भारत बंद: राकेश टिकैत बोले- मुठ्ठी भर किसानों का आंदोलन बताने वाले आंख खोलकर देंख लें, कृषि कानूनों और MSP पर सरकार को अल्टीमेटम

कृषि कानूनों को वापस लेने, एमएमपी पर कानून बनाने समेत कई मांगों को लेकर एक बार फिर किसान सड़क पर उतरे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद को कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है।

किसानों के भारत बंद का देश के कई राज्यों में असर देखा गया। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, एनसीआर में खासा असर रहा। इसके अलावा महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक आदि भी किसान और किसान समर्थक सड़कों पर उतरे। देश के कई राज्यों में हाईवे पर रेलवे ट्रैक पर किसान संगठनों और ट्रेड यूनियन ने जाम लगाया। कई राजनीतिक दलों ने भी भारत बंद को अपना समर्थन दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने शांतिपूर्ण भारत बंद के लिए किसानों, संगठनों और नागरिकों का आभार जताया है।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, "संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के अह्वान पर देशभर में भारत बंद को अभूतपूर्व समर्थन मिला है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक बंद का पूरा असर रहा है। शाम 4 बजे तक कहीं कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। इसके लिए नागरिकों और किसानों का आभार व्यक्त करता हूं।" इससे पहले टिकैत ने कहा था कि नागरिकों को हो रही परेशानी के लिए हम क्षमा चाहते हैं, लेकिन किसान 10ै। महीने से झेल रहे हैं, तमाम परेशानियां,किसानों द्वारा आक्समिक वाहनों को निकलवाने व यात्रियों हेतु पानी चाय दूध के बेहतर इंतजाम किए गए हैं।"

टिकैत ने कहा, "मुठ्ठी भर किसान, कुछ राज्यों का आन्दोलन बताने वाले आंख खोलकर देख ले कि किसानों के अह्वान पर आज पूरा देश #भारत_बंद का समर्थन कर रहा है, बिना किसी दबाव व हिंसा के ऐतिहासिक #BharatBand जारी है। सरकार कान खोल कर देख लें, कृषि कानूनों की वापसी व MSP की गारंटी के बिना घर वापसी नहीं होगी।"

भारत बंद के दौरान हरियाणा के सोनीपत में रेलवे ट्रैक पर आंदोलनकारी।

किसानों के बंद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल समेत कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने बंद को अपना समर्थन देते हुए कहा कि किसानों का अहिंसक सत्याग्रह आज भी अखंड है लेकिन शोषण-कार सरकार को ये नहीं पसंद है इसलिए आज भारत बंद है।

भारत बंद के दौरान पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सड़कों पर जय किसान आंदोलन और दूसरे किसान संगठनों के कार्यकर्ता।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, "संयुक्त किसान मोर्चा के 'भारत बंद' को सपा का पूर्ण समर्थन है। देश के अन्नदाता का मान न करनेवाली दंभी भाजपा सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुकी है। किसान आंदोलन भाजपा के अंदर टूटन का कारण बनने लगा है।"

भारत बंद प्रदर्शन, तमिलनाड़ु

भारत बंद के दौरान कई शहरों में बाजार पूरी तरीके से बंद हैं। पंजाब और हरियाणा में कई शहरों में स्थानीय दुकानदारों ने अपनी तरफ से बाजार बंद किए हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत बंद को लेकर दोपहर को अपने बयान में कहा, "आज भारत बंद उम्मीदों से परे अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है। सुबह छह बजे से ही देश भर से सूनसान राजमार्गों और खाली बाजारों पर निगरानी रखने वाले किसान समूहों की तस्वीरें आ रही हैं। यह प्रतिक्रिया सरकार के दुष्प्रचार के झूठ दिखाती है कि भारत के लोग अपने ऐतिहासिक संघर्ष में किसानों के साथ कितनी मजबूती से खड़े हैं।"

बारिश के बीच हैदराबाद में भारत बंद समर्थकों ने निकाला मोर्चा।

एमकेएम मोर्चा ने आगे कहा, "पंजाब, हरियाणा, केरल, बिहार जैसे राज्यों से पूरी तरह से बंद होने की सूचना मिली है, जहां सभी तरह के संस्थान, बाजार और परिवहन बंद कर दिए गए हैं। भारत बंद के आह्वान को राजस्थान, यूपी, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में व्यापक समर्थन मिला है। देश के अन्य हिस्सों से रिपोर्ट का इंतजार है।"

किसान संगठनों को देश के विभिन्न हिस्सों में ट्रेड यूनियनों, युवाओं और छात्रों के संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा जोड़ा गया है। एसकेएम की नीति के अनुसार, किसान संगठन राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधियों के साथ मंच साझा नहीं कर रहे हैं। देश के अधिकांश हिस्सों में शैक्षणिक संस्थान, सरकारी कार्यालय, निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान और बाजार आज बंद हैं। प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग बंद होने की खबरें आ रही हैं। कई राज्यों में रेलवे ट्रैक भी अवरुद्ध कर दिए गए हैं।

पंजाब के मानसा की एक बाजार में फैला सन्नाटा। दुकानदारों ने किसानों के समर्थन में बाजार बंद किए हैं।

किसान संगठनों ने 5 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत में 27 सितंबर के लिए भारत बंद का ऐलान किया था। तीन कृषि कानूनों को लेकर 26 नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों की सरकार से वार्ता फिलहाल स्थगित है। किसान संगठनों ने साफ किया है कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिए जाते हैं और वो घर वापस नहीं जाएंगे। संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में किसान संगठन जगह-जगह रैलियां और किसान महापंचायत तक लोगों का न सिर्फ जागरुक कर रहे हैं बल्कि सरकार को अपनी भीड़ के जरिए जमीन पर शक्ति का भी अहसास करवा रहे हैं। यूपी और पंजाब समेत कई राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं। किसान संगठन ऐलान कर चुके हैं कि उनकी अनदेखी करने वाली सरकारों और पार्टियों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

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