Budget 2026: 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास से मत्स्य पालन को नई रफ्तार
Divendra Singh | Feb 01, 2026, 12:38 IST
Union Budget 2026 Live News Updates: बजट 2026 में वित्त मंत्री ने मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की घोषणा की है।
बजट 2026 में सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए एक अहम पहल की घोषणा की है। इसके तहत देशभर में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास का रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पानी के संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए मछली उत्पादन बढ़ाना, ग्रामीण रोजगार सृजित करना और किसानों व मछुआरों की आय में स्थायी बढ़ोतरी करना है।
भारत में हजारों जलाशय और तालाब मौजूद हैं, लेकिन इनका बड़ा हिस्सा अभी तक पूरी क्षमता के अनुसार उपयोग में नहीं आ पा रहा है। कहीं वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन नहीं हो रहा, तो कहीं बुनियादी ढांचे की कमी के कारण उत्पादन सीमित रह जाता है। नई बजट योजना के तहत इन जलाशयों और अमृत सरोवरों को केवल पानी के भंडारण स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एकीकृत मत्स्य उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका मतलब है कि इन जल स्रोतों में मछली पालन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, बीज उत्पादन, फीड सप्लाई, कोल्ड चेन और मार्केट लिंकिंग जैसी सुविधाओं को एक साथ जोड़ा जाएगा।
सरकार का फोकस इस पहल के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी है। जलाशयों के आसपास रहने वाले छोटे किसान, भूमिहीन मजदूर और पारंपरिक मछुआरा समुदाय इस योजना से सीधे लाभान्वित होंगे। जब स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ेगा, तो रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन पर भी असर पड़ेगा। इसके साथ ही महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को भी मत्स्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जोड़ने की योजना है, जिससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी हो सके।
भारत में हजारों जलाशय और तालाब मौजूद हैं, लेकिन इनका बड़ा हिस्सा अभी तक पूरी क्षमता के अनुसार उपयोग में नहीं आ पा रहा है। कहीं वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन नहीं हो रहा, तो कहीं बुनियादी ढांचे की कमी के कारण उत्पादन सीमित रह जाता है। नई बजट योजना के तहत इन जलाशयों और अमृत सरोवरों को केवल पानी के भंडारण स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एकीकृत मत्स्य उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका मतलब है कि इन जल स्रोतों में मछली पालन, जल गुणवत्ता प्रबंधन, बीज उत्पादन, फीड सप्लाई, कोल्ड चेन और मार्केट लिंकिंग जैसी सुविधाओं को एक साथ जोड़ा जाएगा।
सरकार का फोकस इस पहल के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी है। जलाशयों के आसपास रहने वाले छोटे किसान, भूमिहीन मजदूर और पारंपरिक मछुआरा समुदाय इस योजना से सीधे लाभान्वित होंगे। जब स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ेगा, तो रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन पर भी असर पड़ेगा। इसके साथ ही महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को भी मत्स्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जोड़ने की योजना है, जिससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी हो सके।