गाँव और विकास: आज़ादी के बाद से अब तक की यात्रा
गाँव और विकास: आज़ादी के बाद से अब तक की यात्रा

By Dr SB Misra

भारत की आज़ादी के बाद से सरकारों ने औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास पिछड़ गया और किसानों की समस्याएं बनी रहीं। समय के साथ हरित क्रांति और विभिन्न योजनाओं से कुछ सुधार हुए। वर्तमान में भी ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित है, लेकिन शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अभी भी बहुत काम बाकी है।

भारत की आज़ादी के बाद से सरकारों ने औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास पिछड़ गया और किसानों की समस्याएं बनी रहीं। समय के साथ हरित क्रांति और विभिन्न योजनाओं से कुछ सुधार हुए। वर्तमान में भी ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित है, लेकिन शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अभी भी बहुत काम बाकी है।

Samvad: सत्ता और विपक्ष साथ मिलकर करें काम, तभी देश का होगा बेहतर विकास
Samvad: सत्ता और विपक्ष साथ मिलकर करें काम, तभी देश का होगा बेहतर विकास

By Dr SB Misra

देश के विकास में सत्ता और विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। संसद का सुचारू रूप से चलाने के लिए संसद का संचालन देशहित में जरूरी है। लेकिन वर्तमान में राजनीतिक कड़वाहट बढ़ी है, जैसे विपक्ष सरकार पर अमेरिका को देश बेचने का आरोप लगाता है, विदेश नीति पर भी विवाद बढ़ रहा है, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हुआ। ऐसे में हमे सोटना होगा कि क्या पक्ष और विपक्ष

देश के विकास में सत्ता और विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। संसद का सुचारू रूप से चलाने के लिए संसद का संचालन देशहित में जरूरी है। लेकिन वर्तमान में राजनीतिक कड़वाहट बढ़ी है, जैसे विपक्ष सरकार पर अमेरिका को देश बेचने का आरोप लगाता है, विदेश नीति पर भी विवाद बढ़ रहा है, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हुआ। ऐसे में हमे सोटना होगा कि क्या पक्ष और विपक्ष

Gaon Se 20Postcard (Part-4) : गाँव के लोगों में भी टेंशन और बीमारी क्यों बढ़ती जा रही है?
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Gaon Se 20Postcard (Part-4) : गाँव के लोगों में भी टेंशन और बीमारी क्यों बढ़ती जा रही है?

By Gaon Connection

गाँव से पोस्टकार्ड के 4th एपिसोड में देखिए किस तरह गाँव के लोग भी आज कल परेशान हैं और टेंशन और बीमारियों का शिकार हो रहे हैं | इन सबके पीछे के क्या कारण हैं उसको लेकर इस लेटेस्ट पॉडकास्ट में बात की गई है | देखिए पूरा वीडियो

गाँव से पोस्टकार्ड के 4th एपिसोड में देखिए किस तरह गाँव के लोग भी आज कल परेशान हैं और टेंशन और बीमारियों का शिकार हो रहे हैं | इन सबके पीछे के क्या कारण हैं उसको लेकर इस लेटेस्ट पॉडकास्ट में बात की गई है | देखिए पूरा वीडियो

हमे भिखारी मानसिकता नहीं, उद्यमशील सोच चाहिए
हमे भिखारी मानसिकता नहीं, उद्यमशील सोच चाहिए

By Dr SB Misra

सरकारें मुफ्त की योजनाओं से लोगों को भिखारी बना रही हैं। इससे देश की उत्पादकता घट रही है और युवा आलसी हो रहे हैं। चीन ने खुद को जगाकर तरक्की की। भारत की पार्टियां वोट के लिए खैरात बांटकर प्रजातंत्र को कमजोर कर रही हैं। रोजगार और स्वावलंबन पर ध्यान देना जरूरी है।

सरकारें मुफ्त की योजनाओं से लोगों को भिखारी बना रही हैं। इससे देश की उत्पादकता घट रही है और युवा आलसी हो रहे हैं। चीन ने खुद को जगाकर तरक्की की। भारत की पार्टियां वोट के लिए खैरात बांटकर प्रजातंत्र को कमजोर कर रही हैं। रोजगार और स्वावलंबन पर ध्यान देना जरूरी है।

भारत में अनावश्यक है सेकुलर - गैर सेकुलर की बहस
भारत में अनावश्यक है सेकुलर - गैर सेकुलर की बहस

By Dr SB Misra

भले ही कबीर जीवन भर हिन्दू और मुसलमानों को फटकारते रहे, लेकिन अंत में दोनों ही उनका अंतिम संस्कार करना चाहते थे। पता नहीं कहाँ तक सही है, जब चादर उठाई गई तो उसके नीचे केवल फूल निकले। उन्हें हिन्दू और मुसलमानों ने आपस में बाँटकर अपने-अपने ढंग से संस्कार किया। वह न हिन्दू थे और न मुसलमान, वह थे बस एक अच्छे इंसान। सेकुलरवाद को बचाने के लिए कबीर को और निकटता से समझना और समझाना होगा।

भले ही कबीर जीवन भर हिन्दू और मुसलमानों को फटकारते रहे, लेकिन अंत में दोनों ही उनका अंतिम संस्कार करना चाहते थे। पता नहीं कहाँ तक सही है, जब चादर उठाई गई तो उसके नीचे केवल फूल निकले। उन्हें हिन्दू और मुसलमानों ने आपस में बाँटकर अपने-अपने ढंग से संस्कार किया। वह न हिन्दू थे और न मुसलमान, वह थे बस एक अच्छे इंसान। सेकुलरवाद को बचाने के लिए कबीर को और निकटता से समझना और समझाना होगा।

क्यों दिशाहीन हो रहे हैं देश के नौजवान?
क्यों दिशाहीन हो रहे हैं देश के नौजवान?

By Dr SB Misra

भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में आज नौजवान उद्दंडता, विद्रोह और अनुशासनहीनता की राह पर दिखाई दे रहे हैं। बेरोज़गारी, दिशाहीन शिक्षा, सामाजिक संस्कारों का अभाव और उचित मार्गदर्शन न मिलना, युवा ऊर्जा को रचनात्मक के बजाय विध्वंसक बना रहा है।

भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में आज नौजवान उद्दंडता, विद्रोह और अनुशासनहीनता की राह पर दिखाई दे रहे हैं। बेरोज़गारी, दिशाहीन शिक्षा, सामाजिक संस्कारों का अभाव और उचित मार्गदर्शन न मिलना, युवा ऊर्जा को रचनात्मक के बजाय विध्वंसक बना रहा है।

नोट बदले, सिस्टम नहीं बदला: काले धन की जड़ें अब भी मज़बूत
नोट बदले, सिस्टम नहीं बदला: काले धन की जड़ें अब भी मज़बूत

By Dr SB Misra

नोटबंदी को काले धन पर निर्णायक प्रहार बताया गया था, लेकिन क्या यह वास्तव में अपने उद्देश्य में सफल रही? यह लेख पड़ताल करता है कि कैसे काला धन केवल नोटों में नहीं, बल्कि ज़मीन, संपत्ति, सोना, राजनीति और विदेशों में छिपा रहा।

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विरोध की राजनीति में संवाद की भाषा: अटल जी की विरासत
विरोध की राजनीति में संवाद की भाषा: अटल जी की विरासत

By Dr SB Misra

अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ़ एक प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि भारतीय राजनीति में संवाद, सहिष्णुता और नैतिक साहस की दुर्लभ मिसाल थे। छात्र जीवन में साम्यवादी संगठन से लेकर संघ, जनसंघ, जनता पार्टी और अंततः भाजपा तक उनका सफ़र विचारधाराओं की जकड़न से ऊपर मानवीय मूल्यों की खोज है।

अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ़ एक प्रधानमंत्री नहीं थे, बल्कि भारतीय राजनीति में संवाद, सहिष्णुता और नैतिक साहस की दुर्लभ मिसाल थे। छात्र जीवन में साम्यवादी संगठन से लेकर संघ, जनसंघ, जनता पार्टी और अंततः भाजपा तक उनका सफ़र विचारधाराओं की जकड़न से ऊपर मानवीय मूल्यों की खोज है।

पानी की आत्मकथा: बादल से धरती और फिर समुद्र तक
पानी की आत्मकथा: बादल से धरती और फिर समुद्र तक

By Dr SB Misra

ग्रामीण भारत की जल-व्यवस्था कभी सामुदायिक तालाबों और कुओं पर टिकी थी। आज वही संरचनाएँ उपेक्षा और अतिक्रमण का शिकार हैं। अगर गाँवों की जल-धरोहर बचाई जाए, तो देश के जल संकट से निपटा जा सकता है।

ग्रामीण भारत की जल-व्यवस्था कभी सामुदायिक तालाबों और कुओं पर टिकी थी। आज वही संरचनाएँ उपेक्षा और अतिक्रमण का शिकार हैं। अगर गाँवों की जल-धरोहर बचाई जाए, तो देश के जल संकट से निपटा जा सकता है।

जब गाँव बदले, खेती बदली और किसान अकेला पड़ गया
जब गाँव बदले, खेती बदली और किसान अकेला पड़ गया

By Dr SB Misra

भारत की खेती 10,000 साल पुरानी है, लेकिन आज किसान अपने ही खेत में असहाय खड़ा है। कैसे विकास के गलत मॉडल, रसायनिक खेती और नीतिगत खैरात ने किसान को आत्मनिर्भर से आश्रित बना दिया।

भारत की खेती 10,000 साल पुरानी है, लेकिन आज किसान अपने ही खेत में असहाय खड़ा है। कैसे विकास के गलत मॉडल, रसायनिक खेती और नीतिगत खैरात ने किसान को आत्मनिर्भर से आश्रित बना दिया।

Damini App: आकाशीय बिजली गिरने से 40 मिनट पहले चेतावनी, जानें कैसे बचाएं जान

By Gaon Connection

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Rashtriya Gokul Mission: हरियाणा में स्वदेशी मवेशी संख्या और दूध उत्पादन में भारी वृद्धि

By Gaon Connection

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Farmer ID : खेती किसानी संबंधी योजना का लेना है लाभ! फार्मर ID अनिवार्य- शिवराज सिंह चौहान

By Gaon Connection

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Weather Update : 2 से 5 अप्रैल बारिश, आंधी, ओलावृष्टि का अलर्ट, जानें कब और कहाँ?

By Gaon Connection

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UP NEWS: भूसा टेंडर को लेकर सरकार सख्त, कई जिलों में प्रक्रिया तेज हुई

By Gaon Connection

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Farmer Registry UP: रजिस्ट्री के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर लगेंगे विशेष शिविर, 1 मई 2026 की डेडलाइन

By Gaon Connection

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Extreme Heat Crisis: 2050 तक बढ़ती गर्मी के कारण शारीरिक एक्टिविटी हो जाएगी धीमी, हर साल बढ़ सकती हैं 7 लाख मौतें

By Preeti Nahar

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