हंसी-ठहाकों के बीच कड़वी सच्चाई दिखाने वाले ‘गम्भीरा’ लोक नृत्य की कहानी
Gaon Connection | Gaon Connection Network | Apr 20, 2026, 18:56 IST
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले की सांस्कृतिक पहचान बना ‘गम्भीरा’ लोक नृत्य सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि समाज का आईना है। यह पारंपरिक लोक नाटक वर्षों से लोगों का मनोरंजन करने के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाने का एक सशक्त माध्यम रहा है। गम्भीरा की खासियत इसका अनोखा अंदाज है, जिसमें कलाकार संवाद, गीत और अभिनय के जरिए हास्य और व्यंग का इस्तेमाल करते हुए समाज की समस्याओं, सरकारी नीतियों और आम लोगों के जीवन से जुड़े मुद्दों को सामने लाते हैं। अक्सर इसमें “नाना-नाती” (दादा-पोते) के किरदारों के माध्यम से बातचीत दिखाई जाती है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है। आज के दौर में भी यह लोक कला अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है, हालांकि आधुनिकता और बदलती जीवनशैली के कारण इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ‘गाँव कनेक्शन’ की टीम इस परंपरा को करीब से समझने के लिए मालदा पहुंची, जहां उन्होंने गम्भीरा कलाकारों से बातचीत की। कलाकारों ने इस कला के इतिहास, इसके सामाजिक महत्व और वर्तमान चुनौतियों के बारे में खुलकर अपने विचार साझा किए। यह रिपोर्ट न सिर्फ एक लोक कला की कहानी है, बल्कि उस संस्कृति की भी झलक है जो आज भी गांवों में जिंदा है और समाज को आईना दिखाने का काम कर रही है।