बंजर जमीन पर पूजा भाले का करिश्मा देखने दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं लोग

Anusha MishraAnusha Mishra   24 Oct 2017 9:37 AM GMT

बंजर जमीन पर पूजा भाले का करिश्मा देखने दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं लोगपूजा भाले

शहर में रहने वाले लोग हर वक्त बड़ी - बड़ी इमारतों के बीच फंसे रहते हैं। हम एक ऐसे समय में रह रहे हैं जिसमें प्रकृति से जुड़ाव को लोग भूलते जा रहे हैं और हमारी ज़िंदगी तकनीक व इंटरनेट से मिलने वाली सहूलियतों के बीच ही फंसकर रह गई है लेकिन क्या आपका कभी मन नहीं करता कि आप किसी ऐसी जगह सुकून के कुछ पल बिताएं जहां हरे - भरे पेड़ हों, चिड़ियों की चहचहाहट हो और तकनीक से दूर आप प्रकृति के करीब हों। शहर में रहने वालों के लिए आस-पास ऐसी जगह ढूंढना बहुत मुश्किल होता है लेकिन पुणे की एक महिला पूजा भाले ने आपकी ये मुश्किल दूर कर दी है।

पुणे में 'द फार्म' नाम का जैव विविधता केंद्र बनाया है जहां कई प्रजातियों की चिड़ियां, कीट - पतंगे हैं और शहरी प्रदूषण यहां बिल्कुल भी नहीं है और इस पूरे फार्म की देखरेख संरक्षण जीवविज्ञानी पूजा भाले अकेले करती हैं। यहां आपको सिर्फ हरी वादियों का सुकून ही नहीं मिलता बल्कि कई ऐसे एक्सपेरीमेंट प्रोग्राम भी हैं जिनसे आप यहां जुड़ सकते हैं। शुरुआत में यह जगह पूजा भाले के परिवार की थी और यह बंजर ज़मीन थी लेकिन अब आप अगर यहां आएंगे तो आपको इस बात पर यकीन हो जाएगा कि जुनून और दृढ़ संकल्प से कुछ भी हासिल किया जा सकता है।

यहां कुछ झोपड़ी हैं, हज़ारों पेड़ हैं और जो कुछ भी इस जगह को संवारने - सजाने में इस्तेमाल किया गया है उसमें से ज्य़ादातर दान में मिली चीज़ें हैं। यहां पूजा ने कुछ जल निकाय भी बनाए हैं जहां जानवर और पक्षी पानी पीते हैं।

पूजा बताती हैं कि क्योंकि मैं एक संरक्षण जीवविज्ञानी हूं इसलिए मुझे हमेशा से ही पर्यावरण से प्यार रहा है लेकिन पहले मुझे ये नहीं पता था कि मैं अपने इस प्यार को किस तरह लोगों तक पहुंचाऊं, कहां से शुरुआत करूं लेकिन पर्यावरण पर एक शैक्षिक कार्यक्रम के दौरान एक बच्चे ने मुझसे एक सवाल पूछा और उस सवाल ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। उस बच्चे का सवाल बहुत ही सामान्य सा था। उसने मुझसे पूछा था कि पर्यावरण में बदलाव के लिए मुझे क्या करना चाहिए? इस एक सवाल ने सब बदल दिया।

पूजा बताती हैं कि 2008 से पहले मैं लंदन में रहती थी और मैंने अपनी पढ़ाई भी वहीं से की थी लेकिन इसके बाद मैं वापस भारत आ गई। वह बताती हैं कि 2008 या 2009 के बीच में स्वीडन के एक कपल से मिली जो ओपेन वर्ल्ड नाम से एक फाउंडेशन चलाते थे। वे लोगों के लिए ऐसी जगह बनाना चाहते थे जहां वे प्रकृति के पास रह सकें। यहीं से मुझे इस तरह का फार्म बनाने का आइडिया मिला।

पूजा कहती हैं कि मेरे परिवार की एक 3.5 एकड़ की एक ज़मीन थी जो सालों से बंजर थी, वहां बहुत कम लोगों का आना-जाना था, कोई ऐसी चीज़ नहीं थी कि वहां पक्षी और पशु आएं। उस समय मेरा बस एक उद्देश्य था कि कैसे उस क्षेत्र में जैव विविधता को वापस लाया जाए, भले ही इसके लिए मुझे सारा काम अकेले करना पड़े। वह कहती हैं कि इसके बाद अगले पांच साल जो इस फार्म को तैयार करने में लगे वो सिर्फ इस जगह को बदलने वाले ही नहीं थे बल्कि मुझे भी बदलने वाले थे।

इस फार्म हमने 4.5 साल पहले शुरू किया था। हमारे पास एक तालाब है जिसमें हम 400 हज़ार लीटर पानी का संरक्षण करते हैं। हमने 1400 पौधे लगाए हैं, यहां 62 तरह की पक्षियों की प्रजातियां हैं और 8 प्रजातियां तितलियों की भी हैं। यहां कई जानवर भी आते हैं। पूजा बताती हैं कि हमारे पास नौ कुत्ते, 22 बिल्लियां और कुछ बकरियां भी हैं। द फार्म के एंट्री गेट पर कोई दरवाज़ा नहीं है, यहां सिर्फ एक पर्दा लगा है और यह गाय के गोबर से बनाया गया है।

पूजा बताती हैं कि यहां पौधे लगाना, खुदाई करने से लेकर बाकी सारा काम वॉलंटियर्स की मदद से पूरा हुआ है। इस पूरे फार्म को बनाने में या तो बेकार पड़े सामान का इस्तेमाल हुआ है या फिर दान में दिए हुए। यहां तक कि बीयर की बोतलों से लेकर रबड़ के टायर तक सब कुछ यहां इस्तेमाल किया गया है, पूजा हंसते हुए कहती हैं।

पूजा कहती हैं कि आप यहां आएंगे तो लगेगा कि वो जो प्रकृति आपका खुद का हिस्सा है उसे आप दोबारा कैसे पाते हैं। पूजा कहते हैं कि ज़्यादातर चीजें बांस से बनी हुई हैं, यहां पशु सहायता चिकित्सा से लेकर जैविक खेती तक कई चीजें आपको मिलेंगी।

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