शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल छलांग: Budget 2026 में ABGC लैब्स और छात्राओं के लिए नई सुविधा
Manvendra Singh | Feb 01, 2026, 14:08 IST
Budget 2026 Highlights: केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने शिक्षा और कौशल विकास को लेकर दो बड़े और अहम ऐलान किए हैं। पहला, देशभर में ABGC (Animation, Visual Effects, Gaming और Comics) कंटेंट क्रिएटर लैब शुरू करने की योजना और दूसरा, हर जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए गर्ल्स हॉस्टल बनाने का फैसला। ये दोनों घोषणाएं इस बात का संकेत हैं कि सरकार अब शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे रोजगार, तकनीक और समान अवसरों से जोड़ना चाहती है।
India Budget 2026 Updates: अगर हम पीछे देखें, तो पिछले कुछ बजटों में डिजिटल स्किल्स और छात्राओं की शिक्षा को लेकर प्रयास जरूर हुए थे, लेकिन वे बिखरे हुए थे। बजट 2024 में डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया और ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म को मजबूत करने पर जोर दिया गया था। वहीं बजट 2025 में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत कौशल आधारित शिक्षा, कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की बात हुई। लेकिन स्कूल और कॉलेज स्तर पर क्रिएटिव कंटेंट, गेमिंग और एनीमेशन के लिए कोई राष्ट्रीय स्तर की लैब योजना नहीं थी। इसी तरह, छात्राओं के लिए हॉस्टल निर्माण की योजनाएं अलग-अलग मंत्रालयों और राज्यों तक सीमित थीं, हर जिले के स्तर पर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं था।
बजट 2026 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब सरकार ने इन दोनों क्षेत्रों में सीधा और बड़े पैमाने पर निवेश करने का फैसला किया है। ABGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स को IIT मुंबई की मदद से देश के 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में स्थापित किया जाएगा। इन लैब्स में छात्र डिजिटल कंटेंट बनाना, गेम डिजाइन करना, एनीमेशन और नई तकनीकों से जुड़ी स्किल्स सीख सकेंगे। इसका मतलब है कि बच्चों को स्कूल स्तर से ही क्रिएटिव और डिजिटल इंडस्ट्री के लिए तैयार किया जाएगा।
इस योजना का असर सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। भारत का एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अब तक इस क्षेत्र में प्रशिक्षित मैनपावर की कमी रही है। ABGC लैब्स से छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जिससे आगे चलकर रोजगार और स्टार्टअप के नए अवसर बनेंगे। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ को भी मजबूती मिलेगी।
दूसरी ओर, हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने की घोषणा छात्राओं के लिए बेहद अहम है। कई लड़कियां सिर्फ इसलिए उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं क्योंकि उनके जिले में सुरक्षित और किफायती रहने की सुविधा नहीं होती। इस फैसले से छात्राओं को नजदीकी जिलों में पढ़ाई का मौका मिलेगा, ड्रॉपआउट दर कम होगी और महिला शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम शिक्षा में समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, बजट 2026 में ABGC कंटेंट क्रिएटर लैब और गर्ल्स हॉस्टल की घोषणाएं यह दिखाती हैं कि सरकार अब शिक्षा को डिजिटल कौशल, रोजगार और सामाजिक समानता से जोड़कर देख रही है। अगर इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत की शिक्षा व्यवस्था ज्यादा आधुनिक, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार नजर आएगी।
बजट 2026 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब सरकार ने इन दोनों क्षेत्रों में सीधा और बड़े पैमाने पर निवेश करने का फैसला किया है। ABGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स को IIT मुंबई की मदद से देश के 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में स्थापित किया जाएगा। इन लैब्स में छात्र डिजिटल कंटेंट बनाना, गेम डिजाइन करना, एनीमेशन और नई तकनीकों से जुड़ी स्किल्स सीख सकेंगे। इसका मतलब है कि बच्चों को स्कूल स्तर से ही क्रिएटिव और डिजिटल इंडस्ट्री के लिए तैयार किया जाएगा।
इस योजना का असर सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। भारत का एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अब तक इस क्षेत्र में प्रशिक्षित मैनपावर की कमी रही है। ABGC लैब्स से छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जिससे आगे चलकर रोजगार और स्टार्टअप के नए अवसर बनेंगे। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ को भी मजबूती मिलेगी।
दूसरी ओर, हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने की घोषणा छात्राओं के लिए बेहद अहम है। कई लड़कियां सिर्फ इसलिए उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं क्योंकि उनके जिले में सुरक्षित और किफायती रहने की सुविधा नहीं होती। इस फैसले से छात्राओं को नजदीकी जिलों में पढ़ाई का मौका मिलेगा, ड्रॉपआउट दर कम होगी और महिला शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम शिक्षा में समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, बजट 2026 में ABGC कंटेंट क्रिएटर लैब और गर्ल्स हॉस्टल की घोषणाएं यह दिखाती हैं कि सरकार अब शिक्षा को डिजिटल कौशल, रोजगार और सामाजिक समानता से जोड़कर देख रही है। अगर इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत की शिक्षा व्यवस्था ज्यादा आधुनिक, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार नजर आएगी।