कर्नाटक की एक ग्राम पंचायत ने किया कमाल, एक ही दिन में बनाए 115 शौचालय

कर्नाटक की एक ग्राम पंचायत ने किया कमाल, एक ही दिन में बनाए 115 शौचालयलक्ष्य से ज्यादा बने शौचालय।

कर्नाटक के बेलगाम जिले में एक छोटी सी ग्राम पंचायत है बडास (खलसा) और इस पंचायत ने अपनी अध्यक्षा नेहा गंगाधर घसारी के नेतृत्व में स्वच्छता को लेकर नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अपनी ग्राम पंचायत के निवासियों की समस्याओं के समाधान के लिए हर समय हाजिर रहने वाली नेहा गंगाधर ने अपने कार्यकाल में सफलता की कई मिसालें कायम की हैं। इनमें से एक ये भी है कि उन्होंने एक दिन में 115 शौचालयों का निर्माण करवाया।

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शौच करना इस गाँव की प्रमुख समस्याओं में से एक थी जिसे लेकर उनके पास अक्सर शिकायतें आती रहती थीं। गाँव में शौचालयों की कमी होने से लोग खुले में शौच करने चल देते थे जिससे गाँव का पर्यावरण प्रदूषित तो हो ही रहा था। साथ ही लोगों के बीच स्वास्थ्य की नई समस्याऐं आम हो चलीं थीं। बार-बार आने वाली शिकायतों और उनके निपटारे के लिए सरपंच ने पूरी ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत अभियान की तर्ज पर ‘स्वच्छ हब्बा’ अभियान की शुरुआत कर दी। कन्नड़ भाषा के शब्द हब्बा का शाब्दिक अर्थ ‘उत्सव’ होता है। नेहा ने स्वच्छता के इस उत्सव को सफल बनाने के लिए सबसे पहले अपनी पंचायत के सदस्यों को विश्वास में लिया और रणनीति तैयार की। साथ ही तय किया कि अभियान प्रचार-प्रसार हो और एक ही दिन में पूरी ग्राम पंचायत में बतौर मिसाल 101 शौचालय बनाए जाएं। इसके लिए घर-घर जाकर उन्होंने लोगों से मुलाकात की।

स्वच्छता के महत्व और शौचालय की आवश्यकताओं के बारे में हर एक निवासी को विस्तार से बताया गया और इस अभियान में जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। स्थानीय राजनेताओं, अधिकारियों और युवाओं को इस अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया गया। देखते ही देखते नेहा के नेतृत्व में सभी ग्रामीण ‘स्वच्छ हब्बा’ की सफलता के लिए जुट गए। इसके बाद अपनी अनोखी कार्यशैली और नेतृत्व से नेहा ने अभियान की सफलता के परचम लहरा दिए। एक दिन में 101 शौचालय बनाने के लक्ष्य को साधते हुए बडास (खलसा) पंचायत में एक ही दिन में 115 शौचालयों का निर्माण कर दिया।

वो आगे बताती हैं, “रोज 6 बजे से लेकर देर रात तक ग्राम पंचायत के घरों में दस्तक दी जाती और देर रात तक लोगों को स्वच्छ हब्बा को लेकर जानकारी दी जाती। हर ग्राम पंचायत सदस्य को जिम्मेदारी दी गयी कि वो अपनी एक अलग टीम बनाए और इस अभियान की सफलता तय करे।” स्थानीय अखबारों, पंफलेट और पर्चियों में लिखकर “स्वच्छ हब्बा” अभियान का प्रचार-प्रसार किया गया। प्रचार-प्रसार की सारी सामग्री स्थानीय कन्नड़ भाषा में प्रकाशित की गई। शौचालयों के निर्माण के लिए गाँव और आसपास के इलाकों से 19 राजमिस्त्री बुलाये गए और तय किया गया कि एक ही दिन में सारे शौचालय बनें।

“स्वच्छ हब्बा” की सफलता के पीछे ग्रामीणों का योगदान तो है लेकिन सबसे बड़ा श्रेय ग्राम पंचायत अध्यक्षा नेहा गंगाधर घसारी के कुशल नेतृत्व का है। अब ग्रामीण खुले में शौच नहीं जाते और पूरी ग्राम पंचायत स्वच्छता को लेकर जागरूक हो चुकी है। सच बात है, सफलता किसी का इंतज़ार नहीं करती बस जरूरत होती है तो सिर्फ एक नेक शुरुआत की। इस अभियान को अंजाम देने से पहले आम लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया गया ताकि उनका सहयोग मिल पाए और किसी तरह का विरोधाभास ना हो और ये भी तय किया गया कि सारा अभियान गैर-राजनीतिक हो।

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