By Gaon Connection
केंद्र सरकार 14 साल की किशोरियों के लिए सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा के लिए एक बड़े टीकाकरण अभियान की तैयारी कर रही है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन निशुल्क दी जाएगी। अनुमान है कि इस पहल से करीब 1.15 करोड़ लड़कियों को फायदा होगा। जानिए पहले टीकाकरण किस राज्य से शुरू हो रहा है और कब ?
केंद्र सरकार 14 साल की किशोरियों के लिए सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा के लिए एक बड़े टीकाकरण अभियान की तैयारी कर रही है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन निशुल्क दी जाएगी। अनुमान है कि इस पहल से करीब 1.15 करोड़ लड़कियों को फायदा होगा। जानिए पहले टीकाकरण किस राज्य से शुरू हो रहा है और कब ?
By Gaon Connection
दुनिया भर में मोटापा एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोटापा सिर्फ शुगर या दिल की बीमारी तक सीमित नहीं है? हाल ही में The Lancet में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन से पता चला है कि मोटापे से पीड़ित लोगों को बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी यानी हर तरह के संक्रमण का खतरा कहीं अधिक होता है। 5 लाख से ज्यादा लोगों पर किए गए इस शोध के अनुसार, अधिक मोटापे वाले व्यक्ति को किसी सामान्य वजन के व्यक्ति की तुलना में संक्रमण से अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु का तीन गुना अधिक खतरा होता है। दुनिया में हर दस में से एक संक्रमण संबंधी मौत की वजह मोटापा हो सकती है।
दुनिया भर में मोटापा एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोटापा सिर्फ शुगर या दिल की बीमारी तक सीमित नहीं है? हाल ही में The Lancet में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन से पता चला है कि मोटापे से पीड़ित लोगों को बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी यानी हर तरह के संक्रमण का खतरा कहीं अधिक होता है। 5 लाख से ज्यादा लोगों पर किए गए इस शोध के अनुसार, अधिक मोटापे वाले व्यक्ति को किसी सामान्य वजन के व्यक्ति की तुलना में संक्रमण से अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु का तीन गुना अधिक खतरा होता है। दुनिया में हर दस में से एक संक्रमण संबंधी मौत की वजह मोटापा हो सकती है।
By Preeti Nahar
इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन पिछले कुछ समय से काफी बढ़ गया है। ऐसे में सही जानकारी न होने के कारण लोग इंटरनेट या सुनी-सुनायी बातों पर भरोसा करके फास्टिंग शुरू कर देते हैं। जिसका फयदा कम और नुकसान अधिक हो सकता है। ऐसे में इंटरमिटेंट फास्टिंग का सही तरीक क्या होना चाहिए और सबसे ज़रूरी कब होनी चाहिए फास्टिंग, इसकी सटीक जानकारी आपको सेहतमंद बना सकती है। इंटरमिटेंट फास्टिंग के सही तरीके के बारे में हैदराबाद के अपोलो अस्पताल के Neurologist, डॉ. सुधीर कुमार ने जो बताया वो जानना ज़रूरी है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन पिछले कुछ समय से काफी बढ़ गया है। ऐसे में सही जानकारी न होने के कारण लोग इंटरनेट या सुनी-सुनायी बातों पर भरोसा करके फास्टिंग शुरू कर देते हैं। जिसका फयदा कम और नुकसान अधिक हो सकता है। ऐसे में इंटरमिटेंट फास्टिंग का सही तरीक क्या होना चाहिए और सबसे ज़रूरी कब होनी चाहिए फास्टिंग, इसकी सटीक जानकारी आपको सेहतमंद बना सकती है। इंटरमिटेंट फास्टिंग के सही तरीके के बारे में हैदराबाद के अपोलो अस्पताल के Neurologist, डॉ. सुधीर कुमार ने जो बताया वो जानना ज़रूरी है।
By Preeti Nahar
अगर आपके आस-पास कोई मानसिक रोगों से जूझ रहा है तो गाँव व जिला स्तर पर इलाज करा सकता है। क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य कोई छुपाने की चीज नहीं है, समय पर इलाज और सही परामर्श बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद करता है। चुनौती यही है कि लोग जागरूक हों, डर छोड़ें और समय पर मदद लें। जानिए आपके गाँव और जिला स्तर पर मानसिक रोगों के इलाज के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अगर आपके आस-पास कोई मानसिक रोगों से जूझ रहा है तो गाँव व जिला स्तर पर इलाज करा सकता है। क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य कोई छुपाने की चीज नहीं है, समय पर इलाज और सही परामर्श बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद करता है। चुनौती यही है कि लोग जागरूक हों, डर छोड़ें और समय पर मदद लें। जानिए आपके गाँव और जिला स्तर पर मानसिक रोगों के इलाज के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
By Preeti Nahar
बच्चों में मोबाइल की लत एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। गाजियाबाद की घटना ने पेरेंट्स को चिंतित कर दिया है। मनोचिकित्सक डॉ. राजीव मेहता के अनुसार, बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए पेरेंट्स को सख्त कदम उठाने होंगे। बच्चों को अन्य गतिविधियों में व्यस्त रखना और खुद रोल मॉडल बनना आवश्यक है।
बच्चों में मोबाइल की लत एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। गाजियाबाद की घटना ने पेरेंट्स को चिंतित कर दिया है। मनोचिकित्सक डॉ. राजीव मेहता के अनुसार, बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के लिए पेरेंट्स को सख्त कदम उठाने होंगे। बच्चों को अन्य गतिविधियों में व्यस्त रखना और खुद रोल मॉडल बनना आवश्यक है।
By Gaon Connection
घरों में इस्तेमाल होने वाली सफेद एलईडी (WLED) रोशनी पर किया गया एक नया भारतीय वैज्ञानिक शोध बताता है कि केवल 30 मिनट की तेज रोशनी भी दिमाग की सतर्कता को बढ़ा सकती है, लेकिन यही प्रभाव आगे चलकर नींद के प्राकृतिक चक्र को बिगाड़ने का कारण बन सकता है। “Impact of Domestic White LED Light on Cognitive Functions and Amelioration of Blue Light Blocking Lens (BBL) on Healthy Adults” नामक यह शोध मणिपाल अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन, कर्नाटक से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। इस अध्ययन में यह समझने की कोशिश की गई कि घरेलू एलईडी रोशनी, दिमाग की कार्यक्षमता और नींद को कैसे प्रभावित करती है।
घरों में इस्तेमाल होने वाली सफेद एलईडी (WLED) रोशनी पर किया गया एक नया भारतीय वैज्ञानिक शोध बताता है कि केवल 30 मिनट की तेज रोशनी भी दिमाग की सतर्कता को बढ़ा सकती है, लेकिन यही प्रभाव आगे चलकर नींद के प्राकृतिक चक्र को बिगाड़ने का कारण बन सकता है। “Impact of Domestic White LED Light on Cognitive Functions and Amelioration of Blue Light Blocking Lens (BBL) on Healthy Adults” नामक यह शोध मणिपाल अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन, कर्नाटक से जुड़े शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। इस अध्ययन में यह समझने की कोशिश की गई कि घरेलू एलईडी रोशनी, दिमाग की कार्यक्षमता और नींद को कैसे प्रभावित करती है।
By Gaon Connection
भारत सरकार ने फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित गाइडलाइन जारी की है। यह पहल मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और एक समान इलाज उपलब्ध कराने के साथ कैंसर देखभाल प्रणाली को मजबूत बनाएगी।
भारत सरकार ने फेफड़ों के कैंसर के इलाज के लिए पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित गाइडलाइन जारी की है। यह पहल मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और एक समान इलाज उपलब्ध कराने के साथ कैंसर देखभाल प्रणाली को मजबूत बनाएगी।
By Gaon Connection
WHO की ताजा रिपोर्ट के बाद निपाह वायरस एक बार फिर चर्चा में है। भारत में सामने आए नए मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। निपाह वायरस कितना खतरनाक है, यह कैसे फैलता है, इसके लक्षण क्या हैं और आम लोग इससे कैसे बच सकते हैं?
WHO की ताजा रिपोर्ट के बाद निपाह वायरस एक बार फिर चर्चा में है। भारत में सामने आए नए मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। निपाह वायरस कितना खतरनाक है, यह कैसे फैलता है, इसके लक्षण क्या हैं और आम लोग इससे कैसे बच सकते हैं?
By Gaon Connection
चिया सीड्स आजकल बहुत लोकप्रिय हो गए हैं। ये छोटे-छोटे बीज सेहत के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये हर किसी के लिए ये सुरक्षित नहीं हैं? कुछ लोगों के लिए ये ख़तरनाक भी हो सकते हैं। डायटीशियन नेहा मोहन सिन्हा कहती हैं, "चिया सीड्स वैसे तो काफ़ी फायदेमंद होते हैं लेकिन कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक भी हो सकते हैं, यहां तक कि जानलेवा भी हो सकते हैं।"
चिया सीड्स आजकल बहुत लोकप्रिय हो गए हैं। ये छोटे-छोटे बीज सेहत के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये हर किसी के लिए ये सुरक्षित नहीं हैं? कुछ लोगों के लिए ये ख़तरनाक भी हो सकते हैं। डायटीशियन नेहा मोहन सिन्हा कहती हैं, "चिया सीड्स वैसे तो काफ़ी फायदेमंद होते हैं लेकिन कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक भी हो सकते हैं, यहां तक कि जानलेवा भी हो सकते हैं।"
By Gaon Connection
निपाह वायरस एक जानलेवा संक्रमण है जो चमगादड़ों, दूषित खाने और इंसान-से-इंसान संपर्क से फैल सकता है। जानिए ये कैसे फैलता है, खतरे के संकेत और इससे कैसे बचा जा सकता है।
निपाह वायरस एक जानलेवा संक्रमण है जो चमगादड़ों, दूषित खाने और इंसान-से-इंसान संपर्क से फैल सकता है। जानिए ये कैसे फैलता है, खतरे के संकेत और इससे कैसे बचा जा सकता है।
By Gaon Connection
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By Preeti Nahar
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