स्मार्ट फोन के बिना बच्चों की पढ़ाई में मदद करने वाले कम्युनिटी रेडियो ने जीता राष्ट्रीय पुरस्कार

महाराष्ट्र के नासिक जिले के कम्युनिटी रेडियो 'रेडियो विश्वास' ने कोविड-19 के दौरान ऐसे बच्चों को पढ़ाई जारी करने में मदद की, जिसके पास स्मार्ट फोन नहीं थे। 'रेडियो विश्वास' राष्ट्रीय कम्युनिटी रेडियो पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

Divendra SinghDivendra Singh   2 July 2021 11:06 AM GMT

स्मार्ट फोन के बिना बच्चों की पढ़ाई में मदद करने वाले कम्युनिटी रेडियो ने जीता राष्ट्रीय पुरस्कार

कम्युनिटी रेडियो पर समय-समय पर बच्चों के कार्यक्रम उन्हीं के आवाज में रिकॉर्ड किए जाते हैं। सभी फोटो: अरेंजमेंट

कोविड-19 के कारण पिछले एक साल से सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है, बहुत से स्कूल स्मार्ट फोन के जरिए बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन ऐसे बहुत से बच्चे हैं, जिनके पास स्मार्ट फोन ही नहीं है। ऐसे में नासिक के कम्युनिटी रेडियों ने इसका भी हल निकाल लिया है।

महाराष्ट्र के नासिक का कम्युनिटी रेडियो 'रेडियो विश्वास' अध्यापकों की मदद से बच्चों के लिए कार्यक्रम रिकॉर्ड कर हर दिन उसका प्रसारण करता रहा, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर न पड़े।

रेडियो विश्वास को सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा स्थापित राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो पुरस्कारों के 8वें संस्करण में दो पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। रेडियो विश्वास 90.8 एफएम ने "सस्टेनेबिलिटी मॉडल अवार्ड्स" श्रेणी में पहला पुरस्कार और "थीमैटिक अवार्ड्स" श्रेणी में अपने कार्यक्रम कोविड-19 के काल में 'एजुकेशन फॉर ऑल' के लिए दूसरा पुरस्कार जीता है।

रेडियो विश्वास के स्टेशन निदेशक डॉ. हरि विनायक कुलकर्णी बताते हैं, "ऐसे समय में जब स्कूल बंद हो गए, बहुत से ऐसे परिवार हैं, जिनके पास बच्चों को पढ़ाने के लिए स्मार्ट फोन नहीं हैं, उनकी पढ़ाई पर कोई असर न पड़े इसलिए हमने 'शिक्षण सर्वांसाठी' कार्यक्रम शुरू किया।"

लोगों में बीच जाकर उन्हें जागरूक भी करते हैं।

रेडियो विश्वास, विश्वास ध्यान प्रबोधिनी और अनुसंधान संस्थान, नासिक, महाराष्ट्र द्वारा संचालित होता है। इस संस्थान की शुरुआत से ही इस रेडियो स्टेशन से प्रसारण किया जा रहा है। स्टेशन प्रतिदिन 14 घंटे का प्रसारण करता है।

'शिक्षण सर्वांसाठी' कार्यक्रम के बारे में डॉ. कुलकर्णी कहते हैं, "शिक्षण सर्वांसाठी हिंदी में जिसका अर्थ सभी के लिए शिक्षा होता है, शुरू करने के लिए हमने 150 शिक्षकों की मदद ली, इसमें बहुत से किसी संस्था से जुड़े हैं और कई किसी स्कूल में शिक्षक हैं। हमने तीसरी कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक सभी विषयों के पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड किया और अलग-अलग समय पर इसे प्रसारित किया।"

इस रेडियो स्टेशन से जिला परिषद और नासिक नगरपालिका स्कूलों में पढ़ने वाले सभी छात्रों के लिए कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं, कार्यक्रम का प्रसारण विभिन्न भाषाओं अर्थात हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, संस्कृत में किया गया।

रेडियो विश्वास की कार्यक्रम समन्वयक रुचिता ठाकुर बताती हैं, "कार्यक्रम के बारे में हम घर-घर जाकर लोगों को जागरूक भी करते थे, ताकि वो बच्चों को रेडियो के जरिए पढ़ा पाएं, लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला।"

कम्युनिटी का रेडियो का कार्यक्रम जून से दिसम्बर 2020 तक चला था, अभी भी दिन में तीन बार बच्चों के लिए कार्यक्रम का प्रसारण किया जाता है।

दूसरे जिलों तक पहुंचाया कार्यक्रम

यही नहीं रेडियो विश्वास ने रिकार्ड किए हुए पाठ्यक्रम को छह अन्य कम्युनिटी रेडियो के साथ साझा किया, ताकि वे भी अपने रेडियो चैनलों के माध्यम से उन्हें प्रसारित कर सकें। डॉ. कुलकर्णी कहते हैं, "हमें खुशी है कि हम पूरे महाराष्ट्र के छात्रों की मदद कर सके क्योंकि छह सामुदायिक रेडियो स्टेशनों ने इस सामग्री को अपने-अपने शहरों में प्रसारित करने के लिए हमसे संपर्क किया है।"

वासिम जिले के स्वतंत्रता कम्युनिटी रेडियो, सतारा जिले के मनदेशी तरंगवाहिनी कम्युनिटी रेडियो, सांगली जिले के येरला वाणी कम्युनिटी रेडियो, वर्धा जिले रेडियो एमजीआईआरआई कम्युनिटी रेडियो, वासिम जिले के रेडियो वत्सागुल्म कम्युनिटी रेडियो और बारामती के शारदा कृषि वाहिनी कम्युनिटी रेडियो के माध्यम से बच्चों के लिए कार्यक्रम का प्रसारण किया गया।


शिक्षकों ने बच्चों को बांटे एफएम डिवाइस

रेडियो विश्वास की पहल पर शिक्षकों ने नासिक के इगतपुरी तालुका में गरीब आदिवासी बच्चों को 451 एफएम डिवाइस भी बांटी थी। रुचिता ठाकुर कहती हैं, "इगतपुरी में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले ऐसे बहुत से बच्चे हैं, जिनके पास रेडियो भी नहीं था, टीचरों ने पैसे इकट्ठा करके बच्चों को रेडियो बांटे थे।"

दूसरे कार्यक्रमों से भी कम्युनिटी रेडियो ने की लोगों की मदद

सामुदायिक रेडियो स्टेशन के माध्यम से प्रसारित किए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि कैसे 'शहरी परसबाग' (रसोई उद्यान) कार्यक्रम से पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिली। उन्होंने कहा, "इस कार्यक्रम में हमारे श्रोताओं को बीज की उपलब्धता से लेकर पौधे रोपने तक की प्रक्रिया की पूरी जानकारी प्रदान की जाती है।" 'माला अवदलेला पुस्तक' (पढ़ने के लिए पसंदीदा पुस्तकों के बारे में) और 'जानीव समाजकची' (वरिष्ठ नागरिकों के सामने आने वाली कठिनाइयों पर केंद्रित) ऐसे कार्यक्रम हैं जो दर्शकों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करने के लिए लक्षित हैं।

सामुदायिक रेडियो स्टेशन आमतौर पर 10-15 किलोमीटर के दायरे में स्थानीय समुदाय के लाभ के लिए स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। ये स्टेशन ज्यादातर स्थानीय लोगों द्वारा संचालित किए जाते हैं जो 'टॉक शो' होस्ट करते हैं, स्थानीय संगीत बजाते हैं और स्थानीय गाने गाते हैं।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सामुदायिक रेडियो स्टेशनों के बीच नवाचार और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 2011-12 में राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो पुरस्कारों की शुरूआत की थी। इन सामुदायिक रेडियो स्टेशनों ने कोविड-19 महामारी के दौरान संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज की तारीख में, भारत में विभिन्न राज्यों में 327 सामुदायिक रेडियो स्टेशन चल रहे हैं।


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