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इंजीनियर से किसान तक, एग्रोफॉरेस्ट्री के ज़रिए मिट्टी बचाने निकले सिद्धेश सकोरे
इंजीनियर से किसान तक, एग्रोफॉरेस्ट्री के ज़रिए मिट्टी बचाने निकले सिद्धेश सकोरे

By Gaon Connection

खेती का भविष्य क्या होना चाहिए? खेती से आमदनी कैसे बढ़े? और क्या ऐसा कोई रास्ता है जहाँ किसान को मिट्टी भी बचानी न पड़े और पेट भी पालना पड़े, इन सवालों के जवाब अक्सर फाइलों, सेमिनारों और रिपोर्टों में ढूंढे जाते हैं। लेकिन महाराष्ट्र के एक गाँव में ये जवाब खेतों में उग रहे हैं। वहाँ एक युवा किसान न सिर्फ अपने लिए, बल्कि औरों के लिए भी इस तलाश में लगा है कि खेती को फिर से सम्मान, स्थिरता और मुनाफ़ा कैसे लौटाया जाए। इस यात्रा का नाम है एग्रोफॉरेस्ट्री, और इस यात्रा के केंद्र में हैं सिद्धेश सकोरे।

खेती का भविष्य क्या होना चाहिए? खेती से आमदनी कैसे बढ़े? और क्या ऐसा कोई रास्ता है जहाँ किसान को मिट्टी भी बचानी न पड़े और पेट भी पालना पड़े, इन सवालों के जवाब अक्सर फाइलों, सेमिनारों और रिपोर्टों में ढूंढे जाते हैं। लेकिन महाराष्ट्र के एक गाँव में ये जवाब खेतों में उग रहे हैं। वहाँ एक युवा किसान न सिर्फ अपने लिए, बल्कि औरों के लिए भी इस तलाश में लगा है कि खेती को फिर से सम्मान, स्थिरता और मुनाफ़ा कैसे लौटाया जाए। इस यात्रा का नाम है एग्रोफॉरेस्ट्री, और इस यात्रा के केंद्र में हैं सिद्धेश सकोरे।

यक्षगान को बचाने की लड़ाई
यक्षगान को बचाने की लड़ाई

एक समय था, जब कर्नाटक के गाँवों में रात ढलते ही हवा बदल जाती थी। धान के खेतों के बीच, खुले आसमान के नीचे, मृदंग की थाप, मंजीरे की झंकार और घुंघरुओं की मधुर आवाज़ गूँज उठती थी। वही आवाज़, जो लोगों को खेतों से, घरों से, चौपालों से खींचकर एक जगह ले आती थी, यक्षगान।

एक समय था, जब कर्नाटक के गाँवों में रात ढलते ही हवा बदल जाती थी। धान के खेतों के बीच, खुले आसमान के नीचे, मृदंग की थाप, मंजीरे की झंकार और घुंघरुओं की मधुर आवाज़ गूँज उठती थी। वही आवाज़, जो लोगों को खेतों से, घरों से, चौपालों से खींचकर एक जगह ले आती थी, यक्षगान।

पंजाब का बेबे-बापू स्कूल: जब बुज़ुर्ग पहली बार क्लासरूम पहुँचे
पंजाब का बेबे-बापू स्कूल: जब बुज़ुर्ग पहली बार क्लासरूम पहुँचे

By Gaon Connection

बचपन में पढ़ाई का मौका न मिलने वाले बुज़ुर्ग अब पंजाब के भटिंडा ज़िले के बेबे-बापू स्कूल में पहली बार क्लासरूम का अनुभव कर रहे हैं। जो लोग पूरी ज़िंदगी अपने बच्चों को पढ़ाने में लगे रहे, वे आज खुद अक्षरों से दोस्ती कर रहे हैं, अंगूठे से दस्तख़त तक का यह सफ़र आत्मसम्मान और उम्मीद की कहानी है।

बचपन में पढ़ाई का मौका न मिलने वाले बुज़ुर्ग अब पंजाब के भटिंडा ज़िले के बेबे-बापू स्कूल में पहली बार क्लासरूम का अनुभव कर रहे हैं। जो लोग पूरी ज़िंदगी अपने बच्चों को पढ़ाने में लगे रहे, वे आज खुद अक्षरों से दोस्ती कर रहे हैं, अंगूठे से दस्तख़त तक का यह सफ़र आत्मसम्मान और उम्मीद की कहानी है।

बंद कमरे में नहीं, बाग में भी उगा सकते हैं मशरूम, जानिए उगाने की पूरी विधि
बंद कमरे में नहीं, बाग में भी उगा सकते हैं मशरूम, जानिए उगाने की पूरी विधि

By Divendra Singh

मशरूम की खेती को अब तक अंधेरे कमरे और रसायनों से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले के किसान राजेंद्र कुमार साहू ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने आम के बाग में, खुले वातावरण में ऑयस्टर और पैडी स्ट्रॉ मशरूम उगाकर न सिर्फ़ रोज़ाना 10,000 रुपये तक की कमाई का रास्ता बनाया, बल्कि पराली जलाने जैसी गंभीर समस्या का भी समाधान पेश किया।

मशरूम की खेती को अब तक अंधेरे कमरे और रसायनों से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले के किसान राजेंद्र कुमार साहू ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने आम के बाग में, खुले वातावरण में ऑयस्टर और पैडी स्ट्रॉ मशरूम उगाकर न सिर्फ़ रोज़ाना 10,000 रुपये तक की कमाई का रास्ता बनाया, बल्कि पराली जलाने जैसी गंभीर समस्या का भी समाधान पेश किया।

आठवीं पास किसान जो अपनी गाड़ियों में पेट्रोल पंप से नहीं, गोशाला से भरते हैं ईंधन
आठवीं पास किसान जो अपनी गाड़ियों में पेट्रोल पंप से नहीं, गोशाला से भरते हैं ईंधन

By Gaon Connection

मध्य प्रदेश के शाजापुर ज़िले के एक छोटे से गाँव में गाड़ियाँ पेट्रोल पंप से नहीं गोशाला से चलती हैं। देवेंद्र सिंह परमार एक साधारण डेयरी किसान ने गोबर से बायोगैस और फिर CNG बनाकर ट्रैक्टर, बाइक और गाड़ियों को चलाना शुरू किया।

मध्य प्रदेश के शाजापुर ज़िले के एक छोटे से गाँव में गाड़ियाँ पेट्रोल पंप से नहीं गोशाला से चलती हैं। देवेंद्र सिंह परमार एक साधारण डेयरी किसान ने गोबर से बायोगैस और फिर CNG बनाकर ट्रैक्टर, बाइक और गाड़ियों को चलाना शुरू किया।

जब स्वाद बचाने निकली एक महिला, मेघालय का Mei-Ramew Café
जब स्वाद बचाने निकली एक महिला, मेघालय का Mei-Ramew Café

By Gaon Connection

शहरों और पैकेज्ड फूड के बढ़ते असर के बीच, मेघालय के रिभोई ज़िले के एक छोटे से गाँव में Plantina Mujai ने अपने समुदाय के पारंपरिक स्वादों को बचाने की ठानी। खेतों से घिरे Mei-Ramew Café में खासी जनजाति का खाना सिर्फ़ परोसा नहीं जाता, बल्कि उसकी कहानी सुनाई जाती है।

शहरों और पैकेज्ड फूड के बढ़ते असर के बीच, मेघालय के रिभोई ज़िले के एक छोटे से गाँव में Plantina Mujai ने अपने समुदाय के पारंपरिक स्वादों को बचाने की ठानी। खेतों से घिरे Mei-Ramew Café में खासी जनजाति का खाना सिर्फ़ परोसा नहीं जाता, बल्कि उसकी कहानी सुनाई जाती है।

डिजिटल दौर में आदिवासी ज्ञान की पाठशाला: जहाँ धनुर्विद्या सीखते हैं बच्चे
डिजिटल दौर में आदिवासी ज्ञान की पाठशाला: जहाँ धनुर्विद्या सीखते हैं बच्चे

By Gaon Connection

डिजिटल दौर में जब बच्चों का बचपन स्क्रीन तक सिमटता जा रहा है, केरल के जंगलों में एक व्यक्ति उन्हें ज़मीन से जोड़ रहा है। के. गोविंदन, कुरुमा जनजाति से आने वाले धनुर्विद्या गुरु, बच्चों को धनुष-बाण शिकार के लिए नहीं, बल्कि संतुलन, धैर्य और प्रकृति से रिश्ते के लिए सिखाते हैं।

डिजिटल दौर में जब बच्चों का बचपन स्क्रीन तक सिमटता जा रहा है, केरल के जंगलों में एक व्यक्ति उन्हें ज़मीन से जोड़ रहा है। के. गोविंदन, कुरुमा जनजाति से आने वाले धनुर्विद्या गुरु, बच्चों को धनुष-बाण शिकार के लिए नहीं, बल्कि संतुलन, धैर्य और प्रकृति से रिश्ते के लिए सिखाते हैं।

जुर्माने से जागरूकता तक: एक ग्राम प्रधान ने अपनी पंचायत में कैसे जीती प्लास्टिक से जंग?
जुर्माने से जागरूकता तक: एक ग्राम प्रधान ने अपनी पंचायत में कैसे जीती प्लास्टिक से जंग?

By Gaon Connection

कभी यह ग्राम पंचायत प्लास्टिक कचरे से जूझ रही थी। नालियाँ भरी थीं, गलियाँ गंदी थीं और बच्चों का भविष्य जोखिम में था। लेकिन ग्राम प्रधान प्रियंका तिवारी ने सिर्फ़ समस्या देखी नहीं, समाधान भी गढ़ा। सख़्त नियम, जुर्माना, प्लास्टिक बैंक, वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट और महिलाओं, बच्चों की भागीदारी, इन सबके दम पर आज यह पंचायत लगभग प्लास्टिक-मुक्त है।

कभी यह ग्राम पंचायत प्लास्टिक कचरे से जूझ रही थी। नालियाँ भरी थीं, गलियाँ गंदी थीं और बच्चों का भविष्य जोखिम में था। लेकिन ग्राम प्रधान प्रियंका तिवारी ने सिर्फ़ समस्या देखी नहीं, समाधान भी गढ़ा। सख़्त नियम, जुर्माना, प्लास्टिक बैंक, वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट और महिलाओं, बच्चों की भागीदारी, इन सबके दम पर आज यह पंचायत लगभग प्लास्टिक-मुक्त है।

साल के आख़िर में वे किसान जिन्होंने खेती का भविष्य गढ़ा
साल के आख़िर में वे किसान जिन्होंने खेती का भविष्य गढ़ा

साल 2025 के अंत में हम आपको मिलवा रहे हैं भारत के उन किसानों से जिन्होंने खेती को परंपरा से आगे ले जाकर नवाचार, संरक्षण और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया। बीज बैंक से लेकर पर्माकल्चर, मछली पालन से लेकर कीवी और कॉफ़ी तक - ये कहानियाँ भविष्य की खेती की दिशा दिखाती हैं।

साल 2025 के अंत में हम आपको मिलवा रहे हैं भारत के उन किसानों से जिन्होंने खेती को परंपरा से आगे ले जाकर नवाचार, संरक्षण और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाया। बीज बैंक से लेकर पर्माकल्चर, मछली पालन से लेकर कीवी और कॉफ़ी तक - ये कहानियाँ भविष्य की खेती की दिशा दिखाती हैं।

कर्नाटक की अनमोल धरोहर: जब गाँव-गाँव गूँजता था यक्षगान
कर्नाटक की अनमोल धरोहर: जब गाँव-गाँव गूँजता था यक्षगान

By Gaon Connection

कभी कर्नाटक के गाँवों की रातें यक्षगान से रोशन होती थीं। मृदंग, मंजीरा और घुंघरुओं की आवाज़ में बसता था लोकजीवन। आज जब यह परंपरा संकट में है, तब कुछ गुरु और कलाकार इसे बचाने में जुटे हैं। यह कहानी है यक्षगान की, एक कला, एक विरासत और एक संघर्ष की।

कभी कर्नाटक के गाँवों की रातें यक्षगान से रोशन होती थीं। मृदंग, मंजीरा और घुंघरुओं की आवाज़ में बसता था लोकजीवन। आज जब यह परंपरा संकट में है, तब कुछ गुरु और कलाकार इसे बचाने में जुटे हैं। यह कहानी है यक्षगान की, एक कला, एक विरासत और एक संघर्ष की।

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