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गाँव, किसान और पोस्ट ऑफिस
गाँव, किसान और पोस्ट ऑफिस

By Arvind Kumar Singh

आखिर किसान, मजदूरों और भारतीय डाक के साथ ऐसा क्या रिश्ता है? जिसने इतनी बड़ी तादाद में डाकघरों को जिंदा रखा है। बेशक बहुत गहरा रिश्ता है, विश्वास का रिश्ता।

आखिर किसान, मजदूरों और भारतीय डाक के साथ ऐसा क्या रिश्ता है? जिसने इतनी बड़ी तादाद में डाकघरों को जिंदा रखा है। बेशक बहुत गहरा रिश्ता है, विश्वास का रिश्ता।

महेंद्र सिंह टिकैत ने अपने मंच पर राजनेताओं को क्यों नहीं चढ़ने दिया
महेंद्र सिंह टिकैत ने अपने मंच पर राजनेताओं को क्यों नहीं चढ़ने दिया

By Arvind Kumar Singh

महेंद्र सिंह टिकैत की ख़ासियत थी कि वो सर्वसुलभ थे। जब वे अपनी लोकप्रियता के चरम पर थे तब भी अपने हाथों से खेती किया करते थे और ठेठ गाँव की भाषा में हर व्यक्ति से संवाद करते थे। उन्हें ये नहीं पसंद था कि उनके संगठन को राजनीतिक फायदे के लिए कोई इस्तेमाल करें।

महेंद्र सिंह टिकैत की ख़ासियत थी कि वो सर्वसुलभ थे। जब वे अपनी लोकप्रियता के चरम पर थे तब भी अपने हाथों से खेती किया करते थे और ठेठ गाँव की भाषा में हर व्यक्ति से संवाद करते थे। उन्हें ये नहीं पसंद था कि उनके संगठन को राजनीतिक फायदे के लिए कोई इस्तेमाल करें।

महेंद्र सिंह टिकैत ने अपने मंच पर राजनेताओं को क्यों नहीं चढ़ने दिया
महेंद्र सिंह टिकैत ने अपने मंच पर राजनेताओं को क्यों नहीं चढ़ने दिया

By Arvind Kumar Singh

महेंद्र सिंह टिकैत की ख़ासियत थी कि वो सर्वसुलभ थे। जब वे अपनी लोकप्रियता के चरम पर थे तब भी अपने हाथों से खेती किया करते थे और ठेठ गाँव की भाषा में हर व्यक्ति से संवाद करते थे। उन्हें ये नहीं पसंद था कि उनके संगठन को राजनीतिक फायदे के लिए कोई इस्तेमाल करें।

महेंद्र सिंह टिकैत की ख़ासियत थी कि वो सर्वसुलभ थे। जब वे अपनी लोकप्रियता के चरम पर थे तब भी अपने हाथों से खेती किया करते थे और ठेठ गाँव की भाषा में हर व्यक्ति से संवाद करते थे। उन्हें ये नहीं पसंद था कि उनके संगठन को राजनीतिक फायदे के लिए कोई इस्तेमाल करें।

किसान आंदोलन - पंजाब में किसानों की समस्या का हल क्या है ?
किसान आंदोलन - पंजाब में किसानों की समस्या का हल क्या है ?

By Arvind Kumar Singh

पंजाब के किसान राज्य सरकार के जरिए काफी समय से केंद्र सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं कि उन्हें उनकी फसल का सही दाम मिले और स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू की जाएँ।

पंजाब के किसान राज्य सरकार के जरिए काफी समय से केंद्र सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं कि उन्हें उनकी फसल का सही दाम मिले और स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू की जाएँ।

किसान आंदोलन: पंजाब में खेतों से क्यों उग रही है असंतोष की फसल
किसान आंदोलन: पंजाब में खेतों से क्यों उग रही है असंतोष की फसल

By Arvind Kumar Singh

पिछले साल सालों से चल रहे किसान आंदोलन में पंजाब के किसानों की अहम भूमिका रही है; ऐसे में लोगों के मन में सवाल आता है कि देश के इतने राज्यों में पंजाब के किसान ही क्यों आंदोलन कर रहे हैं।

पिछले साल सालों से चल रहे किसान आंदोलन में पंजाब के किसानों की अहम भूमिका रही है; ऐसे में लोगों के मन में सवाल आता है कि देश के इतने राज्यों में पंजाब के किसान ही क्यों आंदोलन कर रहे हैं।

कृषि क्षेत्र को और सहारे की दरकार
कृषि क्षेत्र को और सहारे की दरकार

By Arvind Kumar Singh

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में वे सारी बातें दोहराई जो राष्ट्रपति के अभिभाषण का हिस्सा थी। उन्होंने 4 करोड़ किसानों को पीएम फसल बीमा योजना का लाभ मिलने और पीएम किसान योजना के 11.8 करोड़ लाभार्थी किसानों का जिक्र ख़ास तौर पर किया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में वे सारी बातें दोहराई जो राष्ट्रपति के अभिभाषण का हिस्सा थी। उन्होंने 4 करोड़ किसानों को पीएम फसल बीमा योजना का लाभ मिलने और पीएम किसान योजना के 11.8 करोड़ लाभार्थी किसानों का जिक्र ख़ास तौर पर किया।

मोटे अनाजों की खरीद के लिए ठोस व्यवस्था बने
मोटे अनाजों की खरीद के लिए ठोस व्यवस्था बने

By Arvind Kumar Singh

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बजट सत्र के अपने अभिभाषण में खेती-किसानी सहित तमाम क्षेत्रों की उपलब्धियों का ज़िक्र किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बजट सत्र के अपने अभिभाषण में खेती-किसानी सहित तमाम क्षेत्रों की उपलब्धियों का ज़िक्र किया।

एमएसपी में 'शानदार बढ़ोतरी' के बावजूद नाखुश क्यों हैं किसान
एमएसपी में 'शानदार बढ़ोतरी' के बावजूद नाखुश क्यों हैं किसान

By Arvind Kumar Singh

वास्तविकता यह है कि कोरोना काल में सबसे मददगार रहे किसानों के लिए ठोस रणनीति नहीं बनाने से उनकी खेती की लागत बढ़ी है जबकि दाम नहीं मिल रहा। बीते एक साल में अकेले पेट्रोल 33 फीसदी तो डीजल का दाम 23 फीसदी बढ़ गया है।

वास्तविकता यह है कि कोरोना काल में सबसे मददगार रहे किसानों के लिए ठोस रणनीति नहीं बनाने से उनकी खेती की लागत बढ़ी है जबकि दाम नहीं मिल रहा। बीते एक साल में अकेले पेट्रोल 33 फीसदी तो डीजल का दाम 23 फीसदी बढ़ गया है।

चौधरी चरण सिंह जिन्होंने माना था कि कृषि क्षेत्र से जुड़ी नौकरियों को ग्रामीण बच्चों को ही देना चाहिए
चौधरी चरण सिंह जिन्होंने माना था कि कृषि क्षेत्र से जुड़ी नौकरियों को ग्रामीण बच्चों को ही देना चाहिए

By Arvind Kumar Singh

चौधरी चरण सिंह ने उत्तर भारत में किसान जागरण किया और किसानों को उनको अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना सिखाया। किसानों के चंदे से ही चौधरी साहब की राजनीति चलती थी। बैल से खेती करने वाले किसान के लिए चंदे की दर एक रुपया और ट्रैक्टर वाले किसान से 11 रुपए थी। बड़े उद्योगपतियों से उन्होंने धन नहीं लिया और दिशानिर्देश बना दिया था कि अगर उनके किसी सांसद-विधायक ने पूंजीपतियों से चंदा लिया, यह बात साबित होगी तो उसको पार्टी छोड़नी पड़ेगी।

चौधरी चरण सिंह ने उत्तर भारत में किसान जागरण किया और किसानों को उनको अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना सिखाया। किसानों के चंदे से ही चौधरी साहब की राजनीति चलती थी। बैल से खेती करने वाले किसान के लिए चंदे की दर एक रुपया और ट्रैक्टर वाले किसान से 11 रुपए थी। बड़े उद्योगपतियों से उन्होंने धन नहीं लिया और दिशानिर्देश बना दिया था कि अगर उनके किसी सांसद-विधायक ने पूंजीपतियों से चंदा लिया, यह बात साबित होगी तो उसको पार्टी छोड़नी पड़ेगी।

किसान आंदोलन के 6 महीने पार्ट-2 : सुप्रीम कोर्ट की कमेटी बनी, संसद के 2 सत्र बीते, चुनावों में दिखा असर
किसान आंदोलन के 6 महीने पार्ट-2 : सुप्रीम कोर्ट की कमेटी बनी, संसद के 2 सत्र बीते, चुनावों में दिखा असर

By Arvind Kumar Singh

किसान आंदोलन के 6 महीने पूरे होने पर देश वरिष्ठ पत्रकार, ग्रामीण और संसदीय मामलों के जानकार अरविंद कुमार सिंह का लेख... 2 भाग के लेख का ये दूसरा भाग है

किसान आंदोलन के 6 महीने पूरे होने पर देश वरिष्ठ पत्रकार, ग्रामीण और संसदीय मामलों के जानकार अरविंद कुमार सिंह का लेख... 2 भाग के लेख का ये दूसरा भाग है

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