गाँव में शुरू करें वर्मीकम्पोस्ट यूनिट, सरकार देती है सब्सिडी, जानें कितना आता है खर्च और कितना होगा मुनाफा?

Gaon Connection | May 09, 2026, 16:46 IST
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रासायनिक खाद के बढ़ते इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता घट रही है। ऐसे में किसान जैविक खेती और वर्मीकम्पोस्ट की ओर बढ़ रहे हैं। केंचुआ खाद कम लागत में अधिक मुनाफा देती है। यह मिट्टी की गुणवत्ता सुधारती है और फसल उत्पादन बढ़ाती है। वर्मीकम्पोस्ट यूनिट लगाना एक लाभदायक व्यवसाय है।
गोबर और कृषि कचरे से बनाएं जैविक खाद
गोबर और कृषि कचरे से बनाएं जैविक खाद
रासायनिक खाद के बढ़ते इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है। ऐसे में किसान अब जैविक खेती और प्राकृतिक खाद की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में वर्मीकम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद किसानों के लिए कम लागत वाला और मुनाफेदार व्यवसाय बनता जा रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (Department of Agriculture & Farmers Welfare) के अनुसार, वर्मीकम्पोस्ट मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ फसल उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करता है।

क्या है वर्मीकम्पोस्ट?

वर्मीकम्पोस्ट एक जैविक खाद है जिसे केंचुओं की मदद से तैयार किया जाता है। इसमें गोबर, फसल अवशेष और जैविक कचरे को केंचुए खाकर पोषक तत्वों से भरपूर खाद में बदल देते हैं। यह खाद मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ाती है और पौधों को जरूरी पोषण देती है।

गाँव में कैसे लगाएँ वर्मीकम्पोस्ट यूनिट?

वर्मीकम्पोस्ट यूनिट लगाने के लिए सबसे पहले ऐसी जगह चुननी चाहिए, जहां गोबर और कृषि अपशिष्ट आसानी से मिल सके। ग्रामीण क्षेत्र, डेयरी फार्म के आसपास और सब्जी उत्पादन वाले इलाके इसके लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं।

यूनिट तैयार करने की प्रक्रिया

  • सबसे पहले छायादार शेड बनाना होता है।
  • इसके अंदर 15 मीटर लंबा, 1.5 मीटर चौड़ा और 0.6 मीटर ऊंचा बेड तैयार किया जाता है।
  • बेड में गोबर और फसल अवशेष की परतें बिछाई जाती हैं।
  • इसके बाद केंचुए डाले जाते हैं।
  • नमी बनाए रखने के लिए नियमित पानी का छिड़काव जरूरी होता है।
  • लगभग 65-70 दिनों में खाद तैयार हो जाती है।

कितनी जमीन और क्या-क्या चाहिए?

कृषि विभाग के अनुसार, 200 टन सालाना क्षमता वाली यूनिट लगाने के लिए लगभग 0.5 से 0.6 एकड़ जमीन की जरूरत होती है। इसमें शेड, पानी की व्यवस्था, वर्मी बेड, मशीनरी और गोदाम की जरूरत पड़ती है।

कितना आएगा खर्च?

रिपोर्ट के अनुसार, 200 टन प्रति वर्ष क्षमता वाली वर्मीकम्पोस्ट यूनिट लगाने में करीब 11.83 लाख रुपये का पूंजीगत खर्च आता है। इसमें:

मदअनुमानित लागत
शेड और वर्मी बेड निर्माण₹5.60 लाख
गोदाम और ऑफिस₹2.50 लाख
पानी की व्यवस्था₹75,000
मशीनरी और उपकरण₹1.03 लाख
केंचुओं की खरीद₹97,200
बिजली और फर्नीचर₹35,000
कुल पूंजीगत लागत₹11.83 लाख
इसके अलावा सालाना संचालन लागत लगभग 3.42 लाख रुपये तक आती है।

कितना होगा मुनाफा?

कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक:

आय का स्रोतअनुमानित आय
वर्मीकम्पोस्ट बिक्री₹8.10 लाख
केंचुओं की बिक्री₹1.80 लाख
कुल आय₹9.90 लाख
सालाना शुद्ध लाभ₹6.47 लाख
इस तरह दूसरे साल से कुल शुद्ध लाभ लगभग 6.48 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकता है।

सरकार से कितना मिलेगा लोन और सब्सिडी?

रिपोर्ट के अनुसार इस परियोजना में:

  • 25% मार्जिन मनी किसान को लगानी होती है।
  • करीब 75% राशि बैंक लोन के रूप में मिल सकती है।
कई राज्यों में जैविक खेती और वर्मीकम्पोस्ट यूनिट पर कृषि विभाग तथा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के माध्यम से सब्सिडी भी दी जाती है। किसान अपने जिले के कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या नाबार्ड कार्यालय से जानकारी ले सकते हैं।

आवेदन कैसे करें?

आवेदन की प्रक्रिया

• जिला कृषि विभाग कार्यालय जाएं

• परियोजना रिपोर्ट तैयार करें

• जमीन और पहचान संबंधी दस्तावेज जमा करें

• बैंक से लोन के लिए आवेदन करें

• कृषि विभाग की योजना के तहत सब्सिडी के लिए पंजीकरण कराएं

क्यों बढ़ रही है वर्मीकम्पोस्ट की मांग?

जैविक खेती की बढ़ती मांग के कारण वर्मीकम्पोस्ट का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। सब्जी, फल, फूल और जैविक खेती करने वाले किसान इसकी ज्यादा खरीद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कम लागत और अच्छी आमदनी के कारण यह ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए रोजगार का अच्छा विकल्प बन सकता है।
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