हर्बेरियम तकनीशियन बनने का मौका: CSIR–NBRI का विशेष प्रमाणपत्र कोर्स जनवरी 2026 में
Gaon Connection | Dec 29, 2025, 13:45 IST
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भारत में जैवविविधता संरक्षण और वनस्पति अनुसंधान को मजबूत करने के उद्देश्य से CSIR&नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, लखनऊ जनवरी 2026 में Certificate Course for Herbarium Technician आयोजित कर रहा है।
<p>यह कोर्स उन छात्रों और युवाओं के लिए है जो पौधों के साथ काम करना चाहते हैं और विज्ञान के ज़रिए प्रकृति की रक्षा में योगदान देना चाहते हैं।<br></p>
क्या आपने कभी सोचा है कि जंगल, खेत या पहाड़ों में मिलने वाले पौधों की पहचान और जानकारी आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुँचती है? दरअसल, यह काम हर्बेरियम करते हैं, जहाँ पौधों के नमूनों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखा जाता है। यही नमूने हमें यह समझने में मदद करते हैं कि प्रकृति कैसे बदल रही है और जलवायु परिवर्तन का असर पौधों पर क्या पड़ रहा है।
इसी ज़रूरत को देखते हुए CSIR–National Botanical Research Institute (CSIR–NBRI), लखनऊ एक Certificate Course for Herbarium Technician शुरू कर रहा है। यह कोर्स उन छात्रों और युवाओं के लिए है जो पौधों के साथ काम करना चाहते हैं और विज्ञान के ज़रिए प्रकृति की रक्षा में योगदान देना चाहते हैं।
यह प्रशिक्षण 12 से 19 जनवरी 2026 तक चलेगा।
यह नॉन-रेज़िडेंशियल कोर्स है, यानी रहने की व्यवस्था प्रतिभागियों को खुद करनी होगी।
कुल 20 सीटें हैं, इसका मतलब है कि हर प्रतिभागी को करीब से सीखने और विशेषज्ञों से सीधे मार्गदर्शन का मौका मिलेगा।
यह कोर्स पूरी तरह प्रैक्टिकल है। इसमें आप सीखेंगे:
अगर आपने B.Sc. (Science) की है- खासतौर पर Botany, Plant Science, Life Science या Environmental Science, तो आप आवेदन कर सकते हैं।
कोर्स शुल्क: ₹3,000
इंडस्ट्री से प्रायोजित उम्मीदवारों के लिए: ₹10,000
(इसमें ट्रेनिंग किट और काम के समय का भोजन शामिल है)
इस कोर्स का संचालन अनुभवी वैज्ञानिक करेंगे
डॉ. के. एम. प्रभुकुमार (हर्बेरियम क्यूरेटर) और डॉ. मनीष एस. भोंयर (प्रमुख वैज्ञानिक)।
यानी सीखने का मौका सीधे उन लोगों से, जो वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
प्रकृति की यादों का खज़ाना
हर्बेरियम सिर्फ सूखे पौधे नहीं होते, बल्कि यह बताते हैं कि किसी इलाके में पहले कौन-से पौधे थे और अब क्या बदल गया है।
करियर के नए रास्ते
हर्बेरियम तकनीशियन बनकर आप कॉलेज और विश्वविद्यालय, वन विभाग, पर्यावरण संस्थान, म्यूज़ियम और बॉटैनिकल गार्डन, डिजिटल हर्बेरियम प्रोजेक्ट्स, में काम कर सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन को समझने में मदद
100 साल पुराने पौधों के नमूने आज के वैज्ञानिकों को बताते हैं कि मौसम, तापमान और बारिश में आए बदलावों का असर पौधों पर कैसे पड़ा।
इस कोर्स में सीटें बहुत कम हैं और चयन संभवतः पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगा। इसलिए अगर आप प्रकृति, पौधों और विज्ञान से जुड़ा करियर बनाना चाहते हैं, तो देर न करें।
CSIR–NBRI का यह प्रमाणपत्र कोर्स उन लोगों के लिए एक बेहतरीन मौका है, जो किताबों से आगे जाकर हाथों से सीखना चाहते हैं और प्रकृति को समझकर उसकी रक्षा में भूमिका निभाना चाहते हैं। यह सिर्फ एक कोर्स नहीं, बल्कि प्रकृति और विज्ञान के बीच जुड़ने का रास्ता है।
इसी ज़रूरत को देखते हुए CSIR–National Botanical Research Institute (CSIR–NBRI), लखनऊ एक Certificate Course for Herbarium Technician शुरू कर रहा है। यह कोर्स उन छात्रों और युवाओं के लिए है जो पौधों के साथ काम करना चाहते हैं और विज्ञान के ज़रिए प्रकृति की रक्षा में योगदान देना चाहते हैं।
कब और कैसे होगा प्रशिक्षण?
यह नॉन-रेज़िडेंशियल कोर्स है, यानी रहने की व्यवस्था प्रतिभागियों को खुद करनी होगी।
कुल 20 सीटें हैं, इसका मतलब है कि हर प्रतिभागी को करीब से सीखने और विशेषज्ञों से सीधे मार्गदर्शन का मौका मिलेगा।
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इस कोर्स में क्या-क्या सीखेंगे?
- पौधों और अन्य वनस्पतियों के नमूने इकट्ठा करना
- उन्हें सही तरीके से तैयार और सुरक्षित रखना
- हर्बेरियम में रिकॉर्ड बनाना और सहेजना
- पुराने नमूनों का डिजिटाइज़ेशन
- हर्बेरियम का रख-रखाव
- इस प्रशिक्षण में शैवाल, काई, फर्न से लेकर बड़े पेड़-पौधों तक-लगभग सभी तरह की वनस्पतियाँ शामिल होंगी।
कौन कर सकता है आवेदन और कितना लगेगा शुल्क?
कोर्स शुल्क: ₹3,000
इंडस्ट्री से प्रायोजित उम्मीदवारों के लिए: ₹10,000
(इसमें ट्रेनिंग किट और काम के समय का भोजन शामिल है)
कौन देंगे प्रशिक्षण?
डॉ. के. एम. प्रभुकुमार (हर्बेरियम क्यूरेटर) और डॉ. मनीष एस. भोंयर (प्रमुख वैज्ञानिक)।
यानी सीखने का मौका सीधे उन लोगों से, जो वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
आज के समय में हर्बेरियम क्यों ज़रूरी है?
हर्बेरियम सिर्फ सूखे पौधे नहीं होते, बल्कि यह बताते हैं कि किसी इलाके में पहले कौन-से पौधे थे और अब क्या बदल गया है।
करियर के नए रास्ते
हर्बेरियम तकनीशियन बनकर आप कॉलेज और विश्वविद्यालय, वन विभाग, पर्यावरण संस्थान, म्यूज़ियम और बॉटैनिकल गार्डन, डिजिटल हर्बेरियम प्रोजेक्ट्स, में काम कर सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन को समझने में मदद
100 साल पुराने पौधों के नमूने आज के वैज्ञानिकों को बताते हैं कि मौसम, तापमान और बारिश में आए बदलावों का असर पौधों पर कैसे पड़ा।
सीमित सीटें, जल्दी करें
CSIR–NBRI का यह प्रमाणपत्र कोर्स उन लोगों के लिए एक बेहतरीन मौका है, जो किताबों से आगे जाकर हाथों से सीखना चाहते हैं और प्रकृति को समझकर उसकी रक्षा में भूमिका निभाना चाहते हैं। यह सिर्फ एक कोर्स नहीं, बल्कि प्रकृति और विज्ञान के बीच जुड़ने का रास्ता है।