विधायक दल ने योगी आदित्यनाथ को चुना मुख्यमंत्री, प्रदेश में पहली बार बनेंगे दो उप मुख्यमंत्री

विधायक दल ने योगी आदित्यनाथ को चुना मुख्यमंत्री, प्रदेश में पहली बार बनेंगे दो उप मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री चुने के बाद प्रसन्न मुद्रा में योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद माैर्य, दिनेश शर्मा और वेंकैया नायडु। 

लखनऊ (भाषा)। भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डाक्टर दिनेश शर्मा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। भाजपा विधायक दल की बैठक में आज उनके नाम का ऐलान हुआ। भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने बताया कि योगी आदित्यनाथ को सर्वसम्मति से प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और लखनऊ के मेयर डाक्टर दिनेश शर्मा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।

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ऐसा पहली बार हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री बनाये गये हैं। प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री के ऐलान को लेकर करीब एक हफ्ते का इंतजार आज शाम खत्म हो गया और विधायक दल की बैठक में आदित्यनाथ को अप्रत्याशित रूप से प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया। गोरक्षापीठाधीश्वर आदित्यनाथ की छवि कट्टर हिन्दुत्ववादी नेता की है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने बताया कि योगी ने बैठक में आग्रह किया था कि उन्हें दो और सहयोगी दिए जाएं।

योगी आदित्यनाथ।

उप मुख्यमंत्री बनने के बाद मौर्य ने कहा कि वह भाजपा के सभी विधायकों का आभार प्रकट करते हैं। प्रदेश में सभी वर्गों के विकास के लिये काम किया जाएगा। आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में भाजपा के चौथे और कुल 21वें मुख्यमंत्री होंगे। इससे पहले कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता तथा राजनाथ सिंह प्रदेश की भाजपा सरकारों में मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इनमें से कल्याण सिंह दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं।

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इसके पूर्व, भाजपा राज्य मुख्यालय में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। इनमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य, योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ कल्याण सिंह के भी समर्थक शामिल थे। इस बीच, राज्य के मुख्य विपक्षी दल सपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल ने कहा कि उनकी पार्टी छह महीने तक प्रदेश की भाजपा सरकार का कामकाज देखेगी। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र ने योगी आदित्यनाथ के जरिए प्रदेश में साम्प्रदायिकता फैलाने की कोशिश की तो हम छह महीने का समय नहीं देखेंगे। प्रदेश में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखना सपा का संकल्प है, इसके लिये हम कुछ भी कुर्बानी देंगे।

इस बीच, आदित्यनाथ के पिता आनन्द सिंह ने अपने पुत्र के मुख्यमंत्री बनाये जाने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ सबका विकास' की तर्ज पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी समस्या गुंडागर्दी है. उसे खत्म करना होगा। उम्मीद है कि आदित्यनाथ ऐसे तत्वों के खिलाफ कठोर निर्णय लेंगे। इतिहास पर नजर डालें तो कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने 24 जून 1991 से छह दिसम्बर 1992 तक सरकार चलायी। वह राम मंदिर आंदोलन के दौरान पहली बार बहुमत पायी भाजपा की सरकार थी, मगर अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाये जाने के बाद उनकी सरकार बर्खास्त कर दी गयी थी। उसके बाद वह 21 सितम्बर 1997 से 12 नवम्बर 1999 तक इस पद पर रहे।

राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के बाद राम प्रकाश गुप्ता कल्याण सिंह के स्थान पर प्रदेश की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री बने। हालांकि वह भी करीब छह महीने ही इस पद पर रहे। उनके बाद भाजपा सरकार के बाकी के कार्यकाल में राजनाथ सिंह करीब एक साल चार महीने तक मुख्यमंत्री रहे। हालांकि भाजपा का कोई भी मुख्यमंत्री पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है. इसमें कल्याण सिंह ने अपने दूसरे कार्यकाल में सबसे ज्यादा करीब दो साल दो महीने सरकार चलायी। इसके अलावा राम प्रकाश गुप्ता 351 दिन और राजनाथ सिंह एक साल और करीब चार महीने तक मुख्यमंत्री रहे।

प्रदेश में अब तक सिर्फ अखिलेश यादव ही मुख्यमंत्री के तौर पर पांच साल का कार्यकाल पूरा कर सके हैं. बहरहाल, इस बार भाजपा ने पहली बार तीन चौथाई बहुमत हासिल किया है और माना जा रहा है कि इस सरकार का मुख्यमंत्री पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाला भाजपा का पहला मुख्यमंत्री होगा।

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