Top

जानिए कैसे कर सकते हैं 'मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना' के लिए आवेदन

कोविड काल में अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों के लिए उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ ने 'मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना' की शुरूआत की है।

जानिए कैसे कर सकते हैं मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लिए आवेदन

कोविड महामारी के इस दौर में बहुत लोगों की जान चली गई, बहुत से बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया, ऐसे में इन बच्चों की जिम्मेदारी योगी सरकार ने ली है। ऐसे बच्चों के भविष्य को संभालने के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना शुरू की गई है।

यूपी सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना के जरिए बच्चों को तुरंत मदद पहुंचाना, उन्हें गलत लोगों के संगत में जाने से बचाना और अनाथ हुए बच्चों के भरण, पोषण, शिक्षा जैसी पूरी जिम्मेदारी निभायी जाएगी।

इसके अलावा इस योजना के माध्यम से लड़कियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। अगर बच्चे की उम्र 10 वर्ष से कम है और उनका कोई अभिभावक नहीं है उनको राजकीय बाल गृह में आवासीय सुविधा प्रदान की जाएगी। लड़कियों को भी अलग से आवासीय सुविधा प्रदान की जाएगी और वह सभी बच्चे जो स्कूल और कॉलेज में पढ़ रहे हैं उन्हें लैपटॉप/टेबलेट भी इस योजना के जरिए दिए जाएंगे।

कोविड से मृत्यु के साक्ष्य के लिए एंटीजन या आरटीपीसीआर की पॉजिटिव टेस्ट रिपोर्ट, ब्लड रिपोर्ट या सीटी स्कैन में कोविड-19 का इन्फेक्शन होना माना जा सकता है। इसके साथ ही कोविड मरीज की विभिन्न परिस्थितियों में टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी पोस्ट कोविड के चलते मौत होने पर भी बच्चों को सहायता दी जाएगी।

इन बच्चों को मिलेगा लाभ

उत्तर प्रदेश के मूल निवासी होने पर ही इस योजना का लाभ मिलेगा।

एक परिवार के सभी (जैविक तथा कानूनी रूप से गोद लिए गए) बच्चों को योजना का लाभ मिलेगा।

टास्क फोर्स करेगी बच्चों का चिन्हांकन

पात्र बच्चे के लीगल गार्जियन का चिन्हांकन जनपद स्तरीय टास्क फोर्स करेगी। इसके साथ ही जिला बाल संरक्षण इकाई व बाल कल्याण समिति भी इन बच्चों के समुचित विकास पर नजर रखेगी।

मिलेगी 4000 रुपए की आर्थिक सहायता

इस योजना के माध्यम से सभी पात्र लाभार्थियों को 4000 रूपए की आर्थिक सहायता हर महीने दी जाएगी। यह आर्थिक सहायता बच्चे की देखभाल के लिए होगी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यह आर्थिक सहायता बच्चे के वयस्क होने तक ही दी जाएगी। इसके अलावा सभी बच्चे जिनकी आयु 10 वर्ष या फिर उससे कम है और उनका कोई अभिभावक नहीं है उनको आवासीय सुविधा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह आवासीय सुविधा उनको राजकीय बाल गृह में आवास प्रदान करके प्रदान की जाएगी। जिससे की उन सभी बच्चों की देखभाल हो सके। उत्तर प्रदेश में इस समय लगभग 5 राजकीय बाल गृह है जो की मथुरा, लखनऊ, प्रयागराज, आगरा और रामपुर में स्थित है।

क्या हैं पात्रता की शर्तें

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जिन बच्चों को लाभ मिलना है, उनकी श्रेणी विभाग की ओर से तय कर दी गई है। इस योजना में शून्य से 18 साल के ऐसे बच्चे शामिल किए जाएंगे, जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु कोविड काल में हो गयी या माता-पिता में से एक की मृत्यु 1 मार्च 2020 से पहले हो गयी थी। दूसरे की मृत्यु कोविड काल में हो गयी अथवा दोनों की मौत 1 मार्च 2020 से पहले हो गयी थी और वैध संरक्षक की मृत्यु कोविड काल में हो गयी।

इसके अलावा शून्य से 18 साल के ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु कोविड काल में हो गयी हो और वह परिवार का मुख्य कर्ता हो और वर्तमान में जीवित माता या पिता सहित परिवार की आय दो लाख रुपये प्रतिवर्ष से अधिक न हो। ऐसे लोगों को भी योजना में शामिल किया गया है।

ऐसे कर सकते हैं मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लिए आवेदन

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना में आवेदन करने के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई व बाल कल्याण समिति द्वारा चिन्हांकन के 15 दिन के अंदर आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। निर्धारित प्रारूप को भरकर ऑफलाइन तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम विकास/पंचायत अधिकारी या विकास खंड या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय पर जमा करना होगा।

वहीं, शहरी क्षेत्रों में लेखपाल, तहसील या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में जमा किये जा सकते हैं। माता-पिता/माता या पिता की मृत्यु से दो वर्ष के भीतर आवेदन कर सकते हैं. वहीं, अप्रूवल की तिथि से इस योजना का लाभ मान्य होगा.

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

बच्चे एवं अभिभावक की नवीनतम फोटो सहित पूर्ण आवेदन

माता/पिता/दोनों स्थिति के अनुसार मृत्यु प्रमाण पत्र

कोविड-19 से मृत्यु का साक्ष्य

आय प्रमाण पत्र (माता-पिता दोनों की मृत्यु की स्थिति में जरूरी नहीं)

बच्चे का आयु प्रमाण पत्र

शिक्षण संस्थान में रजिस्ट्रेशन का प्रमाण पत्र

उत्तर प्रदेश का निवासी होने का घोषणा पत्र

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.