ये महिलाएं अब मजदूरी नहीं, अपना खुद का व्यवसाय करती हैं 

Divendra SinghDivendra Singh   11 May 2018 3:32 PM GMT

ये महिलाएं अब मजदूरी नहीं,  अपना खुद का व्यवसाय करती हैं 

इनमें से कई महिलाएं मजदूरी करती थी, तो कुछ महिलाएं किसी एनजीओ में काम करती थी, लेकिन आज वही महिलाएं समूह बनाकर साबुन, तेल जैसे उत्पाद बना रही हैं वो भी बिल्कुल हर्बल।

झारखंड के जमदेशपुर जिले के हुडलुंग गाँव की मीनू रक्षित कुछ साल पहले तक एक एनजीओ में काम करती थीं। आज वो 20 महिलाओं को जोड़कर प्रगति महिला समूह नाम से स्वयं सहायता समूह चला रही हैं। मीनू बताती हैं, "हम महिलाओं का ग्रुप हर्बल प्रोडक्ट बनाते हैं, हर्बल नाम है तो पूरी तरह से हर्बल। हम लोगों को सोप झारखंड के प्राकृतिक तेल जैसे, महुआ, नीम, कुसुम, तुलसी, लेमनग्रास जैसे तेलों को इस्तेमाल करते हैं।"

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झारखंड में नीम, महुआ, तुलसी, लेमनग्रास, कुसुम जैसे तेलों की अच्छी पैदावार होती है, लेकिन इसे सही ढ़ग से इस्तेमाल नहीं हो पाता है। ऐसे में मीनू ने भी सोचा कि अपना कुछ शुरु करते हैं, लेकिन अकेले दम पर कुछ करना आसान नहीं था, ऐसे में उन्होंने अपने साथ 19 ऐसी और बेरोजगार महिलाओं को जोड़ा और उन महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया।

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मीनू कहती हैं, "आजकल सरकार से इतना कुछ मिल रहा है हम गाँव की महिलाओं को ऊपर उठाने के लिए सुविधा दे रहा है, लोन दे रहा है, मार्केट दे रहा है, हम महिलाओं ने बैंक से लोन लेकर इसकी शुरूआत की, आज सभी महिलाओं को अच्छा मुनाफा मिल रहा है।"

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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिली मदद

ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन मददगार साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम ये समूह की महिलाओं को ऋण मिलने में परेशानी नहीं होती है और महिलाओं को अपने उत्पाद बनाने के लिए बेहतर प्लेटफार्म भी मिल रहा है।

देशभर में चल रही दीन दयाल अंत्योदय योजना के तहत केवल झारखंड राज्य में ही 15,733 गांवो में करीब 1,32,531 सखी मंडलों का गठन कर उन्हें आजीविका के साधनो से जोड़ा गया है। जिसमें से राजमनी एक हैं।

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एक लाख से ज्यादा महिलाएं जो आजीविका के संसाधनों से जुड़ी हैं उनमे से कोई सब्जी की दुकान लगाता है तो कोई ब्यूटी पार्लर और कास्मेटिक की दुकान चलाता है, कोई कृषि मित्र है तो कोई पशु सखी है, कोई महिला रानी मिस्त्री है तो किसी ने सोलर मैकेनिक बन आमदनी का जरिया खोज निकाला है।

झारखंड राज्य की अब ये महिलाएं दूसरों के यहां मजदूरी करने नहीं जाती हैं बल्कि गांव में रहकर ही अपने खुद के व्यवसाय से महीने का पांच से दस हजार रुपए आसानी से निकाल लेती हैं।देश भर में सरकार की चल रही महिला किसान परियोजना के अंतर्गत 22 राज्यों के 196 जिलों में 32.40 लाख महिलाएं लाभान्वित हुई हैं।

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स्टार्टअप विलेज ऑन्ट्रप्रनर प्रोग्राम के तहत देशभर में एक लाख 82 हजार उद्यमी तैयार किए गये हैं। इस परियोजना के अंतर्गत 24 राज्यों में 3 लाख 78 हजार ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ा गया।राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत झारखंड में 24 जिले के 215 प्रखंड के 15 लाख 96 हजार गरीब परिवारों को सखी मंडल से जोड़ा गया। दीन दयाल अंत्योदय योजना के तहत राज्य में 70,321 सखी मंडलों को बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया। सात लाख से ज्यादा परिवारों की आजीविका को सशक्त किया गया।

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