पूरे देश में ओडीएफ का शोर है, जानिए कैसे गांव को बनाया जाता है खुले में शौच से मुक्त

Deepanshu Mishra | Mar 20, 2017, 19:10 IST
Share
SwachhBharat
पूरे देश में ओडीएफ का शोर है
लखनऊ। ओडीएफ का मतलब है खुले से शौच मुक्त, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत दो अक्टूबर 2014 को राजघाट से की थी। इस मिशन को पूरा करने का लक्ष्य राष्ट्रपिता के 150वीं पुण्यतिथि यानी 2 अक्टूबर 2019 तक का रखा गया है। ओडीएफ पर काम करने वाली संस्था के राज्य सलाहकार नवीन शुक्ला ने बताया, “हम गाँव को ओडीएफ मुक्त करने के लिए काम करते हैं, “अभी तक पूरे राज्य में 2551 ग्राम पंचायतें खुले में शौच से मुक्त हो चुकी हैं।”

कैसे होता है एक गाँव ओडीएफ

एक ग्राम पंचायत या एक गाँव तब तक खुले में शौच से मुक्त नहीं मानी जाती जब तक गाँव का एक-एक व्यक्ति शौचालय का प्रयोग नहीं करने लगता हो। अगर उस गाँव का 6 महीने का बच्चा भी शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहा है तो गाँव खुले में शौच से मुक्त नहीं माना जायेगा। किसी भी ग्राम पंचायत का शत प्रतिशत शौचालय का प्रयोग उस ग्राम पंचायत से मुक्त माना जायेगा।

यूपी समेत देश के ज्यादातर गांवों में बने शौचालय के निर्माण पर सवाल उठते रहे हैं। फोटो- गांव कनेक्शन

सरकार को भेजा जाता है प्रस्ताव

पहले ग्राम पंचायत में सर्वे किया जाता है कि कौन शौचालय पाने के लिए पात्र है और कौन पात्र नहीं है। इस सर्वे में जिसका घर किसी महिला पर आश्रित है, जो गरीबी रेखा से नीचे आता है, घर में चार बीघे से खेती कम है, कच्चा घर है, घर में कोई भी गाड़ी नहीं है, जो परिवार इन सब माप दंड को पूरा करता है उसे ही शौचालय दिया जाता है। शौचालय में सरकार की तरफ से 12000 रुपए की राशि उस परिवार को शौचालय के लिए दी जाती है।

ये तस्वीर देखिए: केंद्रीय सचिव परमेश्वरन अय्यर ने पेश की मिसाल, तेलंगाना के एक गांव में साफ किए शौचालय के गड्ढे

कैसे बनते हैं शौचालय



लखनऊ का पहला गांव जो खुले में शौच से मुक्त हुआ था। ओडीएफ के लिए जो शौचालय बनाए जाते हैं, उनमें दो गड्ढे वाला शौचालय बनाया जाता है। इन गड्ढों की माप एक बाई एक का होता है जिनका भार से व्यास एक दशमलव और एक दशमलव तीन होती है। पूरा शौचालय हनी काम्बिंग प्रक्रिया से बनाया जाता है। शौचालय के पास पानी की व्यवस्था होनी चाहिए जिससे कोई भी हाथ भी धुल सके। शौचालय बनने के समय उसपर निगरानी की जाती है कि सरकार के माप दंड पर बन रहा है या नहीं।

शौचालय के प्रयोग के लिए प्रशिक्षण

समुदाय आधारित सम्पूर्ण स्वच्छता के माध्यम से लोगो को जागरूक किया जाता है। लोगों को बताया जाता है कि वो पूर्ण रूप से शौचालय का प्रयोग करें। इस प्रशिक्षण में लोगों को यह भी बताया जाता है कि अगर वह शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहे हैं, तो एक प्रकार से लोग अपने मल को ही खा रहे हैं। इससे बचने के लिए वो शत प्रतिशत शौचालय का प्रयोग करें।

निगरानी के लिए गठित की जाती है टीम

लोगों की निगरानी करने के लिए कि वे शौचालय का प्रयोग कर रहे हैं या नहीं इसके लिए एक टीम गठित की जाती है जो लोगों पर नजर रखती है। ये टीम प्राकृतिक अगुवा की होती है। इस टीम का चयन उसी ग्राम पंचायत से किया जाता है

जिस ग्राम पंचायत को ओडीएफ मुक्त किया जाता है। ये प्राकृतिक अगुवा लोग वो होते हैं, जो जिम्मेदारी लेते हैं कि हम अपनी ग्राम पंचायत को प्राकृतिक रूप से स्वच्छ बनाये रखेंगे। अगर इनकी नजर में कोई भी व्यक्ति खुले में शौच के लिए जाता है तो ये उनको बताते हैं कि खुले में शौच जाना गलत है। इससे आप बीमार हो सकते है, जिस टीम का गठन किया जाता है इस टीम का दो दिन प्रशिक्षण किया जाता है।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Tags:
  • SwachhBharat
  • Parameswaran Iyer
  • ओडीएफ
  • Gram Panchayat Raj Officer
  • Gram Panchayat Vikas Yojna
  • राष्ट्रपिता के 150वीं पुण्यतिथि
  • शौचालय के प्रयोग के लिए प्रशिक्षण
  • पंचायत
  • Gram Panchayat