ग्राउंड रिपोर्ट: पिछले 122 सालों में सबसे विनाशकारी बाढ़, उत्तर-पूर्वी बांग्लादेश में बाढ़ की दूसरी लहर से 40 लाख से ज्यादा प्रभावित

बाढ़ आना बांग्लादेश के लिए कोई नई बात नहीं है। लगभग हर साल मानसून के मौसम में देश का ये हिस्सा इस स्थिति से दो-चार होता नजर आता है। हालांकि इस साल औसत से ज्यादा हुई बारिश ने मई के महीने में, समय से पहले ही विनाशकारी बाढ़ से सामना करा दिया। लगभग दो महीने हो गए हैं, देश के उत्तर और उत्तरपूर्वी क्षेत्र अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। बाढ़ के पानी ने लाखों घर बहा दिए और सैकड़ों हजार हेक्टेयर खेतों को जलमग्न कर दिया। बाढ़ प्रभावित सिलहट इलाके से ग्राउंड रिपोर्ट।

Rafiqul Islam MontuRafiqul Islam Montu   6 July 2022 11:41 AM GMT

ग्राउंड रिपोर्ट: पिछले 122 सालों में सबसे विनाशकारी बाढ़,  उत्तर-पूर्वी बांग्लादेश में बाढ़ की दूसरी लहर से 40 लाख से ज्यादा प्रभावित

बांग्लादेश के सिलहट-सुनमगंज में लोग करीब दो हफ्ते से बाढ़ के पानी से जूझ रहे हैं। सभी फोटो: Rafiqul Islam Montu

फेंचुगंज (सिलहट), बांग्लादेश। बाढ़ ने एक बार फिर बांग्लादेश को प्रभावित किया है। यहां 70 लाख से ज्यादा लोगों को खाद्य आपूर्ति, आश्रय और बाढ़ राहत की तत्काल जरूरत है। देश का उत्तर-पूर्वी डेल्टा क्षेत्र, खासतौर पर सिलहट, सबसे बुरी तरह प्रभावित है। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें याद नहीं कि कभी इससे पहले उन्होंने ऐसी विनाशकारी बाढ़ देखी हो।

देश इस साल मई से बाढ़ की चपेट में है और अब जब बाढ़ की दूसरी लहर भी आ गई है तो लाखों लोगों को मदद की सख्त जरूरत है।

उत्तर कुशियारा यूनियन के सोनापुर गाँव के रहने वाले 72 वर्षीय नियाज अली ने कहा कि उनके घर के अंदर अभी भी करीब चार फीट पानी भरा है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, "पिछले साल इस समय गांव के खेतों में फसल लहलहा रही थी। लेकिन इस साल कुछ भी नहीं है।"

उत्तर कुशियारा संघ में लगभग 43,000 लोग रहते हैं और उनमें से लगभग सभी ने बाढ़ में अपने घरों को खो दिया है। रेड क्रॉस ने बाढ़ से प्रभावित लोगों का आंकड़ा 70 लाख बताया है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ की वजह से कम से कम 101 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है।

नियाज अली के घर में अभी भी करीब चार फीट पानी भरा हुआ है।

आपदा प्रबंधन और राहत राज्य मंत्री मोहम्मद इनामुर रहमान ने कहा, "सिलहट-सुनमगंज में पिछले 122 सालों में ऐसी बाढ़ नहीं आई है।"

बाढ़ आना बांग्लादेश के लिए कोई नई बात नहीं है। लगभग हर साल मानसून के मौसम में देश का ये हिस्सा इस स्थिति से दो-चार होता नजर आता है। हालांकि इस साल औसत से ज्यादा हुई बारिश ने मई के महीने में, समय से पहले ही विनाशकारी बाढ़ से सामना करा दिया। लगभग दो महीने हो गए हैं, देश के उत्तर और उत्तरपूर्वी क्षेत्र अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। बाढ़ के पानी ने लाखों घर बहा दिए और सैकड़ों हजार हेक्टेयर खेतों को जलमग्न कर दिया।

सिलहट के फेंचुगंज उपजिला में उत्तर कुशियारा माध्यमिक स्कूल में अब कक्षाएं नहीं चल रही हैं। इसके बजाय यह अब दो हफ्ते के लिए हसीना बेगम, उनकी बहन बचिना बेगम और कई अन्य बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए एक आश्रय स्थल बन गया है। अस्थायी बिस्तर बनाने के लिए स्कूल की बेंचों को एक साथ जोड़कर रखा गया है। कई लोग फर्श पर सोते हैं। स्कूल के मैदान में भरे बाढ़ के पानी का इस्तेमाल महिलाएं और बच्चे बर्तन धोने के लिए कर रहे हैं।

स्कूलों को लोगों के रहने के लिए ठिकाना बनाया गया है।

दो मंजिला स्कूल की इमारत की हर क्लास में लोगों ने शरण ले रखी है। उनकी गायें, बकरियां और भेड़ें स्कूल के नीचे तल के बरामदे में रहती हैं।

बांग्लादेश जल विकास बोर्ड के अंतर्गत बाढ़ पूर्वानुमान एवं चेतावनी केंद्र के कार्यकारी अभियंता अरिफुज्जमां भुइयां ने गाँव कनेक्शन को बताया, "इस साल मानसून के मौसम से पहले भी अप्रैल और मई में भारी बारिश हुई थी। यही कारण है कि नदियों में पानी का स्तर पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रहा था और जब फिर से भारी बारिश हुई तो कुछ ही समय में बाढ़ की स्थिति खराब हो गई।"

'... याद नहीं, पहले अपने जीवन में कभी इतनी विनाशकारी बाढ़ देखी हो '

हालांकि बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में बाढ़ आना असामान्य नहीं है। लेकिन इस बार की ये बाढ़ लोगों के जीवन की सबसे विनाशकारी बाढ़ में से एक बन गई है। बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी केंद्र के अनुसार, सिलहट डिवीजन ने बाढ़ के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ऊपरी इलाकों से आई बाढ़ के दूसरे चरण में अधिकांश क्षेत्र जलमग्न हो गया। सुनामगंज देश के बाकी हिस्सों से अलग-थलग था और बाढ़ के दो सप्ताह बाद भी कई गांव देश के बाकी हिस्सों से कटे हुए हैं।

सिलहट के फेंचुगंज उपजिला के खिलपारा गांव के 43 साल के अब्दुल्ला मिया ने गाँव कनेक्शन को बताया, "हमने पहले कभी ऐसी बाढ़ का सामना नहीं किया है। जीवन में पहली बार मुझे घर छोड़कर आश्रय में आने के लिए मजबूर होना पड़ा।" .

एक बड़ी आबादी इस समय बाढ़ की त्रासदी को झेल रही है।

बाढ़ ने जीवन, आजीविका और संपत्ति को नष्ट कर दिया है। सिलहट के दक्षिण सूरमा उपजिला के मोघला बाजार की 38 साल की शैली बेगम ने कहा, "मैं और मेरे पति हाजीगंज प्राइमरी स्कूल में शरण लिए हुए हैं। हमारे घर में बाढ़ का पानी अभी भी कम नहीं हुआ है।" उनके पति मोइनुद्दीन मिया एक दिहाड़ी मजदूर हैं और जब से बाढ़ आई है, उन्होंने कुछ भी नहीं कमाया है।

मानो बाढ़ की पहली लहर लाखों लोगों को उजाड़ने के लिए काफी नहीं थी। जून के अंत में बाढ़ की दूसरी लहर ने पहले से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए और अधिक दुख-तकलीफें ला खड़ी कीं।

अरिफुज्जमां गांव कनेक्शन को बताया, "सिलहट में पिछली बाढ़ मुख्य रूप से होर क्षेत्र (उत्तर पूर्वी बांग्लादेश में एक आर्द्रभूमि-प्रणाली) और उसके आस-पास के क्षेत्रों तक ही सीमित थी। लेकिन इस बार गांव, कस्बे और ऊंचे इलाके भी पानी के नीचे चले गए हैं।"

18 जून को सिलहट के डिविजलन कमिशनर मुहम्मद मुशर्रफ हुसैन ने बताया कि सिलहट और सुनामगंज में बाढ़ से 40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। हालांकि, तब से बाढ़ का पानी देश के उत्तरी हिस्से के 16 जिलों में फैल चुका है। इसने और भी ज्यादा लोगों को प्रभावित किया हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान सिलहट, सुनामगंज और नेत्रकोना तीन जिलों को पहुंचा हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी तक प्रभावितों की संख्या तय नहीं की है।

मैप: बांग्लादेश में बाढ़ की स्थिति

सिलहट शहर की रहने वाली मजीदा बेगम ने पहले कभी ऐसी बाढ़ का सामना नहीं किया था। लेकिन इस साल वह खुद को बचाने के लिए एक आश्रय में जाने को मजबूर हो गई है। और वो भी एक बार नहीं, दो बार। सिलहट शहर के रहने वाले मंसूर अली और सैयद इमरान हुसैन के साथ भी यही कहानी थी।

मंसूर अली रोजी-रोटी के लिए रिक्शे की मरम्मत करने का काम करते हैं। वह 30 साल पहले रोजी-रोटी की तलाश में वह सिलहट आया था। अली ने गांव कनेक्शन को बताया, "मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि शहर बाढ़ से इतना प्रभावित होगा। हम तो अब डर लगता हैं।"

सोनाताला गांव की 40 वर्षीय पाखी मिया ने कहा, "पिछले कुछ सालों में हमारे संघर्ष बढ़ गए हैं। पहले की तुलना में गर्मी के महीनों में बहुत अधिक गर्मी पड़ रही है। और अब ये बाढ़ कुछ ऐसी है जिसे हमने पहले कभी नहीं देखा है।"

भारत के मेघालय के चेरापूंजी में रिकॉर्ड तोड़ भारी बारिश ने बांग्लादेश में अभूतपूर्व बाढ़ ला दी है। बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के बाढ़ और जल प्रबंधन संस्थान के प्रोफेसर सैफुल इस्लाम ने गांव कनेक्शन को बताया, "चेरापूंजी और बांग्लादेश सीमा के बीच की दूरी 25 किलोमीटर से कम है। पहाड़ों से निकलकर बाढ़ बांग्लादेश के मैदानी इलाकों में आ गई है।"

मैप: बांग्लादेश में बाढ़ की स्थिति

राहत कार्य जारी

बाढ़ से प्रभावित लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बाढ़ प्रभावित सिलहट-सुनामगंज क्षेत्र में सरकारी व गैर सरकारी संगठनों की ओर से आपात राहत सहायता मुहैया कराई जा रही है। बांग्लादेश की सेना राहत कार्यों में लगी हुई है।

हाओर बचाओ आंदोलन के केंद्रीय अध्यक्ष अबू सुफियान ने गाँव कनेक्शन को बताया, "कई लोग दूर-दराज के इलाकों में फंसे हुए हैं। राशन आदि का वितरण केवल मुख्य सड़क के किनारे वाले इलाकों में ही किया जा रहा है।" कई लोगों ने राहत वितरण में तालमेल नहीं होने की शिकायत की है। उनका कहना है कि हाशिए पर पड़े पीड़ितों को कम राहत मिल रही है। केवल आपातकालीन खाद्य सहायता प्रदान की जा रही है। बाढ़ के बाद पुनर्वास की कोई पहल नहीं है। प्रभावित लोगों की घर वापसी के लिए तत्काल पुनर्वास के उपाय किए जाने चाहिए।

बाढ़ से प्रभावित लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बाढ़ प्रभावित सिलहट-सुनामगंज क्षेत्र में सरकारी व गैर सरकारी संगठनों की ओर से आपात राहत सहायता मुहैया कराई जा रही है। बांग्लादेश की सेना राहत कार्यों में लगी हुई है।

पुनर्वास एक मुश्किल काम बनने जा रहा है। जहां कुछ लोग अपने घरों को लौट गए हैं, वहीं कुछ के पास लौटने के लिए कोई घर नहीं है। क्योंकि बाढ़ का पानी उनके घरों को अपने साथ बहा ले गया है।

सुनामगंज के एक स्थानीय नागरिक समाज के नेता हुसैन तौफीक चौधरी ने गांव कनेक्शन को बताया, "भोजन और आश्रय सबसे प्रमुख चिंताएं हैं। पुनर्वास के काम को बढ़ाना होगा।"

उत्तर कुशियारा संघ के अध्यक्ष अहमद जीलू के अनुसार, "हमने बाढ़ से प्रभावित लोगों को आपातकालीन भोजन उपलब्ध कराया है। लेकिन बाढ़ का पानी कम होने के बाद, उन्हें शुरु से शुरु करना होगा। उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत है।"

बांग्लादेश में नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल के कंट्री डायरेक्टर वेंडी मैककेन्स ने कहा कि लगभग 80 प्रतिशत सिलहट पानी के नीचे है, स्कूल अनिश्चित काल के लिए बंद हैं और हजारों लोग सूखी जमीन की तलाश में अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर हैं" उन्होंने अपील करते हुए कहा, "हमें लोगों को इस संकट से निकलने के लिए तत्काल फंडिग की जरूरत है. हम लोगों की मदद करने के लिए स्थानीय भागीदारों और अधिकारियों के साथ काम कर सकते हैं।"

जलवायु संकट

एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ सस्टेनेबल इंजीनियरिंग एंड बिल्ट एनवायरनमेंट में शोधकर्ता और सहायक संकाय रशीद चौधरी ने कहा, "ला नीना (जो सितंबर 2020 से मई 2022 तक शुरू हुई) की वजह से गंगा और ब्रह्मपुत्र घाटियों में अधिक वर्षा हुई, जो बाढ़ का कारण बनी। बांग्लादेश में ला नीना की सक्रियता और बाढ़ के बीच सीधा संबंध है।"

ला नीना एक महासागर-वायुमंडलीय घटना है जो आमतौर पर वैश्विक तापमान को नीचे लाती है। ला नीना घटना के दौरान, पूर्वी और मध्य प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के औसत तापमान से अधिक ठंडा रहता है, जिसके कारण हवा के दबाव में अंतर के कारण समुद्र की सतह के ऊपर की व्यापारिक हवाओं (ट्रेड विंड्स) का रुख बदल जाता है। ऐसी संभावना है कि वर्तमान ला नीना दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम, 2022 की सर्दी और 2023 की शुरुआत में भी जारी रह सकता है। ला नीना अक्सर भारतीय उपमहाद्वीप क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ से जुड़ा होता है।


बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के इस्लाम ने समझाया, "नदियों में गाद जम रही है और होरों में अनियोजित निर्माण हो रहा है। ये सब नदी के प्रवाह में बाधा डाल रहा है।" उन्होंने कहा, "नदियों ने अपनी नौवहन क्षमता खो दी है, और पानी का प्रवाह धीमा हो गया है। इसकी वजह से चेरापूंजी में भारी बारिश के साथ बाढ़ आ गई है।"

पिछले साल अगस्त में, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की आकलन रिपोर्ट में कहा गया था कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से 11 देशों में वर्षा, चक्रवात, ज्वार-भाटा और बाढ़ बढ़ेगी, जिनमें से एक बांग्लादेश भी है।

सिलहट में शाहजलाल यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में शहरी और पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने चेतावनी देते हुए कहा, "सिलहट की सूरमा और साड़ी नदियों की लंबाई, चौड़ाई और गहराई को वैज्ञानिक और विधि पूर्वक खुदाई करके बढ़ाया जाना चाहिए। सिलहट में पहाड़ियों की अंधाधुंध कटाई और तालाबों को भरने पर भी रोक लगनी चाहिए।" उन्होंने गांव कनेक्शन को बताया, "सिलहट को बाढ़ से बचाने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं को अपनाने की जरूरत है।"

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