मुख्यमंत्री जी, किसानों को सूदखोरों के चंगुल से बचाएं

मुख्यमंत्री जी, किसानों को सूदखोरों के चंगुल से बचाएंप्रदेश में तीस प्रतिशत किसान ऐसे हैं जो सूदखोरों और महाजनों के चंगुल में फंसे हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों का कर्ज़ माफी करके किसानों को बड़ी राहत दी है, लेकिन प्रदेश में तीस प्रतिशत किसान ऐसे हैं जो सूदखोरों और महाजनों के चंगुल में फंसे हैं।

अधिकतर छोटे किसान बीज, खाद, कीटनाशक और अपनी दूसरी जरूरतों के लिए सूदखोरों पर निर्भर हैं। गोरखपुर जिले के खजनी तहसील के सैरो गाँव के रामाश्रय के पास तीन बीघा जमीन थी। इस पर खेती करके वह अपने परिवार का पालन पोषण करते थे, लेकिन एक बार सूदखोरों के जाल में फंसने के बाद उनकी पूरी जमीन उनके हाथ से निकल गई।

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रामाश्रम ने बताया, “पांच साल पहले मेरी पत्नी को कैंसर हो गया। जो पैसा था उसके इलाज में लग गया। उस साल खेतों की बुवाई के लिए बीज-खाद के लिए पैसा नहीं था। बगल के गाँव के महाजन से ब्याज पर पैसा लिया। धीरे-धीरे ब्याज का पैसा बढ़ता चला गया तो खेत भी उसके नाम लिखना पड़ा।”

सूदखारों का जाल इतना तगड़ा है कि एक बार जो इसमें फंस गया, वह आसानी से नहीं निकला पाता है। मार्च महीने में ही फिरोजाबाद के एक किसान प्रभुदयाल ने सूदखोरों से तंग आकर आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद से वहां का जिला प्रशासन सूदखोरों के खिलाफ अभियान चला रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के एक सर्वे के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में जो कर्ज लोग ले रहे हैं, उसमें 30 प्रतिशत सूदखोरों से ले रहे हैं।स्थिति यह है कि बड़े बैंक छोटे किसानों का कर्ज देने से कतराते हैं।

ऐसे में छोटे किसान और खेतिहर मजदूर महाजनों से ब्याज पर पैसा लेने को मजबूर हैं। छोटे किसानों का आर्थिक शोषण करने में आढ़ती भी सूदखोर की भूमिका में दिख रहे हैं। बुवाई और फसलों पर मौसम की मार के समय आढ़ती छोटे किसानों को कर्ज देते हैं, लेकिन उस पर अनाप-शनाप ब्याज लगाकर किसान को कंगाल करने में लग जाते हैं। कुछ साल पहले ग्रामीण विकास नियोजन के सचिव रहे आर. सुब्रमण्यम की रिपोर्ट में बताया गया था कि सूदखोर किसानों से 50 प्रतिशत तक का ब्याज ले रहे हैं। नतीजतन किसान कभी भी कर्ज चुकता नहीं कर पाता और खेत बेचने की नौबत आ जाती है।

सूदखोरी रोकने के लिए ठोस कानून नहीं

सूदखोरों पर लगाम लगाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को आगाह किया है कि वह उन माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को पैसा न उपलब्ध कराएं, जो कर्ज के बदले 24 से लेकर 50 प्रतिशत तक की ब्याज वसूली कर रहे हैं। सूदखोरों पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब जैसे राज्यों में कानून बनाए गए हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में कोई ठोस कानून नहीं है। ऐसे यहां के किसान भी चाह रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ की सरकार सूदखोरी को रोकने के लिए कोई कड़ा कानून बनाए।

गोरखपुर जिले के चौरीचौरा ब्लाक के सरदार नगर गाँव के किसान रामकिशुन सिंह ने कहा, ‘गाँव-गाँव में सूदखोरों का जाल बिछा हुआ है। सूदखोर इस ताक में रहते हैं कि किसान कब मुसीबत में आए और वह उन्हें कर्ज दे सकें।’ उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार से उम्मीद है कि वह इस समस्या पर ध्यान देगी और किसानों का कर्ज ही न लेना पड़े ऐसी व्यवस्था करेगी।

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