वर्मीकम्पोस्ट यूनिट शुरू करनी है? बिजनेस शुरू करने से पहले जान लें ये 5 जरूरी जगहें, यहीं से मिलेगी ट्रेनिंग और सब्सिडी
गांवों में वर्मीकम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। कम लागत, जैविक खेती की बढ़ती मांग और सरकार की योजनाओं के कारण अब किसान, ग्रामीण युवा और महिलाएं भी इस बिजनेस में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हाल ही में वर्मीकम्पोस्ट यूनिट से जुड़ी खबरों पर कई पाठकों ने सवाल पूछा कि ट्रेनिंग कहां मिलेगी, सब्सिडी कैसे मिलेगी और शुरुआत करने के लिए किस विभाग या संस्था से संपर्क करना होगा। ऐसे में अगर आप उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार या राजस्थान में यह काम शुरू करना चाहते हैं, तो ये जानकारी आपके बहुत काम आ सकती है।
सबसे पहले कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से करें संपर्क
अगर कोई किसान या ग्रामीण युवा वर्मीकम्पोस्ट यूनिट शुरू करना चाहता है तो सबसे पहले उसे अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र यानी KVK से संपर्क करना चाहिए। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत चलने वाले KVK किसानों को जैविक खेती, वर्मीकम्पोस्ट, मशरूम, मधुमक्खी पालन और दूसरे कृषि व्यवसायों की ट्रेनिंग देते हैं। कई जगहों पर वर्मीकम्पोस्ट यूनिट का लाइव डेमो भी दिखाया जाता है। देशभर के KVK की जानकारी और जिलेवार सूची ICAR की वेबसाइट www.icar.org.in पर देखी जा सकती है।
राज्य कृषि विभाग से मिल सकती है सब्सिडी की जानकारी
वर्मीकम्पोस्ट यूनिट पर कई राज्यों में कृषि विभाग की तरफ से सहायता और सब्सिडी दी जाती है। इसके लिए किसानों को अपने जिला कृषि अधिकारी या ब्लॉक कृषि कार्यालय से संपर्क करना पड़ता है। कई राज्यों में जैविक खेती मिशन और प्राकृतिक खेती योजनाओं के तहत किसानों को सहायता भी दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के किसान www.agriculture.up.gov.in पर जाकर योजनाओं और सब्सिडी की जानकारी ले सकते हैं।
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के किसान www.mpkrishi.mp.gov.in वेबसाइट पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
बिहार
बिहार के किसानों के लिए dbtagriculture.bihar.gov.in उपयोगी वेबसाइट हैं।
राजस्थान
राजस्थान के किसान www.agriculture.rajasthan.gov.in और www.rajkisan.rajasthan.gov.in पोर्टल पर जानकारी देख सकते हैं।
बैंक और NABARD से मिल सकता है लोन
अगर कोई किसान बड़े स्तर पर वर्मीकम्पोस्ट यूनिट लगाना चाहता है तो NABARD और बैंक मददगार साबित हो सकते हैं। कई बैंक कृषि आधारित छोटे व्यवसायों के लिए लोन देते हैं। NABARD ग्रामीण उद्यमिता और जैविक खेती से जुड़े प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देता है। NABARD की जानकारी और योजनाएं www.nabard.org पर देखी जा सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक से लोन लेने से पहले एक छोटी परियोजना रिपोर्ट तैयार कर लेना फायदेमंद रहता है।
MyScheme Portal पर खोज सकते हैं सरकारी योजनाएं
अगर किसान जानना चाहते हैं कि उनके राज्य में कौन सी योजना या सब्सिडी चल रही है, तो केंद्र सरकार का MyScheme Portal काफी मददगार हो सकता है। यहां किसान जैविक खेती, वर्मीकम्पोस्ट यूनिट और ग्रामीण रोजगार से जुड़ी योजनाएं खोज सकते हैं। इसके लिए www.myscheme.gov.in वेबसाइट पर विजिट किया जा सकता है।
कृषि विश्वविद्यालयों से भी मिलती है एडवांस ट्रेनिंग
कई कृषि विश्वविद्यालय भी वर्मीकम्पोस्ट, जैविक खेती और कृषि व्यवसायों पर ट्रेनिंग देते हैं। यहां किसानों को खाद निर्माण, मिट्टी प्रबंधन और मार्केटिंग की जानकारी भी दी जाती है।
उत्तर प्रदेश
चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर (www.csauk.ac.in)
नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, अयोध्या (www.nduat.org)
मध्य प्रदेश
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर (www.jnkvv.org)
RVSKVV ग्वालियर (www.rvskvv.net)
बिहार
डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (www.rpcau.ac.in)
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर (www.bausabour.ac.in)
राजस्थान
SKN कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर (www.sknau.ac.in)
कृषि विश्वविद्यालय, कोटा (www.aukota.org)
आवेदन करने से पहले ये दस्तावेज रखें तैयार
अगर आप यूनिट शुरू करना चाहते हैं तो आमतौर पर ये दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:
- आधार कार्ड
- बैंक पासबुक
- जमीन संबंधी दस्तावेज
- फोटो
- मोबाइल नंबर
- परियोजना रिपोर्ट
शुरुआत करने से पहले ये गलती न करें
विशेषज्ञों के अनुसार नए लोग शुरुआत में कुछ आम गलतियां कर देते हैं, जिससे नुकसान हो सकता है। जैसे:
- गलत प्रजाति के केंचुए खरीद लेना
- बेड में जरूरत से ज्यादा पानी डालना
- धूप वाली जगह पर यूनिट बना देना
- बाजार तय किए बिना उत्पादन शुरू कर देना
गांवों में तेजी से क्यों बढ़ रहा यह कारोबार?
विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में जैविक खेती तेजी से बढ़ रही है। रासायनिक खाद महंगी हो रही है और किसान कम लागत वाले व्यवसाय तलाश रहे हैं। यही वजह है कि वर्मीकम्पोस्ट अब सिर्फ खाद नहीं, बल्कि गांवों में कमाई और रोजगार का नया जरिया बनता जा रहा है।