... तो इसलिए हो रहा है बासमती धान से किसानों का मोहभंग

Ashwani NigamAshwani Nigam   10 Aug 2017 8:50 AM GMT

... तो इसलिए हो रहा है बासमती धान से किसानों का मोहभंगबासमती धान की खेती से देश के किसानों को मोहभंग हो रहा है।

लखनऊ। देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट सुगंध और स्वाद के लिए प्रसिद्ध बासमती धान की खेती से देश के किसानों को मोहभंग हो रहा है। पिछले दो सालों से बासमती धान की अच्छी कीमत नहीं मिलने से पंजाब के किसानों ने इस साल बासमती धान की बुवाई में रुचि नहीं दिखाई है। देश के सबसे बड़े बासमती धान उत्पादक राज्य पंजाब में इस साल खरीफ में मात्र 4.25 लाख हेक्टेयर में ही बासमती की बुवाई की संभावना है, जबकि पिछले साल वहां पर 8 लाख हेक्टेयर में बासमती की बुवाई हुई थी। पंजाब में अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा बासमती धान की खेती होती है।

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पंजाब में वर्ष 2014-15 में बासमती का रकबा 8.62 लाख हेक्टेयर था। 2015-16 में यह घटकर 7.63 लाख हेक्टेयर रह गया था। पंजाब कृषि विभाग के मुताबिक, अब तक करीब 3 लाख हेक्टेयर में बासमती की बुवाई हुई है। विभाग मान रहा है कि बासमती का रकबा साढ़े 4 लाख हेक्टेयर तक पहुंचेगा क्योंकि अभी बुवाई चल रही है, लेकिन धान की बुवाई का अधिकतम एक सप्ताह ही बचा है।

बासमती की खेती के लिए जाने-जाने वाले पंजाब के पटियाला के बड़े किसान जोगिंदर सिंह ने बताया, “पिछले दो साल विश्व बाजार में बासमती की मांग बढ़ने के बाद भी किसानों को बासमती धान का अच्छा भाव नहीं मिला।”

उन्होंने कहा, ”बासमती का निर्यात करने वाले तो करोड़ों कमा रहे हैं, लेकिन किसानों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। ऐसे में इस धान की खेती को हम किसानों ने कम की है।“सिंह ने बताया, “बासमती धान की खेती करने में लागत तो अधिक आती ही है, इसकी देखभाल भी दूसरो धानों की तुलना में अधिक करनी पड़ती है। धान जब तैयार हो जाता है तो हमारी मेहनत का दाम नहीं मिलता है। ऐसे में हम सिर्फ अपने खाने के लिए अब इस धान को उगा रहे हैं।“

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पंजाब के मोंगा जिले के किसान गुरमुख सिंह बताते हैं, “सरकार को बासमती धान पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करना चाहिए। सरकारी खरीद की व्यवस्था नहीं होने की वजह से सिर्फ प्राइवेट एजेंसी ही बासमती की खरीद करती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।“

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानि एपीडी के सलाहकार विनोद कुमार कौल बताते हैं, “भारत बासमती चावल में विश्व बाज़ार का अग्रणी निर्यातक देश है। पिछले खरीफ सीजन 2015-2016 के दौरान भारत से 22718.44 करोड़ रुपए मूल्य का 40,45,796.25 मीट्रिक टन बासमती चावल निर्यात किया गया था। ऐसे में अगर पंजाब में बासमती धान का रकबा घटेगा तो इसका असर निर्यात पर भी पड़ेगा।““

बासमती के बारे में जानकारी देते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के धान की फसल के विशेषज्ञ डॉ. देवेन्द्र नारायण सिंह ने बताया, “बासमती लंबा एवं सुगंधित चावल है जो भारतीय उप महाद्वीप के हिमालय की पहाड़ियों के विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में कई सदियों से उगाया जा रहा है। यह लंबे और पतले होने की विशेषता से पूर्ण है। पकाने पर अपने मूल आकार से दोगुना होने के साथ ही मुलायम एवं रोयेंदार प्रकृति, स्वादिष्ट, बेहतर सुगंध और विशिष्ट स्वाद वाला हो जाता है। इसलिए देश-विदेश में इसकी सबसे ज्यादा मांग है।“

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विदेशों में ज्यादा मांग

विनोद कौल बताते हैं, “सउदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और कुवैत वह प्रमुख देश हैं, जहां पर भारत के बासमती चावल की सबसे ज्यादा मांग है। भारत में बासमती धान जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखण्ड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्यों में भी उगाया जाता है, लेकिन पंजाब में इसकी सबसे ज्यादा खेती होती है।

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