मात्र 225 रूपए में 40 हजार तक की गाय-भैंस का करा सकते हैं बीमा, जानिए पूरी प्रक्रिया

Diti BajpaiDiti Bajpai   23 Oct 2018 6:21 AM GMT

मात्र 225 रूपए में 40 हजार तक की गाय-भैंस का करा सकते हैं बीमा, जानिए पूरी प्रक्रिया

लखनऊ। पशुपालक को सबसे ज्यादा नुकसान तब होता है जब उसके पशु को कोई गंभीर बीमारी या उसके साथ आकस्मिक घटना हो जाती है और अचानक उसकी मौत हो जाती है। अगर पशुपालक ने अपने पशुओं का बीमा कराया है तो वह आर्थिक नुकसान से बच सकता है।

"जिस तरह लोग अपनी मोटर साईकिल और कार का बीमा कराकर अपने वाहन की सेफ्टी करते है। ठीक वैसे ही पशुओं का बीमा कराकर पशुपालक आर्थिक नुकसान से बच सकते है। जब पशुपालक अपने पशु को खरीद कर लाता है तभी उसका बीमा करा लेना चाहिए।" उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ अरविंद कुमार सिंह ने बताया।

भारत सरकार और राज्य सरकार के सहयोग उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद् के माध्यम से पूरे प्रदेश में पशुधन बीमा योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत कोई भी पशुपालक अपने पशुओं का बीमा करा सकते है। पशुधन बीमा योजना की जानकारी देते हुए डॉ सिंह बताते हैं, "पशुधन बीमा योजना के तहत अगर आपके पास चालीस हजार रूपए तक की गाय या भैंस है तो उसका एक साल का बीमा कराने के लिए सामान्य वर्ग को केवल 225 रूपए देने होंगे और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को केवल 90 रूपए देने होंगे।"


इस पशुधन बीमा योजना में 50 फीसदी प्रीमियम केंद्र सरकार, 25 फीसदी राज्य सरकार और बाकी का 25 फीसदी लाभार्थी को देना होता है। यानी बहुत कम हिस्सा पशुपालकों को देना होता है और जोखिम से बच सकता है। इस योजना के तहत तीन जिलों(चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र) में भारत सरकार ने अलग व्यवस्था की है। इन जिलों में अगर कोई सामान्य पशुपालक अपने पशुओं का बीमा कराता है तो उसको 135 रूपए देने होंगे और अगर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के है तो कुछ भी नहीं देना है।

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पशुधन बीमा योजना मे पशुओं का एक साल और तीन साल का तक बीमा कराया जाता है। अगर कोई पशुपालक तीन साल तक का पशुधन बीमा कराना चाहता है तो 40 हजार तक की गाय-भैंस के लिए सामान्य वर्ग के पशुपालक को 614 रूपए और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के पशुपालकों को 245 रूपए देने है। वहीं चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र के पशुपालकों को अगर अपने पशुओं का तीन साल तक का बीमा कराना है तो सामान्य वर्ग को 268 रूपए देने है और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग को कुछ नहीं देना है।

"जब पशु का बीमा का होता है उसको टैग लगता है ताकि उसकी पहचान हो सके। और अगर पशु की मौत हो जाती है वो टैग धनराशि दिलाने में भी मदद करता है। एक परिवार कम से कम से पांच बड़े पशुओं का बीमा करा सकते है। और छोटे पशुओं का एक यूनिट (10 बकरी या 10 भेड़) का बीमा करा सकते है।"बीमा कराने की प्रक्रिया के बारे में डॉ अरविंद सिंह ने बताया, अगर कोई पशुपालक बीमा कराना चाहता है तो वो अपने नजदीकी पशुचिकित्सालय मे संपर्क कर सकता है। क्योंकि डॉक्टर के निरीक्षण के बाद ही पशुओं का बीमा संभव है। इसके साथ ही मुख्य पशुचिकित्साधिकारी से भी संपर्क कर सकता है।

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इन बातों का जरूर रखें ध्यान-

  • बीमा कराने के लिए पशु का स्वस्थ्य होना बहुत जरूरी है। अगर उसको पहले से कोई गंभीर बीमारी है तो बीमा नहीं होगा।
  • पशु बीमा कराने के बाद अगर किसी कारण वंश पशु की मृत्यु हो जाती है तो मुआवजे के लिए जिस कंपनी से इंशोरेस कराया है पहले उसको संपर्क करें या पशुचिकित्सक को भी संपर्क कर सकते है।
  • पशु की अगर मौत हो जाती है तो मृत्यु प्रमाण पत्र पशुचिकित्सक देता है।
  • पशु के मौत के 24 घंटे के अंदर पशुचिकित्सक या कंपनी को सूचित करे।
  • पशु के बीमा होने के बाद उसके कान में लगा टैग न हटाए।
  • क्लेम लेने के लिए कंपनी क्लेम फार्म देती है उसको भरकर मृत्यु प्रमाण पत्र और पोस्टमार्टम रिपोर्ट(शव परीक्षा प्रतिवेदन ) लगाकर धनराशि पशुपालक ले सकते है।

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