‘इज्जत’ के लिए दुल्हन ने तीन दिन नहीं खाया ससुराल में खाना, दे दिया अल्टीमेटम

‘इज्जत’ के लिए दुल्हन ने तीन दिन नहीं खाया ससुराल में खाना, दे दिया अल्टीमेटमशौचालय नहीं था तो बहू ने ससुराल जाने से किया मना।

कन्नौज। सिर्फ कक्षा आठ पास 20 साल की सुनीता शर्मा से उन महिलाओं को नसीहत लेनी चाहिए जो अब भी खुले में शौच जाती हैं। भले ही सुनीता कम पढ़ी-लिखी हैं लेकिन सफाई रखने और घर की इज्जत के खातिर उनका तजुर्बा बेहतर है। जिसकी वजह से शादी के चार दिन बाद ही ससुराल छोड़ दिया और 13 दिन बाद भी वह मायके से नहीं आईं हैं, कारण ससुराल में शौचालय नहीं है और खुले में जाना पसंद नहीं है।

यह मामला है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 160 किमी दूर जिला कन्नौज के सदर ब्लाॅक क्षेत्र के टिडियापुर ग्राम पंचायत के मजरा खुरदइया का। गाँव निवासी 55 वर्शीय दिनेश शर्मा बताते हैं, ‘‘मैंने अपने 22 वर्षीय बेटे सुमित शर्मा की शादी कानपुर जिले के नौबस्ता निवासी सुनीता शर्मा से 18 फरवरी को की थी। शादी के अगले दिन बहू को गाँव ले आए। 20 फरवरी को सुबह जब उसने शौचालय के लिए पूछा तो हम लोगों ने खेत में जाने की बात कही, तो बहू ने जाने से मना कर दिया।’’

दिनेश ने आगे बताया, ‘‘इस कारण बहू ने दो-तीन दिन खाना नहीं खाया, बाहर शौच भी नहीं गई। बाद में उसकी तबियत बिगड़ गई। जिसकी वजह से बहू के मायके में समधी को फोन किया। 23 फरवरी को वह लोग बहू को ले गए। अब बहू और उसके घरवाले कहते हैं कि जब तक शौचालय नहीं बनेगा, हम नहीं आएंगे।’’

इनके यहां शौचालय नहीं हैं। छह हजार रूपए की चैक रखी है। काम पूरा हो जाएगा तो छह हजार की फिर आ जाएगी। हमने फोन भी किया था। गाँव में एक गड्ढे के शौचालय बने हैं। कार्रवाई तो हम लोगों पर होगी। जांच करा ली जाए एक गड्ढे की वजह से पैसा नहीं डाल रहे हैं।
मानसिंह पाल, प्रतिनिधि, राममूर्ति प्रधान, टिडियापुर, कन्नौज

उन्होंने आगे बताया कि इसी मंगलवार को तहसील दिवस में शिकायत की है। वहां कहा गया है कि तुम्हारी समस्या का समाधान होगा, जांच को अभी तक कोई नहीं आया है। दो बीघा खेती है। खेती-किसानी और मजदूरी करता हूं। पहले प्रधान खाता नंबर ले गए थे, मेरी घरवाली का भी ले गए लेकिन पैसा नहीं आया।

सुमित की 50 साल की मां सुनीता देवी शर्मा बताती हैं, ‘‘बहू मइके गई है। कहत है जई लक नाई अइएं जई लक शौचालय नाहीं बनवइए। अप्लीकेशन दई है। अबे तक कोई कार्रवाई नाहीं भई है।’’

18 फरवरी को मेरी शादी हुई 19 को मैं अपनी ससुराल गई। ससुराल में शाम को मेरी सास और रिश्तेदारों ने कहा बहू लंबा घूंघट करो और चलिए शौचालय। मुझे शौच के लिए बाहर नहीं जाना था इस लिए मैने जाने से मना कर दिया। फिर मैने अपने पापा से कहा कि जब तक शौचालय नहीं बन जाएगा नहीं जाऊंगी मेरे पापा ने भी कहा है कि जब तब शौचालय नहीं बन जाएगा नहीं भेजूंगा।
सुनीता शर्मा (20 वर्ष), नवविवाहिता

जनपद कानपुर नगर के नौबस्ता के मोहल्ला बकतौरीपुर्वा निवासी हीरा चंद्र शर्मा ने ‘गाँव कनेक्शन’ संवाददाता को मोबाइल पर बताया, ‘‘मैंने अपनी बिट्टी सुनीता की शादी 18 फरवरी को की। 19 को विदा कर दिया। वहां सुलभ शौचालय की सुविधा नहीं थी। यहां पर रही कभी बाहर नहीं गई, उसे आदत नहीं थी, इसलिए खाना-पीना छोड़ दिया। जिससे बिट्टी की तबियत बिगड़ गई।’’

हीराचंद्र आगे बताते हैं कि मेरे पास फोन आया तो हम बिट्टी को ले आए। इलाज कराया तो सुधार हुआ, हालांकि दवा अभी चल रही है। वहां गाँव में विकास हो रहा है पर शौचालय नहीं हैं। सड़क किनारे तो समस्या जल्दी दूर हुईवो चहिए।’’

सीडीओ अवधेष बहादुर सिंह बताते हैं, ‘‘प्रकरण तहसील दिवस में उसके ससुर द्वारा लाया गया था। शौचालय की यदि आवश्यकता होगी तो उसका सत्यापन कराने के लिए बीडीओ को निर्देशित किया गया है और अगर पात्र होगा तो धनराशि देकर शौचालय बनवाया जाएगा। यदि पात्र नहीं होगा तो समझा-बुझाकर प्रेरित कर स्वयं के संसाधन से शौचालय बनवाने को कहेंगे।’’ सीडीओ आगे बताते हैं कि यह अच्छी चीज है उस महिला में जागरूकता आई है और प्रतिबद्धता है। शौचालय निर्माण और उपयोग के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ी है।’’

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