बुंदेलखंड में क्यों हुई खाद की किल्लत? ललितपुर में खाद के लिए लाइन में लगे किसान की तबीयत बिगड़ने से मौत, जानिए पूरा मामला

बुंदेलखंड के ललितपुर में खाद के लिए लाइन में लगा एक बुजुर्ग किसान चक्कर खाकर गिर गया। लोग उसे अस्पताल ले गए जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। बुंदेलखंड के कई जिलों में 4-5 दिनों से खाद के लिए सैकड़ों किसान लाइन में हैं। आखिर एकाएक यहां खाद की इतनी किल्लत क्यों हो गई?

Arvind Singh ParmarArvind Singh Parmar   23 Oct 2021 12:38 PM GMT

ललितपुर (उत्तर प्रदेश)। बुंदेलखंड के के किसान भोगीपाल (52 वर्ष) की तबीयत उस वक्त बिगड़ गई जब वो डीएपी खाद के लिए लाइन में लगे थे। चक्कर खाकर गिरे किसान को लोगों ने जिला अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वो ललितपुर में थाना जाखलौन के नयागांव के रहने वाले थे।

नया गांव के प्रधान दिवेंद्र कुमार ने गांव कनेक्शन से कहा, "हमारे गांव के किसान भोगीपाल कल से खाद के लिए दुकान पर लाइन में लगे थे। सुबह (22 अक्टूबर) को वहां से बगल वालों को फोन आया कि वो बेहोश हो गए हैं। हम लोग उन्हें अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।"

मृतक किसान भोगीलाल के पास करीब 2 एकड़ जमीन है, उनके दो बेटे और चार बेटियां थीं, जिनकी शादी हो चुकी है। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद वो खेत बोने के लिए खाद के लिए परेशान थे, लेकिन खाद नहीं मिल पा रही थी। वो दो दिन से जुगपुरा में डीएपी के लिए इंतजार में थे।

मृतक किसान के परिजनों से मिलने के बाद जिलाधिकारी अन्नावि दिनेश कुमार ने कहा कि दुखद घटना है हम लोग यहां से रिपोर्ट लगाकर भेज रहे हैं पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपए दिए जाएंगे।

खाद की किल्लत और किसानों को परेशानी पर जिलाधिकारी ने कहा, "बारिश होने की वजह से सभी किसान बुआई करना चाहते हैं। इसलिए एकाएक मांग बढ़ गई है। हम लोगों सभी दुकानों से बातकर किसानों के लिए डीएपी यूरिया की इंतजाम करवा रहे हैं। हमने किसानों से कहा है कि सभी को एक साथ आने से खाद नहीं मिल पाएगी। हमने टोकन व्यवस्था कर दी है रोज 200 टोकन दिए जाएंगे।"

उन्होंने कहा कि अगर किसी दुकानदार से कैपेसिटी से कम खाद मिली तो उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। सील करेंगे और जरूरत पड़ने पर रिपोर्ट लिखवाएंगे।

ललितपुर में खाद के लिए लाइन में लगे किसान। फोटो- अरविंद परमार

बारिश के बाद किसानों ने शुरु की बुवाई, बढ़ गई किल्लत

14 से 20 अक्टूबर के बीच यूपी में सामान्य की 6.4 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 58.4 मिलीमीटर बारिश हुई जो औसत से 814 फीसदी ज्यादा थी इस दौरान 18 अक्टूबर को ललितपुर जिले में भी झमाझम बारिश हुई थी, खेतों में नमी को देखते हुए किसानों ने रबी सीजन की बुवाई शुरु कर दी। लेकिन उन्हें खाद की दिक्कत हो गई।

ललितपुर से 40 किमी दूर महरौनी कस्बे में खाद की दुकान पर लगी हजारों किसानों की भीड़ से कुछ दूरी पर बैठे रामापाल (65 वर्ष) सुस्ता रहे थे भीड़ में उनके दो लड़के खाद लेने के लिए खड़े हैं। रामापाल का ये पहला दिन नहीं था पिछले पांच दिनों से यहीं कहानी हर रोज रामापाल भुगत रहे हैं।

रामापाल जैसे हजारों भूखे प्यासे किसान डीएपी खाद के लिए दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं दुकानों पर भाग दौड़ में लगे हैं कि डीएपी खाद मिल जाय लेकिन नहीं मिलती। देर रात तक किसानों का खाद की दुकानों पर मजमा लगा रहता हैं।

रामापाल पचौड़ा गाँव के सीमांत किसान हैं उनके पास दस एकड़ भूमि हैं रामापाल को पाँचवें दिन दो डीएपी खाद की बोरी बड़ी मशक्कत के बाद मिल पाई। रामापाल किसान जैसे ललितपुर जिले के हजारों किसानों के चहरे पर चिंता के बादल मंडरा रहे हैं। किसानों के मुताबिक अगर उन्हें समय पर खाद मिल जाए तो उन्हें डीजल के हजारों रुपए बच सकते हैं। टैक्टर की ओर इशारा करते हुऐ रामापाल कहते हैं,"दो डीएपी की बोरियों में दस एकड़ की बोनी कैसे होगी पाँच दिनों में दो बोरियां मिल पाई। हमें आठ बोरियों की और जरूरत हैं। अब चिंता सता रही हैं कि बाकी बोरियों का इंतजाम कैसे हो?"

किसानों के मुताबिक अगर समय पर डीएपी मिल जाए तो न सिर्फ डीजल के हजारों रुपए बचेंगे बल्कि उनकी फसल भी अच्छी हो जाएगी। खाद के इंतजार में दो बुजुर्ग किसान। फोटो- अरविंद परमार

एक एकड़ पर एक बोरी का नियम

डीएपी खाद की किल्लत देखते हुऐ प्रशासन एक एकड़ पर एक डीएपी देने का नियम बनाया हैं। राजस्व लेखपाल किसान की जमीन की पुष्टि करेगा। पुष्टि के आधार पर खाद दुकानदार किसान को टोकन बांटेगा फिर डीएपी एनपीके खाद किसान को मिल पायेगी।

रामापाल कहते हैं," पूरे दिन लेखपाल का चक्कर लगाया जमीन की नकल खतौनी और आधार दिया, तब जाकर उसने जमीन दर्शायी जिस पर दस बोरियां मिलनी थी। लेकिन दो ही बोरी मिल पाईं। बाकी बोरी खाद आने पर मिलने की बात खाद दुकानदार कह रहा हैं।

खरीफ में बोई जाने वाली उड़द की फसल पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी बर्बाद हो गई। वहीं अधिकतर क्षेत्रों में देर से हुई बारिस से खेती भी नहीं हो पाई। बुंदेलखंड के किसानों पर पहले से आर्थिक संकट की मार झेल रहे हैं। यूपी के पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में पहले से खाद के लिए हंगामा जारी है।

ललितपुर के महरौनी में किसान ने शनिवार को सड़क पर जाम लगा दिया।

गेहूं, चना, मसूर, मटर की होनी है बुवाई

रबी सीजन की फसलों (गेहूं, चना,मसूर आदि) फसल के लिए किसानों के खेत तैयार थे, पानी देने के लिए किसान व्यवस्थाओं में लगा था कि 18 अक्टूबर को हुई तेज बारिश से किसानों के चहरे खिल उठे। किसानों को लगा कि समय पर बोनी हो जायेगी। लेकिन खाद कि किल्लत ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है। मायूस किसान गुस्से में हैं।

मड़ावरा तहसील के गौराकलाँ गाँव के किसान राजू विश्वकर्मा (45 वर्ष) कहते हैं कि,"समय पर किसानों को डीएपी खाद नहीं मिली तो खेत सूख जायेगें। किसान बर्बाद हो जायेगा। डीजल के भाव आसमान छू रहे हैं कोई भी किसान यह मौका खोना नहीं चाहता सभी को मटर, चना, मसूर, गेहूं की खेती हर हाल में करनी हैं।"

खाद के चक्कर में दो दिन और दो राते भटकने के बाद गोकल अहिरबार (62वर्ष) को डीएपी की एक बोरी मिल पाई गोकल को चार बोरियों की और जरूरत हैं। गोकल अहिरवार तहसील महरौनी के अमौरा गाँव के रहने वाले हैं वो कहते हैं,"खाद की इतनी किल्लत आज तक नहीं देखी। इस बार तो एक-एक डीएपी बोरी की मारा मार मची हैं दो दिन डेरा डालने के बाद एक डीएपी बोरी मिल पाई हैं।"

गोकल कहते हैं,"किसान को इस वक्त खेत में होना चाहिए लेकिन वो खाद के लिए बाजार में भटक रहा है। हमारे पास ले लेदे खेती ही तो हैं, वह समय पर नहीं हुई तो किसान बर्बाद हो जायेगा।"

शुक्रवार के बाद शनिवार को भी महरौनी कस्बे में किसानों ने सड़क पर जाम लगाया। इस दौरान किसानों को समझाने पहुंचे जिलाधिकारी अन्नावि दिनेश कुमार ने कहा, "बारिश की वजह से सभी किसानों को एक साथ खाद की जरूरत आन पड़ी है। किसान धैर्य रखें, प्रशासन का सहयोग करें हर हाल में सभी किसानों को खाद दी जायेगी।"

खाद समस्या ने निपटने के लिए जिला प्रशासन ने टोकन व्यवस्था शुरु की है।


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