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पीएम किसान सम्मान निधि पर बोले किसान - "2000 में होता क्या है भाई साहब ? 1900 रुपये में एक बोरी डीएपी मिलने लगी है"

कोविड महामारी के बीच देश के 9.5 करोड़ से ज्यादा किसानों के खातों में 2000-2000 रुपए भेजते हुए पीएम मोदी ने कहा कठिन वक्त में ये राशि किसानों के काम आ रही है, लेकिन बहुत सारे किसानों का कहना कि जिस हिसाब से महंगाई बढ़ी है, लॉकडाउन में किसानों का नुकसान हो रहा है ये राशि काफी कम है।

Arvind ShuklaArvind Shukla   15 May 2021 12:05 PM GMT

पीएम किसान सम्मान निधि पर बोले किसान - 2000 में होता क्या है भाई साहब ? 1900 रुपये में एक बोरी डीएपी मिलने लगी है

14 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बटन दबाकर 9.5 करोड़ किसानों के खातों में भेजी पीएम किसान योजना की 8वीं किस्त

देश के 9.5 करोड़ किसानों के खातों में शुक्रवार को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 8वीं किस्त के रूप में 2000-2000 रुपये पहुंच गए। पीएम नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के पीएम किसान योजना के तहत 9,50,67,601 लाभार्थी किसानों को 2,06,67,75,66,000 रुपये एक बटन दबाकर सीधे उनके खातों में ट्रांसफर किए।

शुक्रवार को जिन किसानों के खातों में 2000 रुपये की किस्त भेजी गई, उनमें सबसे ज्यादा किसान उत्तर प्रदेश के हैं। यूपी के 261.5 लाख किसानों के खातों में कुल 5,230 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि भेजी गई है। ये पहली बार था, जब पश्चिम बंगाल के किसानों को इस योजना का लाभ मिला। 14 मई को पश्चिम बंगाल के 703955 किसान के खातों में 2815820000 रुपये भेजे गए।

पीएम मोदी ने कहा कि आज के इस कठिन समय में छोटे और मझोले परिवारों को इस राशि से काफी मदद मिलेगी। पीएम ने कहा कि पीएम किसान योजना PM kisan Samman Nidhi Yojna के तहत अब तक देश के करीब 11 करोड़ किसान परिवारों तक एक लाख 35 हजार करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में पहुंच चुके हैं। इनमें से 60 हजार करोड़ से ज्यादा रुपये सिर्फ कोरोना काल में किसानों के खातों में पहुंचे हैं।

कोविड महामारी की चपेट में ग्रामीण भारत भी है। किसानों का फल-सब्जी उगाने वाला वर्ग लॉकडाउन के चलते बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शहरों में काम करने वाले गरीब घरों के बच्चे, कामगार घर लौटे हैं। क्या उनके लिए 2000 रुपये मददगार हैं? इस पर किसान, कृषि जानकार और लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है।

पीएम किसान निधि (PM Kisan Nidhi) के 2000 रुपए की किस्त को लेकर मध्य प्रदेश में हरदा जिले के किसान राजेश गैंधर (37) कहते हैं, "साल में 6000 रुपये से क्या होता है? जब खेती में इतना घाटा हो रहा है। लॉकडाउन भी लगा है। ऐसे में बाकी चीजें छोड़ों, इन 6000 रुपये की जगह किसान के परिवार को मनरेगा की दर पर मजदूरी दे दी जाए काफी है। एक किसान का परिवार साल में 200 दिन कम से कम खेत में काम करता है, किसान को बस वही दे दो।"

पीएम किसान योजना के तहत 8वी किस्त में इन राज्यों के इतने किसानों को मिला लाभ।

राजेश गैंधर की तरह हरियाणा में भिवानी जिले के किसान सुखबीर सिंह (40) भी रकम को नाकाफी बताते हैं। वे फोन पर कहते है, "जमीन मेरे पिता के नाम पर है और उन्हें नियमित इस योजना का लाभ नहीं मिलता। वो कोई बात नहीं, लेकिन जिन किसानों को योजना का लाभ मिला है उन्हें तो फायदा हो। 2000 रुपये में एक बोरी बीज नहीं मिलेगा, एक बोरी चीनी नहीं मिलेगी, अब तो डीएपी भी नहीं मिलेगी। किसान जो खरीदता है, ऊपर जीसएटी अलग से लेते हैं। फिर 2000 से क्या होगा।"

देश के प्रख्यात खाद्य एवं निर्यात नीति विशेषज्ञ देविंदर शर्मा भी लगातार पीएम किसान योजना की रकम में बढ़ोतरी की वकालत करते रहे हैं। मोहाली से गांव कनेक्शन को वे फोन पर बताते हैं, "मैं उम्मीद लगाए हुए था जब पीएम खुद पैसे ट्रांसफर करने आ रहे हैं तो इस महामारी में रकम को बढ़ाया जाएगा। क्योंकि सरकार मान रही है अर्थव्यवस्था के लिए ग्रामीण क्षेत्र में मांग को बढ़ाया जाना जरूरी है और जब पैसा हर तिमाही जाता है तो पीएम के आने का आशय समझ नहीं आया।"

किसान और कॉरपोरेट को मिलने वाली सुविधाओं, उन्हें दिए जाने के तरीकों को लेकर सवाल उठाते हुए देविंदर शर्मा कहते हैं, "किसान को साल में 6000 मिलते हैं इसका कितना जोर-शोर से प्रचार किया जाता है, लेकिन सितंबर 2019 में सरकार ने कॉरपोरेट को 1.45 लाख रुपये की टैक्स छूट दी थी, क्या उसका कोई प्रचार किया गया था?, नहीं। ऐसा हर साल होता है फिर किसान के 2000 रुपये पर क्यों?"

पीएम नरेंद्र मोदी ने 14 मई 2021 को किसानों के खातों में पैसे भेजते हुए कहा कि पीएम किसान योजना के तहत अब (8वीं किस्त तक) 1.35 लाख करोड़ रुपये किसानों को भेजे गए हैं। देश के इकनोमिक मॉडल को लेकर वो अर्थशास्त्रियों पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहते हैं, "ये पूरी रकम कॉरपोरेट को एक साल में मिली टैक्स छूट से कम है। क्योंकि हम किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से मदद नहीं करते हैं तभी बढ़ाकर पेश किया जाता है।"

ये पहली बार है जब पश्चिम बंगाल के किसानों को पीएम किसान निधि योजना का लाभ मिलना शुरु हुआ है। 14 मई को पीएम ने कहा, "जैसे-जैसे राज्य सरकार से किसानों के नाम केंद्र सरकार को मिलेंगे वैसे-वैसे लाभार्थी किसानों की संख्या और बढ़ती जाएगी।"

पश्चिम बंगाल में सिंगुर जिले के खातिरबेरी के सुब्रतो घोष (27) कहते हैं, "ये पैसे की जरूरत नहीं है। 2000 से गरीब का भला नहीं हो जाएगा। गांव-किसान की समस्याओं पर काम होना चाहिए।" सुब्रतो के मुताबिक उनके परिवार में एक एकड़ जमीन है, जो उनके पिता शिडू घोष के नाम पर है और उनके गांव के 90 फीसदी किसानों के पास एक एकड़ जमीन है।

ग्रामीण मामलों के जानकार और लेखक अरविंद कुमार सिंह पीएम किसान योजना को अच्छा बताते हुए कहते हैं, "किसान का सम्मान वाजिब दाम में है।" वो आगे कहते हैं, "पीएम किसान योजना बेशक अच्छी योजना है, लेकिन इसमें ग्रामीण भूमिहीन परिवार भी जुड़े होते तो शायद बेहतर होता। ये अच्छी योजना है, लेकिन इससे किसानों का जीवन बदल गया हो ये दिन में सपने देखने जैसा है। एमएसपी पर गारंटी कानून बनाकर सरकार इस समस्या का हल निकाल सकती है। ये सबको पता है सरकार उपज खरीद नहीं सकती, लेकिन खरीदवा तो सकती है।"

अरविंद कुमार सिंह के मुताबिक ऑनलाइन धन का ट्रांसफर सिर्फ इसी योजना में नहीं हो रहा है। इसलिए हर बार पीएम इसकी किस्त जारी करें ये जरूरी नहीं। उनके मुताबिक इस योजना का जो लाभ उन्हें मिलना चाहिए था वो 2019 में मिल चुका है। पश्चिम बंगाल चुनाव इसका उदाहरण है।

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मध्य प्रदेश में डीएपी के लिए जारी नोटिस, नई एमआरपी वाली डीएपी 1900 रुपए की ही मिलेगी।

8वीं किस्त के मुताबिक पीएम किसान सम्मान निधि योजना के सबसे ज्यादा लाभान्वित किसान यूपी (22508275) के हैं, जबकि दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र (9160108) तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश (8095544) है। सबसे कम किसानों की बात करें तो 8वीं किस्त के मुताबिक 8584 किसान गोवा के हैं। उत्तर प्रदेश की बात करें तो पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वर्ष 2018-19 में 2,195 करोड़ रुपए, वर्ष 2019-20 में 10,883 करोड़ रुपए तथा वर्ष 2020-21 में 14,185 करोड़ रुपए भेजे गए। इस तरह अब तक कुल 27,263 करोड़ रुपए प्रदेश के किसानों को मिले हैं।

हरियाणा में भिवानी जिले में तोशाम तहसील में निंघाना कला गांव के किसान राजेश सिंह (40) के खाते में भी 14 मई को 2000 रुपये आए, टमाटर की खेती करने वाले इस किसान को लॉकडाउन में भारी नुकसान हुआ है। वो सवाल पूछते हैं, "2000 में होता क्या है भाई साहब? 1900 रुपये की तो मैं एक बोरी (50 किलो) डीएपी लाया हूं। जिसके पास 2 एकड़ भी जमीन होगी, उसे साल में 3 बोरी डीएपी कम से कम चाहिए। सरकार को चाहिए कि खाद-बीज सस्ते करे। सब्जियों की खेती में बीमा शुरू कराए तब किसानों को फायदा होगा।"

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