क्या आप जानते हैं, स्टेशन से पहले आउटर पर क्यों रोकी जाती हैं ट्रेनें ?

Mohit AsthanaMohit Asthana   4 Dec 2018 6:03 AM GMT

क्या आप जानते हैं, स्टेशन से पहले आउटर पर क्यों रोकी जाती हैं ट्रेनें ?प्रतीकात्मक तस्वीर।

#BaatPateKi ट्रेन जब स्टेशन पहुंचने से पहले आउटर पर रोक दी जाती है, और कई बार काफी देर तक खड़ी रहती है तो आपको गुस्सा आता होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों होता है ?

अक्सर ऐसा होता है कि ट्रेन जैसे ही स्टेशन पर पहुंचने वाली होती है वैसे ही ट्रेन को आउटर पर रोक दिया जाता है। कभी-कभी तो ट्रेन एक या दो घंटे या उससे ज्यादा समय तक भी खड़ी रहती है। कई बार तो स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि यात्री ड्राइवर से बहस तक करने लगते है। लेकिन ट्रेन को आउटर पर रोकने का जिम्मेदार ड्राइवर नहीं होता है। अगर सिग्नल लाल होगा तो ड्राइवर गाड़ी को बढ़ा ही नहीं सकता है। हम आपको बताते हैं कि आखिर ट्रेन को क्यों रोका जाता है आउटर पर...

निश्चित होते हैं प्लेटफार्म

भारतीय रेल का विस्तार बहुत बड़ा है जिसमें कुछ ट्रेनें छोटी होती है तो कुछ बड़ी। मतलब कुछ ट्रेन में डिब्बे कम होते हैं कुछ ट्रेनों में डिब्बे ज्यादा होते हैं हालांकि लम्बी दूरी की ट्रेनों में डिब्बे ज्यादा होते है। यही वजह है कि उन ट्रेनों के प्लेटफार्म निश्चित होते हैं। क्योंकि जरूरी नहीं कि सभी प्लेटफार्म की लम्बाई एक ही हो।

ट्रेन

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अगर ट्रेने सही समय पर चलें तो ट्रेनों को नहीं रोकना पड़ेगा आउटर पर

ट्रैक की कमी और ट्रेनों की बढ़ती संख्याओं की वजह से ज्यादातर ट्रेनें तय समय से विलम्ब हो जाती है। मान लीजिये 'ए' ट्रेन का प्लेटफार्म नंबर 1 है और 'बी' ट्रेन का प्लेटफार्म नंबर भी 1 ही है। अब दोनों ट्रेनों को एक ही प्लेटफार्म पर लेना है तो किसी एक को आउटर पर रोकना पड़ता है। लेकिन ज्यादातर ये प्रयास किया जाता है कि जो ट्रेन समय पर चल रही है उसे प्लेटफार्म पर ले लिया जाये या फिर वीआईपी ट्रेनों को पहले प्राथमिकता दी जाती है।

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नाम न छापने की शर्त पर रेलवे के अधिकारी ने बताया कि भारतीय रेल में अब सभी टेक्निकल सिस्टम को इलेक्ट्रानिक कर दिया गया है जिससे ट्रेनों का संचालन करने में आसानी रहती है। लेकिन कभी-कभी अगर एक तार भी कट गया तो उस समस्या को सही करने में कई घंटे भी लग जाते है। ये भी एक कारण हो जाता है ट्रेनों को आउटर पर रोकने का।

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