डीएम ने पत्रकार से कहा- ‘तुम्हें पीट कर भेजूं या ऐसे ही भेजूं’ 

डीएम ने पत्रकार से कहा- ‘तुम्हें पीट कर भेजूं या ऐसे ही भेजूं’ सोलर स्ट्रीट लाइट से जुड़ी शिकायत लेकर डीएम अॉफिस में पहुंचे थे पत्रकार अमित ।

पत्रकार अमित की तरफ से भेजी गई आरटीआई के जवाब में, जब उसे यह पता चला कि सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने में जालौन में नगर पालिका परिषद ने ज़रूरत से अधिक बजट लिया है, तो वह शिकायत पर अपडेट लेने केे लिए डीएम के अॉफिस पहुंचे। अमित का आरोप है कार्रवाई पर वाजिब जवाब मिलना तो दूर डीएम ने गुस्से मेें कहा, “तुम्हें पीट कर भेजूं या ऐसे ही भेजूं” ।

फेसबुक पर अपनी इस आपबीती को साझा करते हुए अमित ने लिखा है कि जब मैं 23 अक्टूबर 2017 की गई शिकायत स्टेटस जानने डीएम अॉफिस पहुंचा, तो डीएम डॉ. मन्नान अख़्तर ने पहले तो शिकायत के प्रति अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि आप या तो ऑनलाइन शिकायती पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराइए अथवा फिर से हार्ड-कॉपी दीजिए।

जालौन के डीएम की बात सुनकर अमित ने पहले तो ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की कोशिश की लेकिन जब बात नहीं बनी, तो उसनेे भेजे गए 2 मेल का सीधे प्रिंट लेकर उस पर 16 मार्च की तारीख़ डाल दी और जिलाधिकारी को देने फिर उनके पास पहुंंच गये।

पत्रकार अमित ने जिले में लग रही सोलर लाइट को लेकर डीएम को भेजा था, यह शिकायत पत्र।

दोबारा जब अमित डीएम के दफ्तर पर अपनी शिकायत का प्रिंट लेकर पहुंचे तो डीएम ने कहा कि इस शिकायत का जवाब आपको ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर मिलेगा। जिस पर अमित के मुताबिक उन्होंने जानना चाहा कि ये जवाब कैसे मिलेगा ? मेरे पास कोई SMS या मेल नहीं आया। (मैंने तो कोई एकाउंट ही नहीं बनाया/ना ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज की) क्या मेरे पते पर कोई पत्र आएगा ?
दफ्तर में डीएम और अमित की बात सुनकर डीएम का अर्दली अमित से बाहर जाने के लिए बोला। पर अमित ने उसे मना कर दिया। यह देखकर गुस्से में आकर डीएम डॉ. मन्नान अख़्तर ने अमित से बोला तुम्हें पीट कर भेजूं या ऐसे ही भेजूं।

नोट- गांव कनेक्शन ने इस मामले में डीएम का पक्ष जानने के लिए कई बार उनके सीयूजी नंबर पर फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। गांव कनेक्शन से बात करते हुए अमित ने “जब एक पत्रकार से डीएम इस तरह से बात करते हैं, तो आम लोगों से बर्ताव की कल्पना की जा सकती है।”

क्या था मामला -

जालौन नगर पालिका परिषद द्वारा दिनांक में नगर में प्रकाश व्यवस्था के लिए 75 सौर-स्ट्रीट ( छोटी स्ट्रीट्स लाइट, एक पोल, एक बैटरी, एक पैनल, एक LED ) लाइट्स खरीदी गईं थीं। खर्च किए गए बजट के बारे में जानने के लिए जब अमित को RTI से मिली जानकारी से यह पता चला कि परिषद की तरफ से मंगवाई गई एक लाइट की इकाई की कीमत 45,000/- है, जबकि इसी क्षमता की एक लाइट की कीमत बाज़ार में 12,250/- है। इस तरह से मूल राशि से 33,750/- अधिक निकाले गए। तो वह इसकी शिकायत करने डीएम ( जालौन ) के दफ्तर पहंच गया।

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