अदालत ने मांगा जवाब: आदेश के बावजूद खाने वाले तंबाकू पर बैन नहीं

अदालत ने मांगा जवाब: आदेश के बावजूद खाने वाले तंबाकू पर बैन नहींदिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में गुटखा और खाने वाली तंबाकू के उत्पादों पर प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने के संबंध में आप सरकार से जवाब मांगा है।

नई दिल्ली (भाषा)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में गुटखा और खाने वाली तंबाकू के उत्पादों पर प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने के संबंध में आप सरकार से जवाब मांगा है।

उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायाधीश संगीता धींगरा की पीठ ने दिल्ली सरकार के साथ ही संबंधित एजेंसियों को नोटिस भेज कर यह बताने को कहा है कि इस संबंध में परिपत्र जारी होने के बाद भी प्रतिबंध को लागू क्यों नहीं किया गया।

पीठ ने कहा, ‘आप (दिल्ली सरकार और एजेंसियां) याचिका के तथ्यों पर जवाबी हलफनामा दाखिल करें और इस मुद्दे से जुड़े सभी रिकॉर्ड पेश करें।’ इसके साथ ही पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो मई की तिथि निर्धारित की है।

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ को सूचित किया गया कि मामला एकल न्यायाधीश के समक्ष विचाराधीन है जिन्होंने अंतरिम आदेश के जरिए दिल्ली सरकार पर तंबाकू विक्रेता और उत्पादकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी। जिस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि एकल न्यायाधीश के समक्ष जो मुद्दा विचाराधीन है वह तंबाकू का है न कि खाने वाली तंबाकू के उत्पादों का, इसलिए अदालत को इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए।

एनजीओ की तरफ से दाखिल की गई थी याचिका

इस सूचना के बाद पीठ ने दिल्ली सरकार को संबंधित सभी सूचनाओं को पेश करने और हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए। न्यायालय एक एनजीओ फरियाद फाउंडेशन की ओर से दाखिल जनहित याचिना पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कहा गया था कि दिल्ली सरकार ने गुटखा और खाने वाली तंबाकू के उत्पादों की बिक्री, आपूर्ति और उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन इसे कड़ाई से लागू नहीं किया गया है। याचिका में कहा गया है कि, खाने वाली तंबाकू जैसे खैनी, गुटका और जर्दा में कैंसरकारी तत्व है जो मुंह के कैंसर का सबसे मुख्य कारण है।

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