ओडिशा: कुचिंडा के किसानों के जीवन में मिठास ला रही तीखी मिर्च

लाल मिर्च की खेती ओडिशा के संबलपुर जिले के कुचिंडा ब्लॉक और उसके आस पास के इलाकों के किसानों की जिंदगी को बदल रही है। बेहतर और अच्छी उपज के कारण व्यापारी और निर्यात कंपनियां उनके दरवाजे पर पहुंच रही हैं।

Ashis SenapatiAshis Senapati   27 Jun 2022 8:11 AM GMT

ओडिशा: कुचिंडा के किसानों के जीवन में मिठास ला रही तीखी मिर्च

10 साल पहले कुचिंडा में करीब 7 हजार एकड़ (2832.799 हेक्टेयर) मिर्च की खेती की जाती थी। अब, कुचिंडा ब्लॉक और पास के बमारा में 12 हजार एकड़ (4856.2277 हेक्टेयर) क्षेत्र में मिर्च की खेती होती है। सभी फोटो: तपन दास

ओडिशा के संबलपुर जिले के कुचिंडा ब्लॉक के ज्यादातर किसान अब मिर्च की खेती कर रहे हैं। उनमें से कई पारंपरिक रूप से धान उगाते थे, लाल मिर्च अब उन्हें और ज्यादा खुशहाल बना रही है।

किरा गाँव के 45 वर्षीय किसान संतोष किशन खुश होकर गाँव कनेक्शन को बताया, "व्यापारी हमारे गाँव में डेरा डाले हुए हैं और हमसे लाल मिर्च खरीदने का इंतजार कर रहे हैं।"

कुचिंडा के कृषि अधिकारी पुरुषोत्तम साहू के मुताबिक 10 साल पहले कुचिंडा में करीब 7 हजार एकड़ (2832.799 हेक्टेयर) मिर्च की खेती की जाती थी। अब, कुचिंडा ब्लॉक और पास के बमारा में 12 हजार एकड़ (4856.2277 हेक्टेयर) क्षेत्र में मिर्च की खेती होती है। साहू ने कहा कि इलाके में करीब 10 हजार किसान मिर्च उगाते हैं।

कृषि अधिकारी ने बताया, "महामारी के दौरान चीजें इतनी अच्छी नहीं थी जब मिर्च की कीमत 80 रुपये प्रति किलो हो गई थी। लेकिन अब सब ठीक है क्योंकि वे 180 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही हैं।"


किरासन गाँव के मिर्च किसान हिमांशु शेखर महापात्र ने गाँव कनेक्शन को बताया, "गर्म और आर्द्र जलवायु वाला कुचिंडा, मिर्च की खेती के लिए आदर्श है।"

हिमांशु ने समझाया, "मिर्च उत्पादकों के पास लाभ की एक बड़ी गुंजाइश है क्योंकि वे प्रति एकड़ 10 क्विंटल सूखी मिर्च की फसल लेते हैं, और किसान अच्छा लाभ कमा सकता है।"

दुमामुंडा गाँव की पबित्रा मांझी ने कुछ इस तरह किया है, 45 वर्षीय मिर्ची किसान ने बताया, "2021 में मैंने पहली बार 1 एकड़ जमीन पर लाल मिर्च बोई थी और एक लाख रुपये का लाभ कमाया।" उन्होंने बताया कि फसल कम रखरखाव वाली है और धान के मुकाबले में कम पानी की जरूरत पड़ती है, और किसान साल में एक बार इसकी फसल ले सकते हैं।

किरासन गाँव के किसान किरण महापात्रा के मुताबिक, लाल मिर्च की भारी मांग है और कई कंपनियां अच्छी कीमत देने को तैयार हैं। 58 वर्षीय किसान ने गांव कनेक्शन को बताया, "हम में से कई लोग पारंपरिक धान की खेती करते थे लेकिन अब मिर्च की खेती कर रहे हैं और इसका लाभ उठा रहे हैं।"


ओडिशा ग्रामीण विकास और मार्केटिंग सोसायटी (ओआरएमएएस) और कुचिंडा रेगुलेटेड बाजार कमेटी मिर्ची किसानों को पर्याप्त सहायता प्रदान कर रही हैं। कुचिंडा रेगुलेटेड मार्केट कमेटी के सचिव मनोज महंत ने गांव कनेक्शन को बताया, "हम उनकी उचित बाजार लिंकेज के साथ मदद कर रहे हैं।"

सचिव ने बताया कि कैसे वैकल्पिक आजीविका खोजने के लिए पलायन करने वाले लोगों के लिए यह क्षेत्र बदनाम था, लेकिन अब मिर्च की खेती की वजह से पलायन काफी हद तक धीमा हो गया है। महंत ने बताया, "मिर्च की खेती से लोगों को लगभग तत्काल फायदा मिला है।"

कुचिंडा मिर्च को तब और बढ़ावा मिला जब कोच्ची, केरल में भारतीय मसाला बोर्ड (एसबीआई), ने कुचिंडा मिर्च का परीक्षण किया और देश के अन्य हिस्सों की तुलना में इसे गुणवत्ता में कहीं बेहतर पाया। महंत ने बताया, "ओआरएमएएस ने गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में कुछ नमूने भेजे थे इसके बाद रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। हमने राज्य सरकार से कुचिंडा लाल मिर्च के लिए जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग के लिए आवेदन करने का आग्रह किया है।"

महंत ने बताया, "टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद कुछ बड़ी कंपनियों ने इन्हें खरीदने में दिलचस्पी जाहिर की है।"

कुचिंडा मिर्च से फायदा और समृद्धि हालिया घटना हो सकती है, जबकि इसकी खेती की शुरुआत 1901 हुई थी जब बामरदा के राजा ने कुछ किसानों को अनिश्चित और कम वर्षा से निपटने के लिए धान की फसलों के बजाय मिर्च उगाने के लिए प्रोत्साहित किया था। महंत ने बताया,"धान की खेती के लिए जरूरी बारिश का केवल 10 फीसदी ही मिर्च के लिए जरूरी है।"

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अनुवाद: मोहम्मद अब्दुल्ला सिद्दीकी

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