By डॉ दीपक आचार्य
बाजार में फलों का राजा आम हर तरफ सजा हुआ है, अलग-अलग प्रजातियों के आम बाजार में खूब बिकते नजर आ रहें हैं। हिन्दुस्तान का कोई घर ऐसा नहीं है जो गर्मियों में आम का स्वाद ना लेता हो। चाहे हाफुस आम हो या कलमी, लंगड़ा हो या केसर या दशहरी, आम सबकी पसंद है। रस भरे आमों के स्वाद भोजन का जायका दोगुना कर देता है।
बाजार में फलों का राजा आम हर तरफ सजा हुआ है, अलग-अलग प्रजातियों के आम बाजार में खूब बिकते नजर आ रहें हैं। हिन्दुस्तान का कोई घर ऐसा नहीं है जो गर्मियों में आम का स्वाद ना लेता हो। चाहे हाफुस आम हो या कलमी, लंगड़ा हो या केसर या दशहरी, आम सबकी पसंद है। रस भरे आमों के स्वाद भोजन का जायका दोगुना कर देता है।
By डॉ दीपक आचार्य
जब जंगलों में रहने वाले लोग बाहरी दुनिया के लोगों से मिलते हैं तो बाहरी चमक-दमक देखकर वनवासियों के युवा बाहरी दुनिया को और जानना, समझना चाहते हैं। उन्हें अपनी संस्कृति, अपने लोगों की तुलना में बाहरी दुनिया ज्यादा मोहक लगती है और यहीं से पलायन की शुरु होती है। अपने गाँव के बुजुर्गों और उनके बताए ज्ञान को एक कोने में रखकर युवा घर से दूर होने लगते हैं और यहीं से पारंपरिक ज्ञान के पतन की शुरुआत भी होती है।
जब जंगलों में रहने वाले लोग बाहरी दुनिया के लोगों से मिलते हैं तो बाहरी चमक-दमक देखकर वनवासियों के युवा बाहरी दुनिया को और जानना, समझना चाहते हैं। उन्हें अपनी संस्कृति, अपने लोगों की तुलना में बाहरी दुनिया ज्यादा मोहक लगती है और यहीं से पलायन की शुरु होती है। अपने गाँव के बुजुर्गों और उनके बताए ज्ञान को एक कोने में रखकर युवा घर से दूर होने लगते हैं और यहीं से पारंपरिक ज्ञान के पतन की शुरुआत भी होती है।
By डॉ दीपक आचार्य
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