्ष) कहते हैं, “पिछले 40 सालों में हमने नहर में पानी नहीं देखा। जब जरूरत होती है तो ट्यूबवेल से खेतों की सिचाई करते हैं।” नहरों की सफाई हो या नहीं, लेकिन कर किसानों से हर साल पैसा वसूला जाता है।

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उत्तर प्रदेश में करीब 50 हजार किमी नहरों का जाल है और नहरों से सिंचित क्षेत्र करीब 70 लाख हेक्टेयर है। सिंचाई विभाग की मुस्तैदी तो शाहजहांपुर में साफ नजर आती है, यहां जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर भावलखेड़ा ब्लॉक और सिंधौली ब्लॉक के बॉर्डर पर 20 साल सूखी नहर पर लोगों ने घर तक बना लिए। यही नहीं नहर में ही खेती भी करनी शुरू कर दी।

“जब इस नहर में पानी आना बंद हो गया। तब लोगों ने नहर को जोत दिया और नहर के ऊपर गन्ना लगा दिया और मकान भी बना लिया। किसानों को खेती सिंचाई करने के लिए प्राइवेट मोटर से पानी किराए पर लेना पड़ता है।” भावल खेड़ा निवासी योगेश मिश्रा (50 वर्ष) बताते हैं, “नहर के ऊपर पूरा का पूरा गाँव बस गया है।”

नहरों की सफाई पर जिलों के विभागीय अफसरों की गंभीरता का हाल यह है कि उनके पास आंकड़ा तक नहीं कि कितनी सफाई हो चुकी है। वहीं, विभाग ने नहरों की सफाई खरीफ से पहले कराने का आदेश जारी किया है, वहीं जिलों के अधिकारियों को इसके बारे में पता ही नहीं। “खरीफ के सीजन में कोई साफ-सफाई नहीं की जाती है, रबी के सीजन में नहरों की साफ-सफाई की जाएगी,” अरुण कुमार, गोरखपुर में सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने कहा।

जबकि कई जिलों में बिना साफ-सफाई के पानी छोड़ दिया गया, जो नहरें ओवर फ्लो कर रही हैं। जौनपुर के मीरगंज ब्लॉक के बिस्वां निवासी जेपी यादव (38 वर्ष) बताते हैं,“ बिस्वा नहर में बड़े—बड़े पेड़ उग आए हैं। इसके अलावा घास और सिल्ट भी है।

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न ही नहर की सफाई हुई है और न ही इसमें पानी छोड़ा गया है।”इस बारे में जौनपुर के नोडल अधिकारी एसके सिंह कहते हैं, “नहरों की साफ—सफाई काम तेजी से किया जा रहा है। कितनी नहरें साफ हुई हैं। इसका आंकड़ा नहीं जुट सका है। जल्द ही सभी नहरों की सफाई पूरी कर ली जाएगी।“

उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया, उत्तर प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाने और मजबूत करने के लिए सरकार काम कर रही है। हर खेत तक आसानी से पानी पहुंचे, इसके लिए नहरों की सफाई का आदेश देने के साथ ही धन भी आवंटित कर दिया गया है। आदेश का पालन न करने वाले अफसरों पर उचित कार्रवाई होगी।

चार दशक से नहर में पानी का इंतजार

इलाहाबाद। नहरों की स्थिति को सुधारने के लिए जिले के सभी विकास खण्डों के किसान वर्षों से मांग करते चले आ रहे हैं, लेकिन इसका असर विभागीय अधिकारियों पर नज़र नहीं आ रहा है। जिले के 20 विकास खण्डों की बात करें तो हर जगह नहर की स्थिति खराब है। करछना तहसील के खाई मुंडा गाँव से भरपूर गाँव के बीच तकरीबन 40 साल से पानी नहीं आया, लेकिन किसानों से इसका कर वसूला जाता है। यह तो बानगी मात्र है। जिले के सभी क्षेत्रों में नहरों की हाल ऐसा ही है। नहरों में जमा घास-फूंस और मिट्टी की वजह से किसानों के खेतों तक नहर का पानी नहीं पहुंच पाता है।

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मेजा विकास खण्ड की स्थिति को देखा जा सकता है, जहां नहरों में 40 साल से किसानों ने पानी का दर्शन नहीं किया। पकड़ी गाँव निवासी दिलीप सोनकर (46 वर्ष) बताते हैं, “जब जरूरत होती है तो ट्यूबवेल से खेतों की सिंचाई करते हैं। नहर में पानी अपने होश में नही देखा।” हरभोगवा गाँव निवासी छोटेलाल (35 वर्ष) बताते हैं, “खेत तक पानी आज तक नहीं पहुंच पाया, उसके पहले ही दबंग लोग नहर को काटकर पूरा पानी बहा लेते हैं। हर साल नहर का शुल्क जमा करना पड़ता है।”

करछना तहसील अंतर्गत खाई मुंडा गाँव निवासी प्रदीप (41वर्ष) का कहना है, “नहरों में फैली गंदगी की वजह से पानी का बहाव कम होता है, जिससे गाँव तक पानी नहीं पहुंच पाता है। इनका यह भी कहना है की पानी को लेकर किसानों में आये दिन विवाद होता रहता है, लेकिन विभागीय अधिकारी इस समस्या का हल नहीं निकाल रहे हैं।”

उमरान अली (35 वर्ष) बताते हैं, “नहर में पानी आना बंद हो गया था, नहर सूखी पड़ी थी। तो हमने खाली जगह देखकर अपना मकान बना लिया अगर नहर फिर से चालू हो जाती है तो हम अपना मकान नहर के ऊपर से हटा देंगे।”

सिल्ट सफाई के लिए आए बजट का कुछ पता नहीं

पीलीभीत। प्रतिवर्ष बारिश के मौसम के बाद नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य किया जाता है, जिससे नहरों में उचित मात्रा में पानी का बहाव हो सके और दूर तक किसानों के खेतों में फसलों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सके।

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हरदोई ब्रांच नहर प्रदेश के कई जनपदों के किसानों की फसलों को सींचने का कार्य करती है। समाजवादी सरकार ने हरदोई ब्रांच नहर की सिल्ट सफाई के लिए एक बड़ा बजट स्वीकृत किया था, जिससे नहर के दोनों किनारों पर पत्थर लगाने के अलावा सिल्ट सफाई करने के साथ ही नहर की मुंडेर मिट्टी से चौड़ी बनाई जानी थी, लेकिन करोड़ों की लागत से हुए इस काम में जमकर धांधलेबाजी हुई। ग्राम ढ़का के निवासी (65 वर्ष) पूर्व फौजी सरदार मुख़्तार सिंह ने बताया, “सिल्ट सफाई का कार्य बरसात के बाद होना चाहिए लेकिन सिंचाई विभाग सिल्ट सफाई के नाम पर आये भारी बजट को हजम कर जाता है।”

शारदा नहर खंड के अधिशाषी अभियंता हरिशचंद्र यादव ने बताया कि इस बार जनपद की अधिकतर नहरों से सिल्ट की सफाई का काम हो चुका है। वहीं पर्याप्त बजट नहीं होने के कारण कुछ काम अधूरा है। बजट मिलते ही काम पूरा करा लिया जाएगा।

सूखी नहर पर कब्जा कर बना लिया मकान

शाहजहांपुर। जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर ब्लॉक भावल खेड़ा और ब्लॉक सिंधौली के बॉर्डर पर स्थित नहर है। जो 20 वर्षों से सूखी पड़ी है। 20 साल पहले इस नहर से 30 गाँव में पानी जाता था। अब इस नहर पर लोगों ने अपने मकान बना लिए हैं तो किसी ने नहर के ऊपर खेती करनी शुरू कर दी है। नहर से पानी न मिलने के कारण गरीब किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खेत की सिंचाई के लिए किराया देकर पानी भी लेना पड़ता है।

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भावल खेड़ा निवासी योगेश मिश्रा (50 वर्ष) बताते हैं, “जब इस नहर में पानी आना बंद हो गया। तब लोगों ने नहर को जोत दिया और नहर के ऊपर गन्ना लगा दिया और मकान भी बना लिया। किसानों को खेती सिंचाई करने के लिए प्राइवेट मोटर से पानी किराए पर लेना पड़ता है।”

वहीं इसी क्षेत्र के रहने वाले रामलाल (40 वर्ष) बताते हैं, “नहर के पीछे करनैय्यापुर गाँव है जो पूरा नहर के ऊपर बसा है। नहर में पानी न आने के कारण फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है। पानी नहीं मिलता है तो फसलें सूख जाती हैं।”

शुल्क तो अदा करते हैं, पर नहीं मिलता पानी

नवाबगंज। नवाबगंज विकासखंड में किसानों को नहर का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह हाल तब है जब वह हर वर्ष नहर से सिंचाई की सुविधा के नाम पर किसान शुल्क अदा करते हैं। बीते छह वर्षों से मौरावां-आसीवन ब्रांच सूखी पड़ी थी। ऐसे में नहर में खर-पतवार जमा हो गए। इस बीच प्रदेश में जब सरकार बदली तो नहर विभाग कुछ सक्रिय हुआ और नहर में पानी छोड़ दिया, लेकिन सफाई कराने से पहले नहर में पानी छोड़ दिए जाने से किसानों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।

सरायजो गाँव निवासी विजय शंकर यादव (50 वर्ष) बताते हैं, “जब जरूरत होती है तो ट्यूबवेल से खेतों की सिंचाई करते हैं। नहर में पानी कई वर्षों से नहीं देखा।” महनौरा निवासी जगन्नाथ वर्मा (45 वर्ष) बताते हैं, “खेत तक पानी आज तक नहीं पहुंच पाया उसके पहले ही दबंग लोग नहर को काटकर पूरा पानी बहा लेते हैं। हम तो बोरिंग के माध्यम से ही सिंचाई करते हैं जबकि हर साल सिंचाई के नाम पर शुल्क हमें जमा करना पड़ता है।” अमरेठा निवासी राजकुमार (36 वर्ष) का कहना है, “नहरों में फैली गंदगी की वजह से पानी का बहाव कम होता है, जिससे खेत तक पानी नहीं पहुंच पाता है।

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नवाबगंज में रहने वाले विद्यासागर (75 वर्ष) ने बताया, “आसीवन ब्रांच की क्षमता 600 क्यूसेक पानी की है, लेकिन पटरी इतनी कमजोर हो गई है कि पूरी क्षमता से पानी आ नहीं पाता। पटरी की चौड़ाई कुछ फुट की बची है, जिससे अधिकारी निरीक्षण भी नहीं कर पाते।” उधर, विकास खण्ड बीघापुर की ओसियां से इन्देमऊ माइनर व भगवन्तनगर तक माइनरों में कई वर्षों से किसान बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। सरकारी घोषणाएं कागज पर ही सिमटकर किसानों के जले में नमक छिड़कने का काम करती रहीं हैं।

शारदा नहर के अधिशाषी अभियंता संजय कुमार झा ने बताया कि सफाई के लिए टेंडर कर दिया गया है, जल्द ही नहरों और माइनरों की सफाई करा दी जाएगी।

नहरों में जमी सिल्ट, उगी घास

जौनपुर। सरकारी आदेश के मुताबिक अब तक नहरों की साफ-सफाई के अलावा उसमें पानी आ जाना चाहिए, लेकिन जौनपुर जिले की हालत यह है कि 340 नहरों में अभी कितने की सफाई हुई है विभाग इसका डाटा ही नहीं जुटा सका है। नहरों की हकीकत यह है कि उसमें सिल्ट जमी हुई है। घास उगी है।

सिंचाई विभाग के आंकड़े के मुताबिक, जिले में 340 नहरें हैं। ज्यादातर इलाकों में किसान नहरों के पानी से सिंचाई करने पर निर्भर हैं। यदि नहरों में पानी नहीं आता तो फिर ट्यूबवेल का पानी इस्तेमाल सिंचाई में करते हैं। धान की खेती के लिए पानी की ज्यादा जरूरत होती है।

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ऐसे में बारिश या फिर नहरों में पानी आने के बाद अच्छी तरह से धान लगाने में सहूलियत मिलती है। मछलीशहर तहसील निवासी चौकीखुर्द विनय पांडेय (50 वर्ष) का कहना है, “साफ-सफाई नहीं हुई है। यही हाल हर वर्ष होता है।सिर्फ और सिर्फ कागजों पर ही नहरों की सफाई का काम दिखा दिया जाता है। जबकि हकीकत इससे जुदा होती है।”

वहीं अभी तक मानसून ने जिले में दस्तक नहीं दी है। इसलिए किसानों को उम्मीद थी कि सरकारी आदेश के बाद सिंचाई विभाग जल्दी-जल्दी नहरों की साफ-सफाई करके नहरों में उन्हें पानी मुहैया करा देगा। ताकि धान बोया जा सके, लेकिन हकीकत में कुछ ऐसा नहीं हुआ है। नजीर के तौर देख लें तो मछलीशहर ब्लॉक के अंतर्गत शारदा सहायक नहर के बिस्वांमाइनर में अभी तक पानी नहीं पहुंचा है। जबकि यहां के किसान पानी न मिल पाने की वजह से धान नहीं लगा पा रहे हैं। इसी तरह जिले के अन्य इलाकों का भी यही हाल है। जहां पानी न मिल पाने की वजह से किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है।

इसी तरह सोंधी ब्लॉक में आने वाली शारदा सहायक खंड 36 नहर में पानी तो आ गया है, लेकिन साफ-सफाई और मरम्मत सही से नहीं की गई है। इसलिए नहर का पानी ओवरफ्लो हो जा रहा है, जिससे भी किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सोंधी ब्लॉक के पोटरिया निवासी असलम परवेज (55 वर्ष) का कहना है, “नहर की साफ—सफाई किए बिना ही पानी छोड़ दिया गया है।

इससे हम किसानों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।” इसी ब्लॉक के मुढ़ैला निवासी राजेश यादव (40 वर्ष) का कहना है, “सिंचाईविभाग ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। इसकी वजह से परेशान हो रही है।” वहीं मीरगंज ब्लॉक के बिस्वां के जेपी यादव (38 वर्ष) का कहना है, “बिस्वा नहर में बड़े-बड़े पेड़ उग आए हैं। इसके अलावा घास-फूंस और सिल्ट भी है।”

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सिंचाई विभाग के नोडल अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि नहरों की साफ-सफाई काम तेजी से किया जा रहा है। कितनी नहरें साफ हुई हैं। इसका आंकड़ा नहीं जुटाया जाया सका है। जल्द ही सभी नहरों की सफाई पूरी कर ली जाएगी।

पानी न आने से नहर को बना दिया खेत

अलीगढ़। जिले की नहरों का हाल बेहाल है। कुछ नहर और बंबों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर में पानी ही नहीं आता है। किसान सिंचाई के लिए बेहद परेशान हैं। नहरों की सफाई तक नहीं हो रही।अतरौली ब्लाक के कमालपुर निवासी जगवीर सिंह (55 वर्ष) का कहना है, “किसानों को सिंचाई विभाग पानी की कोई सुविधा नहीं दे रहा। ज्यादातर बंबा और रजवाहे सूखे पडे हैं।” गाँव बहरातव निवसी कंचन सिंह (54 वर्ष) का कहना है, “नहर, बंबों की सफाई हो भी रही है तो वह जेसीबी से कराई जा रही है। जबकि मनरेगा से सफाई होनी चाहिए जिससे कि लोगों को मजदूरी मिले।”

एसडीएम शिवकुमार ने बताया कि किसानों को पानी देने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई है। नहर और बंबा जल्द ही पानी से लबालब नजर आएंगे ।

बिना पानी के नर्सरी लगाने को मजबूर किसान

कन्नौज। इन दिनों धान की नर्सरी डालने का काम चल रहा है, लेकिन नहरों, रजवाहों, माइनर और नदियों में पानी का अभाव है। किसान परेशान है। बिजली कटौती के चलते सबमर्सिबल भी किसान नहीं चला पा रहे हैं। इस बाबत कुछ किसानों से बात की तो उन्होंने अपनी परेशानी बयां कीं।

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जिला मुख्यालय कन्नौज से करीब 75 किमी दूर बसे नगला विशुना गाँव निवासी सुदेश कुमार (44 वर्ष) कहते हैं, ‘‘सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। न नहरों की सफाई हुई न पानी आ रहा है।’’लालपुर गाँव निवासी मुकेश पाल (40 वर्ष) कहते हैं, ‘‘सरकार आदेश देती है और अधिकारी अनदेखी करते हैं। उसके बीच में किसान पिस रहा है।’’ ग्राम देईपुर निवासी शंकरदयाल (33 वर्ष) का कहना है, ‘‘धान की खेती कैसे होगी, नहरों में पानी नहीं है और सफाई कब होगी या नहीं होगी कुछ पता नहीं। धान की नर्सरी खत्म हो रही है।

मैनपुरी और कन्नौज जिले में यह नहर निकली है, जिसकी अपने जिले में लंबाई 30 किमी है।’’ तिर्वा तहसील मुख्यालय से करीब 13 किमी दूर बसे गाँव मिडईपुर्वा निवासी जितेन्द्र कनौजिया (35 वर्ष) कहते हैं, ‘‘नहर किनारे 35-40 बीघा जमीन है। बिजली नहीं आ रही, जिससे सबमर्सिबल नहीं चल पा रहे हैं। धान और मक्का की फसल सूख रही है। नहर में करीब एक महीने से पानी नहीं आ रहा है। सफाई भी नहीं हुई है।”हसेरन ब्लाक क्षेत्र के कंसुआ के निकट से यह नहर बलनपुर तक गया है। क्षेत्र के करीब 65 गाँव के किसान इससे प्रभावित हैं। पानी की कमी से फसलें सूख रही हैं।

सिंचाई खंड-कन्नौज के अधिशाषी अभियंता आलोक चतुर्वेदी ने बताया कि करीब 15 दिन नहरों की सफाई का काम चलेगा। इस बीच पानी नहीं छोड़ा जाएगा।

नहर को पक्का किये जाने से पानी की किल्लत

एटा। निचली गंगा नहर जिले की सबसे बड़ी नहर है। नहर को इन दिनों पक्का किया जा रहा है, जिसके कारण नहर में पानी नहीं है। वहीं नहर की सिल्ट और रेत किनारे पर डाली गई है, जिसके कारण समीप के खेतों में रेत होने से किसानों को दिक्कत हो रही है। ओरनी निवासी राजवीर (65 वर्ष) बताते हैं, “नहर में पानी न आने के कारण खेती में दिक्कत तो है। धान के लिए खेत तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन पानी नहीं है।”

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मीरापुर निवासी पप्पू (42 वर्ष) कहते हैं, “नहर पक्की हो रही है, जिसमें पानी नहीं है। पानी न होने की वजह से धान की बुवाई में परेशानी हो रही है।” गाँव भटपुरा निवासी महेंद्र (55 वर्ष) का कहना है, “नहर के पक्के होने से हमारे खेतों को नुकसान होगा।”

जनपद का माचुआ रजवाहा में पानी न होने की वजह से किसानों को भारी परेशानी है। गाँव त्रिलोकपुर निवासी दिनेश चौहान (56 वर्ष) कहते हैं, “इस रजवाहा में पानी काफी समय से नहीं आ रहा है, न तो इसका लाभ खरीफ की फसल में मिल पाता है और न ही रबी की फसल में।”

नहरों की सिल्ट सफाई मात्र औपचारिकता

रायबरेली। खरीफ का सीजन शुरू हो चुका है। सरकारी आदेश भी हो गया है कि नहरों की साफ-सफाई करा दी जाए, जिससे नहरों की टेल तक पानी पहुंच सके। नहरों से सिल्ट सफाई की सरकारी कवायद शुरू भी हो चुकी है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ होता नजर नहीं आ रहा है।

लालगंज ब्लाक के ऐहार गाँव निवासी चंदन त्रिवेदी (28 वर्ष) बताते हैं, “हमारे यहां से डलमऊ की कैनाल निकलती है, जिससे जुड़ी हुई छोटी-बड़ी 17 नहरें हैं। जिनमें केवल एक या दो नहरों में ही थोड़ा बहुत काम हुआ है बाकी नहरों में तो खर-पतवार हैं।” रायबरेली जनपद में कुल 453 नहर हैं, इससे जुड़ी हुई सैकड़ों अल्पिकाएं हैं जिनमें घास-फूंस खड़ी हैं। लालगंज के अतिरिक्त सरेनी, डलमऊ, हरचन्दपुर की नहरों की हालत भी खराब है।

अमांवा कैनाल की तो टेल ही टूटी पड़ी है अमावां निवासी गोले सिंह (65 वर्ष) बताते हैं, “पिछले दो साल पहले नहर विभाग के ही अधिकारियों ने टेल तुड़वा दी थी। ये टेल टूटी पड़ी है, जिससे लगभग 100 एकड़ से ज्यादा जमीन थी सिंचाई नहीं हो पा रही है।” वहीं इस मामले में नहर विभाग के एक्सईएन सिद्धार्थ कुमार ने बताया, “जिले की सभी 453 नहरों की सफाई के निर्देश दे दिये गये हैं और सफाई करायी जा रही है।”

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मुख्यमंत्री के जिले में भी नहरों की सफाई का बुरा हाल

गोरखपुर। शासन के आदेश की सिंचाई विभाग के अफसरों को परवाह नहीं है। नहरों की साफ-सफाई का आदेश मुख्यमंत्री के गृह जनपद में बेअसर साबित हो रहा है। खरीफ के सीजन के मद्देनजर किसानों के हित के लिए शासन ने नहरों की सफाई का आदेश दिया है, ताकि किसानों को सिंचाई करने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो, लेकिन सिंचाई विभाग के अफसर अपने पुराने रवैये से बाज नहीं आ रहे हैं।

दरअसल, जिले के चौरीचौरा व सहजनवां तहसील क्षेत्र का काफी हिस्सा नहरों पर आधारित सिंचाई पर निर्भर है। यहां के किसान नहर की पानी से फसलों की सिंचाई कर लेते हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि इस बार नहरों की साफ-सफाई नहीं हो सकी है। सिंचाई विभाग के अफसर नहरों की साफ-सफाई, कार्ययोजना या विवरण देने को तैयार नहीं है।

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अधीक्षण अभियंता अरुण कुमार बताते है, खरीफ के सीजन में कोई साफ-सफाई नहीं की जाती है, रबी के सीजन में नहरों की साफ-सफाई की जाएगी।

रिपोर्टिंग टीम

इलाहाबाद-ओपी सिंह परिहार, पीलीभीत-अनिल चौधरी, गोरखपुर-जितेंद्र तिवारी, शाहजहांपुर-ऋषभ मिश्रा, जौनपुर-खादिम अब्बास, कन्नौज-रविंद्र सिंह व विवेक राजपूत, एटा-मो. आमिल, रायबरेली-किशन कुमार, उन्नाव-श्रीवत्स अवस्थी, अलीगढ़-ज्ञानेश शर्मा।

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