जीएम फसलों ने दुनियाभर के किसानों को बनाया करोड़पति

जीएम फसलों ने दुनियाभर के किसानों को बनाया करोड़पतिगाँव कनेक्शन

नई दिल्ली। दुनियाभर के किसान जीएम यानि जेनेटिकली मोडिफाइड बीजों की खेती से मोटा मुनाफ़ा कमा रहे हैं। हालांकि भारत में इसे लेकर थोड़ा विवाद ज़रूर है। बीते 20 साल में जीएम फसलों से किसानों ने करीब 10 लाख करोड़ रुपये कमाए हैं। जबकि बीटी कपास की पैदावार में भारत दुनिया में अव्वल है।

भारत में बीटी कपास की खेती सबसे ज्यादा

भारत में सबसे अधिक बायोटेक खेती कपास की हो रही है। इंटरनेशनल सर्विस फॉर द एक्यूसजिशन ऑफ एग्री-बायोटेक एप्लीसकेशंस यानि आईसा की रिपोर्ट के मुताबिक़ 2015 में भारत दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश बन गया। इस विकास में सबसे ज्यादा योगदान बायोटेक बीटी कपास के बीजों को जाता है।

भारत दुनिया में बायोटेक कपास की खेती करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्र है। भारत में 2015 में 1.16 करोड़ हेक्टेायर में कपास की खेती की गई। यह खेती 77 लाख छोटे किसानों ने की। 2014 और 2015 में भारतीय कपास की फसल का 95 फीसदी भाग बीटी बीजों से उगाया गया। चीन में यह 2015 में 96 फीसदी था।

बायोटेक फसलों के सामने है चुनौती

आईसा की रिपोर्ट के अनुसार बायोटेक फसलों की ग्रोथ है लेकिन अभी उसको लेकर चुनौतियां भी हैं। 1996 से 2014 में बायोटेक फसलों की खेती में लगातार ग्रोथ रही है। इसमें 12 साल ग्रोथ दो अंक में रही। 2015 में लेकिन बायोटेक फसलों की खेती में गिरावट आई। 2014 के मुकाबले इसकी खेती का क्षेत्र करीब एक फीसदी गिरकर 17.91 लाख हेक्टेयेर रहा। रिपोर्ट में बायोटेक खेती का रकबा घटने की वजह फसल की कुल खेती वाले क्षेत्र में आई कमी के रही है।

विकासशील देशों में बढ़ रही बायोटेक खेती

रिपोर्ट के अनुसार, 2015 में लगातार चौथे साल विकासशील देशों ने इंडस्ट्रियलाइज्डर देशों से अधिक (1.45 करोड़ हेक्टे यर) बायोटेक फसलें उगाई हैं। लैटिन अमेरिका, एशिया और अफ्रीका के किसानों ने वैश्विक बायोटेक की खेती वाले क्षेत्र (17.97 करोड़ हेक्ट येयर) में से 54 फीसदी क्षेत्र में बायोटेक फसलें उगाईं। 28 देशों में बायोटेक फसलें उगाई जाती हैं, जिसमें से 20 विकासशील देश हैं।

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