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फिरोजाबाद में डेंगू के प्रकोप के बाद ग्रामीण उत्तर प्रदेश में मलेरिया का भयंकर रूप

फिरोजाबाद, आगरा और मथुरा जिलों में डेंगू के प्रकोप से जूझ रहे हैं, जिससे छोटे बच्चों की मौत हो रही है। राज्य के कई जिलों में मलेरिया के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। इंसेफेलाइटिस के मामले भी सामने आ रहे हैं। ग्रामीण उत्तर प्रदेश बुखार की चपेट में है। गांव कनेक्शन की रिपोर्ट।

Ramji MishraRamji Mishra   8 Sep 2021 7:55 AM GMT

रघुवर दयालपुर (सीतापुर), उत्तर प्रदेश। रघुवर दयालपुर में रहने रहने वाले 300 से अधिक लोग डरे हुए हैं। इस गांव पर 'संक्रमित गांव' का ठप्पा लग गया है। राज्य की राजधानी लखनऊ से करीब 150 किलोमीटर दूर यह गांव मलेरिया के प्रकोप की चपेट में है। गांव के लोग जदुआ बुखार की शिकायत कर रहे हैं, यहां के लोग मेलेरिया को स्थानीय भाषा में यही कहते हैं। इस बीमारी के सामान्य लक्षणों में कंपकंपी और बहुत तेज बुखार शामिल हैं।

महोली प्रखंड के ग्राम प्रधान राम प्रकाश ने गांव कनेक्शन को बताया, "मलेरिया का प्रकोप है।" "स्वास्थ्य दल ने हमारे गाँव का दौरा किया और परीक्षण किया। रघुवर दयालपुर में कुछ ग्रामीण मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्हें दवाएं दी गई हैं, "उन्होंने कहा। प्रधान ने आगे बताया, "आज (7 सितंबर) को ज्यादा ब्लड सैंपल लिए गए हैं। कल तक रिपोर्ट आ जानी चाहिए।"

ग्राम प्रधान के अनुसार पिछले 10-12 दिनों में गांव में बुखार के मरीज तेजी से बढ़े हैं। यह पूछे जाने पर कि बुखार के कारण कितने ग्रामीणों की मृत्यु हुई होगी, उन्होंने कहा: "चार से पांच लोगों की मृत्यु हुई है जिनमें एक बच्चा भी है।"

जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद, मथुरा और आगरा जिले डेंगू ( जिसे पहले रहस्यमयी बुखारा माना जाता था) के प्रकोप के लिए सुर्खियों में रहे हैं, जिसने अकेले फिरोजाबाद में कम से कम 54 लोगों की जान ले ली है, जिनमें ज्यादातर छोटे बच्चे हैं। उत्तर प्रदेश के कुछ अन्य जिलों से भी मलेरिया के प्रकोप की खबरें आ रही हैं।

सीतापुर जिला अस्पताल में तेज बुखार के कुल 308 मरीज भर्ती हैं और उनमें से 90 मरीज 18 से साल से कम उम्र के हैं।

सीतापुर उनमें से एक है। सीतापुर का जिला अस्पताल मरीजों से खचाखच भरा है और इसके बच्चों के वार्ड में एक भी बेड खाली नहीं है। यहां लखीमपुर जिले के मरीजों को भी यहां भर्ती कराया गया है। सबमें जदुआ बुखार की शिकायत है।

"मेरे बच्चे को पिछले चार से पांच दिनों से बुखार है। बुखार उतर जाता है और फिर तेज हो जाता है। डॉक्टरों ने मुझे बताया है कि यह मलेरिया है, " राकेश कुमार यादव गांव कनेक्शन को बताते हैं जिनका बच्चा जिला अस्पताल सीतापुर में भर्ती है।

कादिर खान का बच्चा भी इसी अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती है। "मेरे बच्चे को पिछले आठ से दस दिनों से बुखार और पेट दर्द और उल्टी की शिकायत है। हमने लखीमपुर के सरकारी अस्पताल में दिखाया लेकिन उन्होंने बच्चे को लखनऊ रेफर कर दिया। जब हम लखनऊ जा रहे थे, तब बच्चे की हालत बिगड़ गई और हमने उसे सीतापुर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया, "लखीमपुर के एक गाँव के रहने वाले खान ने गाँव कनेक्शन को बताया। उन्होंने कहा, "पूरा वार्ड बुखार से पीड़ित बच्चों से भरा हुआ है।"

सीतापुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) मधु गैरोला ने गांव कनेक्शन को बताया कि जिले में कम से कम 77 मलेरिया के मामले सामने आए हैं, लेकिन कोई मौत नहीं हुई है।

"लोग वास्तव में मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों से संक्रमित हैं, लेकिन प्रकोप को रोकने के प्रयास जारी हैं। उन सभी को मलेरिया रोधी उपचार दिया जा रहा है, जिनमें संक्रमित होने का पता चला है और हम रुके हुए पानी वाले क्षेत्रों को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए टीम भेजी ता रही है। " उन्होंने कहा।

सीतापुर जिला अस्पताल में आधिकारिक स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार तेज बुखार के कुल 308 मरीज भर्ती हैं और उनमें से 90 नाबालिग हैं।

गंदगी, बीमारी और मौत

रघुवर दयालपुर की रहने वाली चालीस वर्षीय सावित्री देवी बुखार के मामलों और मौतों के आधिकारिक आंकड़े नहीं पढ़ सकती हैं। वह केवल इतना जानती है कि बुखार ने उसके 12 वर्षीय बेटे अमरजीत की जान ले ली, जिसकी 5 सितंबर को लखनऊ के डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मौत हो गई थी।

सरकारी अस्पताल (गाँव कनेक्शन के पास इसकी एक प्रति है) द्वारा जारी बच्चे की डेथ समरी में लिखा है: श्वसन विफलता, तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) झटका, इंट्रावास्कुलर कोगुलेशन (डीआईसी) मृत्यु के कारण हैं।


अपनी आवाज के घुटन और शब्दों के टूटने के साथ सावित्री देवी ने कहा: "बुखार"और फिर अपनी छाती की ओर इशारा करते हुए, दुखी माँ ने कहा: "उसका ये नहीं काम कर रहा था"। (उसकी छाती काम नहीं कर रही थी)

"डॉक्टर ने मुझे बस इतना ही बताया। मेरा बेटा अपने अंतिम क्षणों में सांस नहीं ले सका, " मृतक अमरजीत की मां ने कहा।

अमरजीत की मौत से दुखी माता-पिता। फोटो: रामजी मिश्रा

रघुवर दयालपुर की सड़कों पर टहलना यह बताने के लिए काफी है कि गांव को 'संक्रामित' क्यों कहा जाता है। गांव की सड़कों पर पानी जमा है और कचरा इधर-उधर फेंका हुआ नजर आ रहा है।

"मलेरिया हो या डेंगू, ये बुखार गंदगी और मच्छर से फैलते हैं," प्रधान राम प्रकाश ने स्वीकार किया। उन्होंने कहा, "बुखार के मामलों में वृद्धि के बाद से, स्वास्थ्य दल गांव का दौरा कर रहे हैं और (मच्छर नियंत्रण के लिए) फॉगिंग भी की गई है।"

गांव में गांव कनेक्शन की मुलाकात मिनांशी नाम की एक युवती से हुई, जिसने कहा कि उसे पिछले 10 दिनों से बुखार है और उसके गांव में एक मेडिकल टीम आई थी। उन्होंने ब्लड टेस्ट किया जिसमें वह मलेरिया पॉजिटिव पाई गई।

"वो लोग सुई चुभा के खून की जांच किए थे, बोले मलेरिया वाला बुखारा है और कहे कल दस बजे तक आओ दिखाने महोली मैं," मिनांशी ने अपनी कमजोर आवाज में एक मुस्कान के साथ कहा। यह स्वास्थ्य केंद्र गांव से करीब 10 किलोमीटर दूर है।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह स्वास्थ्य केंद्र गई थी, लड़की ने कहा-नहीं।

मिनांशी ने कहा कि उसे पिछले 10 दिनों से बुखार हो रहा था। फोटो: रामजी मिश्रा

गांव के ही एक अन्य निवासी राजपाल का 14 वर्षीय बेटा भी मलेरिया से पॉजिटिव पाया गया है। राजपाल कहते हैं, "स्वास्थ्य टीम ने लगभग 20-25 गांवों का परीक्षण किया है और मलेरिया सबसे अधिक पाया गया है।" यह पूछे जाने पर कि उनके गांव में कितने लोग मलेरिया से मरे होंगे, राजपाल ने कहा: "चार से पांच लोगों की मौत हो गई होगी।"

बुखार की चपेट में ग्रामीण यूपी

उत्तर प्रदेश के 26 से अधिक जिलों में आई बाढ़ के बाद से राज्य के ग्रामीण इलाकों में वेक्टर जनित बीमारियों की बाढ़ आ गई है। फिरोजाबाद के अलावा, वाराणसी, बदायूं, सीतापुर, फर्रुखाबाद, उन्नाव, बाराबंकी, हमीरपुर, जालौन, सोनभद्र जैसे जिलों में भी बुखार के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। कुछ जगहों पर यह डेंगू बुखार है, जबकि कुछ जिलों में मलेरिया के मरीज सामने आए हैं, और कुछ में सिर्फ मौसमी वायरल बुखार है।

उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर छिड़काव किया जा रहा है।

5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर उन्नाव की सदर तहसील की आंगनबाडी कार्यकर्ता 42 वर्षीय सुनीता देवी की बुखार से मौत हो गयी। "पिछले पांच से छह दिनों से उसे बुखार चल रहा था। शुरुआत में हम उसे एक स्थानीय निजी डॉक्टर के पास ले गए। लेकिन जब दो दिन की दवा के बाद भी उसे कोई आराम नहीं मिला, तो हम उसे कानपुर ले गए," मृतक कार्यकर्ता के पति प्रेम प्रकाश ने गांव कनेक्शन को बताया।

उन्नाव की सदर तहसील की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुनीता देवी की बुखार से मौत हो गई.

प्रकाश के मुताबिक उल्टी और पेचिश से सुनीता देवी की हालत बिगड़ने पर वह उन्हें लखनऊ के एक निजी अस्पताल में ले गए जहां उन्हें दवाइयां दी गईं। विधुर ने कहा, "हालांकि, उसे घर वापस लाते समय उसकी हालत बिगड़ गई और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।" वह परिवार की इकलौती कमाने वाली सदस्य थी और अपने पीछे तीन बच्चे छोड़ गई है।

जिला अस्पताल उन्नाव के बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञ बृज किशोर ने गांव कनेक्शन को बताया कि तेज बुखार जैसे लक्षणों के साथ इलाज कराने वाले बच्चों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

"पंद्रह दिन पहले, मुझे रोजाना लगभग सौ मरीज मिलते थे। लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 150-160 प्रतिदिन हो गई है। अभी तक डेंगू या मलेरिया का कोई मरीज नहीं आया है लेकिन वायरल बुखार से पीड़ित लोगों की संख्या बहुत अधिक है।" किशोर कहते हैं।

बाराबंकी में डेंगू और जापानी इंसेफेलाइटिस

राज्य की राजधानी लखनऊ से बमुश्किल 30 किलोमीटर दूर, बाराबंकी जिले में पिछले दो हफ्तों में डेंगू के कम से कम आठ मामले और जापानी इंसेफेलाइटिस के दो मामले सामने आए हैं, जिला बुलेटिन के माध्यम से ये जानकारी दी गई। इन मरीजों को लखनऊ के अस्पतालों में रेफर कर दिया गया है।

जिला अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में 6 सितंबर को कुल 1,450 मरीज देखे गए, जिनमें से लगभग 700 में वायरल लक्षण सामने आए।

बाराबंकी के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक वीके सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया कि अस्पताल आने वाले ज्यादातर मरीजों में वायरल फीवर की शिकायत आ रही है।

बदायूं में मलेरिया के मामले सामने आए हैं और कम से कम 39 ऐसे मामलों की पुष्टि की जानी है।

बाराबंकी जिले में ही सूरतगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के डॉक्टर अकबर अली ने गांव कनेक्शन को बताया कि सीएचसी में आने वाले मरीजों की संख्या में करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वे कहते हैं, "अधिकांश रोगी या तो एक से सात वर्ष की आयु के हैं, या 50 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि उनके सीएचसी में डेंगू के किसी भी मामले की पहचान नहीं की गई है।

इसके अलावा बदायूं में मलेरिया के मामले सामने आए हैं और कम से कम 39 ऐसे मामलों की पुष्टि हुई है।

इस बीच, चार राज्यों झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार की सीमा से लगे सोनभद्र जिले का स्वास्थ्य ढांचा भी बुखार के बढ़ते मामलों के कारण चर्चा में है।

सोनभद्र जिले के एक अस्पताल में मरीज। फोटो: भीम जायसवाल

सोनभद्र के एक चिकित्सक केके चौरसिया ने गांव कनेक्शन को बताया, "इन दिनों क्लीनिक में आने वाले मरीज तेज बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द की शिकायत कर रहे हैं और इन रोगियों के रक्त में सफेद रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) और प्लेटलेट्स की संख्या बहुत कम है।" यहां के लोग भी ज्यादा जागरूक नहीं हैं। उनमें से ज्यादातर हमारे जैसे डॉक्टरों के पास तब आते हैं जब उनकी हालत गंभीर हो जाती है। इनमें से ज्यादातर लोग गरीब हैं और समय पर इलाज भी नहीं करा सकते हैं।"

फर्रुखाबाद जिले में लगभग 100 बच्चे कथित तौर पर रहस्यमयी बुखार से संक्रमित हैं। इसके अलावा अगर समाचारों की मानें तो पिछले सात दिनों में बुखार के कारण तीन बच्चों की मौत हो गई है। गांव कनेक्शन इन दावों की पुष्टि नहीं करता।

राज्य के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित हमीरपुर जिले में भी यही स्थिति है। जिला अस्पताल द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार पिछले सप्ताह स्वास्थ्य सुविधा में कुल 1,068 रोगियों को भर्ती किया गया है, जिनमें से आधे से अधिक फ्लू, बुखार और खांसी जैसे लक्षण मिले हैं।

प्रतिरोधक क्षमता कम, माता-पिता अनजान

इस बीच, फर्रुखाबाद के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर गांव कनेक्शन को बताया कि वेक्टर जनित बीमारियों के प्रकोप और इलाकों में स्वच्छता की कमी के अलावा, बच्चों की खराब प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण की गंभीरता को और बढ़ा रहे हैं।

"ये बच्चे लगभग डेढ़ साल से अपने घरों में फंसे हुए हैं। उनका लंबे समय तक बाहरी वातावरण से संपर्क नहीं हुआ है। अब अचानक सब कुछ खुल गया है, त्यौहार मनाए जा रहे हैं और स्कूल भी खुले हैं।" वे आगे कहते हैं।

लंबे समय तक संपर्क में न रहने के कारण बच्चे संक्रमण की चपेट में अधिक आते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। फोटो: सुमित यादव

"प्रतिरक्षा तंत्र के खराब होने के कारण बच्चों में संक्रमण अत्यधिक खतरनाक स्तर पर पहुंच जा रहा है। अन्यथा इस ये मामले इतने नहीं आते।" डॉक्टर ने कहा।

फर्रुखाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सतीश चंद्र ने भी इसी तरह की चिंता जताई। चंद्रा ने गांव कनेक्शन को बताया, "यह सिर्फ वेक्टर जनित बीमारियों का प्रकोप नहीं है जो बच्चों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि संक्रमित बच्चों के माता-पिता के बीच जागरुकता की कमी के कारण बड़ी संख्या में मामले सामने आ रहे हैं।"

"जाहिर है कि बच्चे प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। और दूसरी एक बड़ी वजह यह भी है कि माता-पिता में समय पर इलाज नहीं करा पा रहे हैं।"

"घरों से रुका हुआ पानी निकालने में घोर लापरवाही बरती जा रही है। हमारा विभाग मामलों से घबराया हुआ है। हमारी टीम ने इन क्षेत्रों का दौरा किया और पाया कि सभी घरों में रुके हुए पानी में लार्वा मौजूद हैं। माता-पिता को भी जिम्मेदार होने की जरूरत है, " चंद्र कहते हैं।

बाराबंकी से वीरेंद्र सिंह, उन्नाव से सुमित यादव, सोनभद्र से भीम जायसवाल और बृजेंद्र दुबे के इनपुट के साथ प्रत्यक्ष श्रीवास्तव ने खबर लिखी है ।

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