सराहनीय: स्कूल तक नहीं पहुंची किताबें तो बिल्डिंग पर पेंट करा दिया कोर्स

सराहनीय: स्कूल तक नहीं पहुंची किताबें तो बिल्डिंग पर पेंट करा दिया कोर्सप्राथमिक विद्यालय अन्नी बैजल की दीवारों पर इस तरह पेंटिंग बनाकर जानकारी दी जा रही है।

देवांशु मणि तिवारी/ त्रिलोकी नाथ मिश्रा, (कम्यूनिटी जर्नलिस्ट)

अमेठी। जिले के गौरीगंज ब्लॉक के दस सरकारी स्कूलों के छात्र अपनी पढ़ाई के लिए अब लिए किसी भी सरकारी किताबों के मोहताज नहीं हैं। इन स्कूलों में बाला (बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड) सुविधा की मदद से कक्षा पांच से आठ तक का पूरा का पूरा पाठ्यक्रम विद्यालय की दीवारों पर बनाया गया है, जिससे स्कूल में सरकारी किताबें उपलब्ध हों या ना हों छात्रों को शिक्षा में कोई रुकावट नहीं आती है।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय, अन्नी बैजल, अमेठी के बच्चे खुशियां मनाते हुए।

बाला के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों को मिली इस संजीवनी के बारे में गौरीगंज ब्लॉक की ग्रामसभा अन्नीबैजल के पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य मो. वसीम बताते हैं, ''पूरे जिले के सरकारी स्कूलों में अभी तक कक्षा छह से लेकर कक्षा आठ तक की किताबें नहीं मिली हैं। ऐसे में हमने इन किताबों के आने का इंतज़ार नहीं किया और विद्यालय में बाला योजना के अंतर्गत दीवारों पर पाठ्यक्रम पेंट करवाया, जिससे हमें छात्रों को पढ़ाने में लाभ मिल रहा है।''

अभी तक बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं। ऐसे में हमने किताबों का इंतजार के बजाए स्कूल की दीवारों पर पाठ्यक्रम पेंट करवाया, जिससे हमें छात्रों को पढ़ाने में लाभ मिल रहा है।
मो. वसील, प्रधानाचार्य,पूर्व माध्यमिक विद्यालय अन्नीबैजल, अमेठी

जिले में बाला योजना के अंतर्गत अभी तक गौरीगंज ब्लॉक के बाबूपुर, अन्नीबैजल, बेलखौर, टिकरिया और अंबिया गाँवों के दस सरकारी स्कूलों ( आठ प्राथमिक विद्यालय और दो पूर्व माध्यमिक विद्यालय) को पायलेट कार्यक्रम के तौर पर जोड़ा गया है। विद्यालयों में इस कार्यक्रम को लाने में मदद यहीं की स्थानीय कंपनी एसीसी सीमेंट और क्षेत्र में प्रभावी ढंग से काम रही गैर सरकारी संस्था डेवलपमेंटल एसोसिएशन फॉर ह्यूमन एडवांस्मेंट (देहात) कर रही है।

''सरकारी स्कूलों में दीवारों पर पाठ्यक्रम पेंट करवाने से छात्रों को चीज़ें आसानी से समझ आ रही हैं। जैसे कि गणित में कक्षा-पांच से ही छात्रों को कोण सिखाना शुरू कर दिया जाता है पर किताबों में सभी तरह के कोण सीखना छात्रों के लिए टेढ़ी खीर साबित होता था। ऐसे में हमने स्कूल के दरवाज़ों के नीचे ज़मीन पर चांदा ( कोण सूचक यंत्र) बनवा दिया, जिससे छात्रों दरवाज़ा खोलने पर कोण को आसानी से समझना आ गया।'' जीतेंद्र चतुर्वेदी, प्रमुख (देहात) बताते हैं।

दीवारों पर पाठ्यक्रम पेंट करवाने से छात्रों को चीज़ें आसानी से समझ आ रही हैं। जैसे कि गणित के कोण समझाने के लिए हमने दरवाजों के नीचे चांदा बनवा दिया, अब दरवाजा खोलने पर वो आसानी से कोण समझ सकते हैं।
जीतेंद्र चतुर्वेदी, प्रमुख, देहात

इन सरकारी स्कूलों में आधुनिक तरीकों से छात्रों को शिक्षा दी जा रही है और यही कारण है कि इन स्कूलों के छात्रों को कई जनपदीय और गैरजनपदीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं। यहां के स्थानीय लोगों के अनुसार इन विद्यालयों के विकास के बावजूद अभी तक इन विद्यालयों का हाल जानने बीएसए सहित कोई भी विभागीय अधिकारी नहीं आया है। बाला योजना के अंतर्गत सरकारी स्कूलों के सुधार को अहम बताते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. ओम प्रकाश मिश्रा बताते हैं,'' जिले में कई ब्लॉकों अभी तक किताबें नहीं पहुंच पाई हैं, जहां भी किताबें नहीं पहुंची हैं वहां पर स्कूलों में ऐसे प्रयास सराहनीय है और बाकी ब्लॉकों में भी ऐसी ही योजना अपनाई जानी चाहिए।'' वो आगे बताते हैं कि अगर विभाग इन स्कूलों में कराए गए कामों का ब्यौरा नहीं ले पाया है ,तो हम जल्द ही बीएसए की मदद से इन स्कूलों का हाल जानने जाएंगे।

बाला योजना के तहत स्कूल की बिल्डिंग पर की गई पेंटिग।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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