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कम खर्च में भी गंगातीरी और हरियाणा नस्ल की गाय देती हैं ज्यादा दूध, देखें वीडियो

Diti BajpaiDiti Bajpai   5 Oct 2019 5:34 AM GMT

देसी नस्ल की गाय पालने के लिए ज्यादातर किसान साहीवाल, गिर, लाल सिंधी और थारपार पर ही जोर देते हैं लेकिन हमारे देश में कई ऐसी गायों की नस्लें हैं, जिनमें प्रतिकूल परिस्थितियों में दूध देने की क्षमता अधिक होती है। ऐसी ही हैं गंगातीरी और हरियाणा नस्ल की गाय। इन गायों के कम खान-पान पर भी दूध देने की क्षमता घटती नहीं है।

लखनऊ जिले के मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ.टीबी. सिंह हरियाणा गाय की खासियत के बारे में बताते हैं, "इस नस्ल की गाय की दूध क्षमता काफी अच्छी होती है। इसके नर पशु सबसे अच्छे भार वाहक होते हैं इसलिए इनके बैलों का प्रयोग खेती के काम में किया जाता है। उत्तर प्रदेश के बाबूगढ़ और हस्तिनापुर प्रक्षेत्र में इनकी संख्या बढ़ाने के लिए काम भी किया जा रहा है।"


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यह नस्ल हरियाणा के रोहतक, हिसार, करनाल और गुड़गांव जिलों से है। यह उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश के भागों में भी पाली जाती है। इस नस्ल का रंग सफेद और शरीर मध्यम आकार का होता है, पूंछ पतली और छोटी होती है। इस नस्ल के बैल का औसतन भार 5 क्विंटल और गाय का भार 3.5 क्विंटल होता है। यह गाय औसतन 1.5 किलो दूध प्रतिदिन देती है। इस नस्ल की गाय का प्रति ब्यांत (बच्चा देने के बाद) में औसतन दूध 1000 लीटर होता है। दूध में 4.4 प्रतिशत वसा की मात्रा होती है।

वहीं गंगातीरी नस्ल की गाय के बारे में उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद् के पशु प्रकोष्ठ प्रजनन अधिकारी डॉ. के.के. चौहान बताते हैं, "गंगातीरी नस्ल की गाय की सबसे अच्छी खासियत यह है कि कम खान-पान पर भी इसका दूध उत्पादन घटता नहीं है यह जितना दूध देती है उतना ही देगी। हरियाणा नस्ल और इसमें थोड़ा ही अंतर होता है, उसका शरीर सफेद होता है और यह थोड़ा पीलापन लिए होती है।"


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गंगातीरी नस्ल उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर, गाज़ीपुर, वाराणसी और बलिया जिलों में और बिहार के भोजपुर जिले में पाई जाती है। यह प्रति ब्यांत में औसतन 900 से1200 लीटर दूध देती है। इसके दूध में लगभग 5 प्रतिशत वसा की मात्रा होती है।

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