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त्योहारों के मौसम में कोरोना से बचने के लिए कोविड प्रोटोकॉल पालन करने की सलाह

त्योहारी सीजन में कोविड संबंधी उपयुक्त व्यवहार का पालन करना बहुत ही जरूरी और महत्वपूर्ण है। इस समय के आसपास नए म्यूटेशन का उभरना भी तीसरी लहर के आने का एक कारण हो सकता है।

त्योहारों के मौसम में कोरोना से बचने के लिए कोविड प्रोटोकॉल पालन करने की सलाह

देश में पिछले कई हफ्तों से रोजाना औसतन लगभग 30,000-45000 मामले सामने आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर खास भौगोलिक क्षेत्रों, विशेष रूप से केरल, कई उत्तर पूर्वी राज्यों और महाराष्ट्र के कुछ जिलों और कुछ अन्य दक्षिणी राज्यों में दर्ज किए गए हैं। फोटो: पिक्साबे 

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का असर अभी है और विशेषज्ञ तीसरी लहर के लिए भी सचेत कर रहे हैं, ऐसे में देश में त्योहारों के मौसम में विशेषज्ञ कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दे रहे हैं।

कोविड-19 वर्किंग ग्रुप ऑफ द नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (एनटीएजीआई) यानी राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी परामर्श समूह के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा ने एक कार्यक्रम में कई सारे मुद्दों पर बात की।

क्या भारत में तीसरी लहर आने की संभावना है के जवाब में डॉ अरोड़ा ने कहा, "हमारे देश में पिछले कई हफ्तों से रोजाना औसतन लगभग 30,000-45000 मामले सामने आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर खास भौगोलिक क्षेत्रों, विशेष रूप से केरल, कई उत्तर पूर्वी राज्यों और महाराष्ट्र के कुछ जिलों और कुछ अन्य दक्षिणी राज्यों में दर्ज किए गए हैं। अगर हम जून, जुलाई और अगस्त के दौरान फैलने सार्स-कोव-2 वायरस का जीनोमिक विश्लेषण करते हैं, तो कोई नया वैरिएंट सामने नहीं आया है और जुलाई के दौरान किए गए सीरो-सर्वेक्षण के आधार पर, चल रहे कोविड मामले उन व्यक्तियों में देखने को मिले हैं जो अतिसंवेदनशील हैं जिनका अभी तक टीकाकरण नहीं किया गया है। वे कोविड की दूसरी लहर के अंतिम चरण से प्रभावित हुए हैं।"

जुलाई के सीरो-सर्वे में 66% से 70% लोग संक्रमित पाए गए; इसका मतलब यह भी है कि 30% लोगों के अभी भी संक्रमित होने की संभावना हैं; और वे किसी भी समय संक्रमित हो सकते हैं, खासकर यदि उनका अभी तक टीकाकरण नहीं हुआ है। इसलिए पूरे देश में हममें से किसी की ओर से किसी भी तरह के आत्मसंतोष के कारण भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है क्योंकि 30% लोग संक्रमित हो सकते हैं और उनमें से कई गंभीर बीमारी के शिकार हो सकते हैं, जैसा कि अप्रैल और मई 2021 के दौरान देखा गया था।

विशेष रूप से आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान, कोविड संबंधी उपयुक्त व्यवहार का पालन करना बहुत ही जरूरी और महत्वपूर्ण है। इस समय के आसपास नए म्यूटेशन का उभरना भी तीसरी लहर के आने का एक कारण हो सकता है।

भारत में पिछले 24 घंटों में कोविड संक्रमण के 34,973 नए मामले सामने आए हैं, इस समय देश में 3,90,646 सक्रिय मामले हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान 37,681 रोगी स्वस्थ हुए, देश भर में अभी तक कुल 3,23,42,299 मरीज स्वस्थ हुए है।

अभी भी लोगों के मन सवाल है कि क्या कोई अगर कोई व्यक्ति कोविड-19 से संक्रमित था और अब उसके शरीर में कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी हैं, तो क्या वह किसी कोविड-19 संक्रमित को रक्त या प्लाज्मा दान कर सकता है, के जवाब में डॉ एनके अरोड़ा ने समझाते हुए कहा कि आईसीएमआर के अधीन किए गए हमारे देश में उच्च गुणवत्ता वाले शोध से पता चला है कि प्लाज्मा थेरेपी अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर कोविड संक्रमित अधिकांश रोगियों के लिए उपयोगी नहीं थी। इसी तरह दुनिया के अन्य हिस्सों से भी इसी तरह के रिसर्च मौत या अस्पताल में भर्ती होने से रोकने में विफल रहे हैं। इन कारणों से, आईसीएमआर ने गंभीर कोविड-19 संक्रमण के उपचार संबंधी दिशा-निर्देशों के हिस्से के रूप में प्लाज्मा थेरेपी को हटा दिया है।

अगर कोई रोगी संक्रमित होता है, तो उसके शरीर में कोशिका आधारित प्रतिरक्षा के साथ-साथ एंटीबॉडी का निर्माण होगा। एंटीबॉडी मापने योग्य हैं और इसे विजबल प्रतिरक्षा भी कहा जा सकता है। कोशिका आधारित प्रतिरक्षा को अदृश्य प्रतिरक्षा और एंटीबॉडी के रूप में महत्वपूर्ण भी कहा जा सकता है। ये प्रतिरक्षा बीमारी और गंभीरता को रोकते हैं जब ऐसे व्यक्ति को कोविड-19 से फिर से संक्रमण हो जाता है।

हाल ही में एक कंपनी द्वारा एंटीबॉडी मिश्रण बाजार में पेश किया गया था, लेकिन इसका ज्यादा फायदा नहीं दिखा। यह एंटीबॉडी मिश्रण भी प्लाज्मा थेरेपी के सिद्धांत पर आधारित था। देखा गया कि अगर पहले हफ्ते या संक्रमण के शुरुआती दौर में मरीज को प्लाज्मा या एंटीबॉडी दी जाए तो कुछ फायदा हो सकता है।

हाल ही में प्रकाशित एक पेपर में उल्लेख किया गया है कि अगर किसी व्यक्ति को कोविड संक्रमण हो गया है और वह ठीक हो गया है, तो उस व्यक्ति की प्रतिरक्षा लंबे समय तक उसकी रक्षा करेगी और अगर ऐसा व्यक्ति भी टीका लेता है, तो उस व्यक्ति को संक्रमण से दोहरी सुरक्षा मिलेगी।

अधिकांश टीके कोविड संक्रमण को रोकने में पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं हैं और इसलिए, इस बात पर बार-बार जोर दिया जाता है कि टीकाकरण के बाद भी, व्यक्ति कोविड संक्रमण फैला सकता है और कोविड संक्रमण को रोकने के लिए उपयुक्त व्यवहार को बनाए रखने की आवश्यकता है।

कोविड-19 टीकों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कोरोना से होने वाली गंभीर बीमारी से बचाता है। साथ ही रोगी के अस्पताल में भर्ती होने और उसकी मृत्यु होने की संभावना को भी बहुत ही कम कर देता है। भारत और दूसरे देशों में उपलब्ध टीके, टीकाकरण करवाने वाले लोगों को गंभीर बीमारी और मृत्यु से बचाने में 90-95% से अधिक प्रभावी हैं। यह डेल्टा वायरस सहित सभी वैरिएंट के लिए कारगर है। भारत में आज होने वाले अधिकांश संक्रमण डेल्टा वायरस के कारण होते हैं।

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