देश की एक प्रयोगशाला ऐसी भी जहां बछिया ही पैदा होती है

Diti BajpaiDiti Bajpai   24 May 2019 10:07 AM GMT

देहरादून। देश में दूध उत्पादन बढ़ाने और नस्ल सुधार के लिए ऋषिकेश में देश की पहली सेक्स सोर्टेड सीमन प्रयोगशाला बनाई गई है। इस प्रयोगशाला में आधुनिक तकनीक की मदद से सिर्फ बछिया ही पैदा होगी। इस सीमन को उत्पादित करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है।

"ऋषिकेश में पहले से डीप फ्रोजन सीमन प्रोडक्शन सेंटर है, जहां पर 30 लाख डोज अलग-अलग प्रजाति (होलस्ट्रीन फीजियन, जर्सी, साहीवाल, गिर, रेड सिंधी समेत कई प्रजाति) के तैयार कर रहे थे। लेकिन मार्च से हमारे पास सेक्स सोर्टेड सीमन भी उपलब्ध है। यह पहला राज्य है, जिसके पास इतनी क्षमता है,'' ऐसा बताते हैं, उत्तराखंड पशुधन विकास परिषद् के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. एम.एस. नयाल ने गाँव कनेक्शन को बताया।

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जुलाई 2018 में ऋषिकेश जिले के श्यामपुर में खुली इस प्रयोगशाला का शिलान्यास केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने किया था। राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत इस प्रयोगशाला को 47 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।

डॉ. नयाल बताते हैं, "अभी हमारे पास उच्च नस्ल के 138 सांड हैं, जिनसे डोज तैयार की जा रही है। सेक्स सोर्टेड सीमन के लिए पहले साल में 2 लाख डोज पैदा करेंगे आने वाले समय में 3 लाख डोज पैदा की जाएंगी। किसानों को यह सस्ती दरों पर उपलब्ध हो, इसके लिए केंद्र और राज्य मदद भी कर रही है।''


भारत सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत ऋषिकेश में श्यामपुर में शुरू की गई सेक्स सोर्टेड सीमन प्रयोगशाला के लिए 18 राज्यों को चुना गया था। इसमें से तीन राज्य समयसीमा में इसका प्रस्ताव दे पाए। इनमें से उत्तराखण्ड के प्रस्ताव को उचित मानते हुए मंजूरी दी गई। इस प्रकार उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जहां इस प्रकार की तकनीक प्रयोग की जा रही है।

सीमन पर आने वाले खर्च के बारे में नयाल बताते हैं, "अभी सेक्स सीमन तैयार करने में 1150 रुपए खर्च आ रहा है। लेकिन केंद्र व राज्य सरकार के अनुदान देने से पशुपालक को सेक्स सोर्टेड सीमन की एक डोज लगभग 390 रुपए में मिलेगी। साथ ही इस सीमन को कई राज्यों में भेजा जा रहा है।" उन्नीसवीं पशुगणना के मुताबिक उत्तराखंड में गायों की संख्या 20 लाख 6 हज़ार है, वही भैसों की संख्या 9 लाख 88 हज़ार है।


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बछिया पैदा होने की यह है प्रक्रिया

इस तरह पैदा होगी बछिया- सामान्य सीमन में x वा y दोनों ही तरह के क्रोमोजोम को कैरी करने वाले स्पर्म होते हैं। यानी एक ही सीमन सैंपल में कुछ स्पर्म x क्रोमोसोम वाले होते हैं और कुछ स्पर्म क्रोमोसोम y वाले होते हैं। ऐसे सीमन से एआई (कृत्रिम गर्भाधान) करने पर यदि x क्रोमोसोम वाला स्पर्म अंडे को फर्टिलाइज करता है तो बछिया पैदा होती है और यदि y क्रोमोसोम वाला क्रोमोसोम अंडे को फर्टिलाइज करता है तो बछड़ा पैदा होता है। सेक्स सोर्टेड सीमन में सिर्फ एक ही तरह के क्रोमोजोम (x या y) को कैरी करने वाले स्पर्म होते हैं। यानी एक सीमन सैंपल में सभी स्पर्म x क्रोमोसोम कैरी करने वाले होते हैं या सभी स्पर्म y क्रोमोसोम कैरी करने वाले होते हैं। x क्रोमोसोम वाले सेक्सड सीमन से AI करने पर बछिया पैदा होती तथा y क्रोमोसोम वाले सेक्सड सीमन से AI करने पर बछड़ा पैदा होता है| इसलिए इस तकनीक के इस्तेमाल से 90 प्रतिशत बछिया ही पैदा होती है।


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