30 साल भारत की सेवा करने के बाद क्या कबाड़ के भाव बिक जाएगा 13 मंजिला जंगी जहाज ‘आईएनएस विराट’?

30 साल भारत की सेवा करने के बाद क्या कबाड़ के भाव बिक जाएगा 13 मंजिला जंगी जहाज ‘आईएनएस विराट’?भारत का सबसे पुराना विमान वाहक।

सुदीप कुमार सिंह

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के सबसे पुराने जंगी जहाज, आईएनएस विराट पर कबाड़ में बिके जाने का खतरा मंडरा रहा है। अपने 58 साल पुराना गौरवशाली आईएनएस विराट की रिटायरमेंट का दिन 6 मार्च तय किया गया है। हालाँकि इसको म्यूजियम में तब्दील करने के प्रस्ताव पर अब तक कोई फैसला नहीं आया है। इस जंगी बेड़े ने भारत की सेवा में अपने 30 साल दिए है और साथ ही 27 सालों तक इसने रॉयल ब्रिटिश आर्मी के लिए भी खुद को समर्पित किया है।

दरअसल, 13 मंजील वाले इस जंगी जहाज को आंध्र प्रदेश सरकार एक म्यूजियम में तब्दील करने के लिए लेना चाह रही थी लेकिन ऐसा करने पर उन्हें 1000 करोड़ तक का खर्चा आएगा। इसे पूरा करने के लिए आंध्र सरकार ने रक्षा मंत्रालय से इसका आधा खर्च देने की मांग की। इस पर रक्षा मंत्रालय का कहना है कि वह इसके लिए सलाह और टेक्निकल मदद मुहैया करा सकता है, लेकिन प्रोजेक्ट पर मोटा पैसा खर्च नहीं कर सकता।

आईएनएस विराट से जुडी कुछ बातें...

आईएनएस विराट भारतीय नौसेना के साथ सेवारत अंतिम ब्रिटिश निर्मित जहाज है, वह दुनिया में सेवा में सबसे पुराना विमान वाहक है। 1959 में रॉयल नौसेना में एचएमएस हेमीज़ जहाज के रूप में पूरा और कमीशन किया गया था। 1984 में इसे रॉयल नौसेना से डीकमीशन कर दिया गया जिसके बाद इसे 1987 में भारत को बेच दिया गया। उसी साल 12 मई को आईएनएस विराट को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया, जो 27 सालों तक देश की सेवे में कार्यरत रहा।

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जुलाई 1999 और अप्रैल 2001 के बीच, जहाज में उन्नत प्रणाली जैसे आपातकालीन अलर्ट सेंसर और आधुनिक संचार प्रणाली की शुरुआत करने के लिए उपयुक्त मरम्मत कर उसकी सेवा को 2010 तक विस्तार करने लायक बनाया गया। 2 नवम्बर 2012 में जहाज को मरम्मत के लिए कोच्चि ले आया गया था। विराट को मुंबई के लिए रवाना किया गया था जहाँ उसमे नयी और बेहतर मशीनरी लगायी जा सके और उसे 2013 में दोबारा से शामिल किया गया। यह उसके डीकमीशनिंग होने से पहले अंतिम मुख्य मरम्मत थी।

2013 तक, विराट के रखरखाव की लागत को देखते हुए नौसेना ने उसकी डीकमीशनिंग के लिए रक्षा मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। दिसंबर 2014 में, एक समीक्षा बोर्ड को स्थापित किया गया जिसे जहाज की निरंतर सेवा जीवन का निर्धारण करने के कार्य सौंपा गया। जुलाई 2015 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, चंद्रबाबू नायडू ने एक संग्रहालय के रूप में जहाज को स्थापित करने के लिए उसे 20 करोड़ (यूएस $ 3 मिलियन) की लागत पर खरीदने की मांग की, जिसकी पुष्टि उन्होंने 8 फरवरी 2016 को की. हालाँकि अप्रैल 2016 में ये प्रस्ताव निरस्त हो गया।

23 जुलाई 2016, विराट आखरी बार खुद की भाप से मुंबई से कोच्चि के लिए रवाना हुआ। आईएनएस विराट ने अब तक समुद्र में 2,250 दिनों और 10,94,215 की.मी का सफ़र तय कर चुका है। कोच्चि में उसे डीकमीशनिंग के लिए तैयार किया गया जिस दौरान उसके बॉयलर, इंजन, प्रोपेलर और पतवार हटाए गए। मरम्मत 4 सितंबर को पूरा हो गया था। विराट को उसकी औपचारिक डीकमीशनिंग समारोह के लिए 23 अक्टूबर को वापस मुंबई लाया गया था।

नेवी आईएनएस विराट के समृद्धशाली इतिहास को संजो कर रखने चाहती है। वह नहीं चाहती कि इसका भी हश्र भारत के पहले एयरक्राफ्ट करियर आईएनएस विक्रांत के जैसा हो। आईएनएस विक्रांत को भी डीकमीशन कर दिया गया था जिसके बाद उसका लोहा बजाज आँटो कंपनी ने खरीद लिया था। इसके बाद उसने इसके लोहे से बजाज वी15 बाइक बनाई थी।

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