Sunil Kumar Gupta

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Sunil Kumar Gupta

    विश्व स्तनपान सप्ताह: ब्रेस्ट मिल्क एक नहीं कई वजहों से है फॉर्मूला मिल्क से बेहतर
    विश्व स्तनपान सप्ताह: ब्रेस्ट मिल्क एक नहीं कई वजहों से है फॉर्मूला मिल्क से बेहतर

    By Sunil Kumar Gupta

    पूरे देश में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा, पिछले कुछ साल में संस्थागत प्रसव बढ़े, लेकिन स्तनपान की दर में बढ़ोतरी नहीं हुई। इसमें सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक मान्यताएँ, मिथक, परंपराएँ, रुढ़ियाँ और अशिक्षा हैं।

    पूरे देश में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा, पिछले कुछ साल में संस्थागत प्रसव बढ़े, लेकिन स्तनपान की दर में बढ़ोतरी नहीं हुई। इसमें सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक मान्यताएँ, मिथक, परंपराएँ, रुढ़ियाँ और अशिक्षा हैं।

    मध्य प्रदेश: विवेकानंद के सपनों को साकार करने नई सोच की मशाल थामे चल पड़ी है युवाओं की ये टोली
    मध्य प्रदेश: विवेकानंद के सपनों को साकार करने नई सोच की मशाल थामे चल पड़ी है युवाओं की ये टोली

    By Sunil Kumar Gupta

    युवाओं की इस टोली में कोई इंजीनियर है तो कोई अंतर्राष्ट्रीय संस्था में शोध कर रहा है। कोई शिक्षाविद् है तो कोई किसान नेता। ये सभी मिलकर ग्रामीण बच्चों में शिक्षा के नए तौर-तरीकों से संस्कार भरने, संविधान को समझने, समझाने का काम कर रहे हैं।

    युवाओं की इस टोली में कोई इंजीनियर है तो कोई अंतर्राष्ट्रीय संस्था में शोध कर रहा है। कोई शिक्षाविद् है तो कोई किसान नेता। ये सभी मिलकर ग्रामीण बच्चों में शिक्षा के नए तौर-तरीकों से संस्कार भरने, संविधान को समझने, समझाने का काम कर रहे हैं।

    'यह अंधायुग अवतरित हुआ, जिसमें स्थितियां, मनोवृतियां, आत्माएं, सब विकृत हैं'
    'यह अंधायुग अवतरित हुआ, जिसमें स्थितियां, मनोवृतियां, आत्माएं, सब विकृत हैं'

    By Sunil Kumar Gupta

    धर्मवीर भारती अगर आज जीवित होते तो शायद नई कृषि नीतियों के खिलाफ, उन्हें वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली की सरहदों पर कड़कड़ाती ठंड के बीच 30 दिनों से अनवरत प्रदर्शन कर रहे, शहीद हो रहे किसानों के अब तक के सबसे बड़े और अनुशासित आंदोलन को देखकर जेपी आंदोलन के दौरान लिखी कविता जैसा ही कुछ जरूर लिखते।

    धर्मवीर भारती अगर आज जीवित होते तो शायद नई कृषि नीतियों के खिलाफ, उन्हें वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली की सरहदों पर कड़कड़ाती ठंड के बीच 30 दिनों से अनवरत प्रदर्शन कर रहे, शहीद हो रहे किसानों के अब तक के सबसे बड़े और अनुशासित आंदोलन को देखकर जेपी आंदोलन के दौरान लिखी कविता जैसा ही कुछ जरूर लिखते।