कृषि विशेषज्ञों की सलाह : इस समय किसान करें खेती-किसानी के ये जरूरी काम

इस सप्ताह में प्राप्त होने वाली वर्षा नमी का फायदा लेते हुए खेत की मेड़ मजबूत कर गहरी जुताई करें, जिन किसानों ने अब तक हरी खाद की बुवाई नहीं की है वह वर्षा का लाभ लेते हुए सनई/ढैंचा की बुवाई करें।

कृषि विशेषज्ञों की सलाह : इस समय किसान करें खेती-किसानी के ये जरूरी काम

ये महीना खरीफ की फसलों की बुवाई समय होता है। प्रदेश के कई कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने बैठक में मौसम आधारित राज्य स्तरीय कृषि परामर्श समूह की बैठक में बताया कि किसान इस हफ्ते कौन-कौन से काम कर सकते हैं।

इस सप्ताह में प्राप्त होने वाली वर्षा नमी का फायदा लेते हुए खेत की मेड़ मजबूत कर गहरी जुताई करें, जिन किसानों ने अब तक हरी खाद की बुवाई नहीं की है वह वर्षा का लाभ लेते हुए सनई/ढैंचा की बुवाई करें। अरहर का अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए मेड़ों (रिज एवं बंड) पर बुवाई करें। सीमित संसाधन होने पर किसान संतुलित उर्वरक और जैविक खादों का प्रयोग अवश्य करें ताकि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी फसल को हानि कम से कम हो।

नर्सरी में पानी का तापमान बढ़ने पर क्यारी से पानी निकाल कर पुनः सिंचाई करें। सिंचाई शाम के ही समय करनी चाहिए। वर्षा की स्थिति को देखते हुए मूंग की पकी फलियों की तुड़ाई करें। रोगनाशी/कीटनाशी का प्रयोग आसमान साफ रहने पर ही करें।

धान की नर्सरी करें तैयार

धान की खेती-धान की मध्यम अवधि वाली प्रजातियों यथा नरेन्द्र धान-359, मालवीय धान-36, नरेन्द्र धान-2064, नरेन्द्र 3112-1, नरेन्द्र धान-2065, शियाट्स धान-1 आदि की नर्सरी डालें। संकर धान की प्रजातियों यथा एराइज-6444, 6201, पी.एच.बी.-71, नरेन्द्र संकर धान-2, 3, के.आर.एच.-2, पी.आर.एच.-10, जे.के.आर.एच.-401, वी.एस.आर. 202, यू.एस. 312, आर.एच. 1531, सहयाद्री 4, सवाना 127 आदि की नर्सरी डालें। सुगंधित धान की प्रजातियों यथा टाइप-3, कस्तूरी, पूसा बासमती-1, हरियाणा बासमती-1, बासमती-370, तारावडी बासमती, मालवीय सुगंध-1, मालवीय सुगंध 4-3, पूसा सुगंध-4 (पूसा 1121), पूसा सुगंध-5, वल्लभ बासमती-22, नरेन्द्र लालमती, नरेन्द्र सुगंध, एच.डी.-1509 आदि की नर्सरी डालें।

मक्का की खेती- देर से पकने वाले मक्के की संकर प्रजातियों गंगा-11, सरताज, एच.क्यू.पी.एम.-5, एच.क्यू.पी.एम.-8, प्रो.316 (4640), बायो-9681 व वाई-1402 के. और संकुल प्रजाति यथा प्रभात की बुवाई करें।


अरहर की खेती- सिंचित क्षेत्रों में पश्चिमी उ.प्र. के लिए अरहर की अगेती संस्तुत प्रजाति पारस तथा सम्पूर्ण उ.प्र. के लिए संस्तुत प्रजातियों यू.पी.ए.एस.-120, टा-21 तथा पूसा-992 की बुवाई 15 जून तक करें।

गन्ना की खेती- चोटी बेधक के प्रभावी नियंत्रण के लिये 15 जून तक फ्यूराडान 1 किग्रा. (सक्रिय तत्व) या क्लोरेंटेन्लीप्रोल 375 एम.एल. प्रति हे. की दर से खेत में पर्याप्त नमी की अवस्था में प्रयोग करें।

बागवानी- आम के परिपक्व फलों की तुड़ाई 8-10 मिमी. लम्बी डंठल के साथ करें, जिससे फलों पर चेप न लगने पाये। इससे स्टेम इण्ड राट बीमारी नहीं लगती, पकने पर फल दाग रहित आकर्षक होते हैं और भण्डारण क्षमता 2-3 दिन बढ़ जाती है। तुड़ाई के समय फलों को चोट व खरोच न लगने दें तथा मिट्टी के सम्पर्क से बचायें। फलों की तुड़ाई के लिए उपोष्ण बागवानी संस्थान द्वारा विकसित तुड़ाई यंत्र उपयुक्त है जिससे प्रति घण्टे 800-1000 फल तोड़े जा सकते है। यह यंत्र संस्थान में उचित मूल्य पर उपलब्ध है। पौध प्रवर्धन हेतु आम में ग्राफ्टिंग का कार्य करें।

सब्जियों की खेती- खरीफ सब्जियों यथा बैंगन, भिण्डी, लोबिया, मिर्च एवं अगेती फूलगोभी की किस्मों की नर्सरी में बुआई करें। वर्षाकालीन सब्जियों यथा लौकी, तोरई, सेम, काशीफल व टिण्डा की बुवाई करें। हल्दी एवं अदरक की बुवाई 15 जून तक अवश्य पूर्ण कर लें।

पशुओं को लगावाएं टीका

पशुपालन- बड़े पशुओं में गला घोटू बीमारी की रोकथाम के लिए एच.एस. वैक्सीन से और बकरियों व भेड़ों में पी.पी.आर. और सूकर में स्वाइन फीवर रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण बरसात से पहले करवाना सुनिश्चित करें। यह सुविधा सभी पशु चिकित्सालयों पर निशुल्क उपलब्ध है। गर्भवती जानवरों को उथले पानी में न बैठने दें इससे गर्भस्त भू्रण को क्षति हो सकती है।

मत्स्य पालन- कतला, रोहू, नैन प्रजातियों का उत्प्रेरित प्रजनन का समय आ गया है। हैचरी स्वामी मानसून के आगमन संबंधी पूर्वानुमान पर विशेष ध्यान दें और कतला, रोहू, नैन मत्स्य प्रजातियों का उत्प्रेरित प्रजनन करायें साथ ही आवश्यकतानुसार सिल्वर कार्प और ग्रास कार्प मत्स्य प्रजातियों का उत्प्रेरित प्रजनन भी कराएं। निजी क्षेत्र की कुछ हैचरियों पर उत्प्रेरित प्रजनन के मध्यम से मत्स्य बीज का उत्पादन प्रारम्भ कर दिया गया है। इच्छुक मत्स्य पालक अपने तालाबों में मत्स्य बीज का संचय करायें। जो भी मत्स्य पालक मत्स्य बीज उत्पादन की प्रक्रिया से जुड़े हैं वे अपनी नर्सरी की तैयारी कर लें।

रेशम पालन- टसर रेशम बागानों में अर्जुन पौधों में थाला बनाने का कार्य 15 जून तक कर लें। अर्जुन नर्सरी उत्पादन के लिए बालू, मिट्टी और गोबर की खाद का मिश्रण तैयार कर पालीथीन बैग में भराई का कार्य करें।

वानिकी- गड्ढा भरान 15 जून तक पूर्ण कर लें। वृक्षारोपण हेतु आवश्यक पौधे प्राप्त कर लें। पौधों के रोपण अथवा बिक्री हेतु ले जाने से पूर्व तक खुले क्षेत्र में सिंचाई करें।

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