पशुधन और कृषि के क्षेत्र में अगर आपके पास है कोई नया विचार, तो आपके पास है सुनहरा मौका

पशुधन और कृषि के क्षेत्र में अगर आपके पास है कोई नया विचार, तो आपके पास है सुनहरा मौका

अगर आपने किसी भी क्षेत्र में समाज को बदलने के लिए कोई रूपरेखा तैयार की हो साथ ही जमीनी स्तर पर काम किया हो, तो आपके पास मौका उसको पूरे देश के सामने लाने का।

समाज की समस्याओं का समाधान और नए अवसर को ढूंढ कर सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में अभ्युदय (सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पित IIT मुंबई की एक पहल) एक्शन प्लान नाम से एक सामाजिक उद्यमिता प्रतियोगिता आयोजित कर रहा है। इस प्रतियोगिता में पशुधन के क्षेत्र में काम करने वालों के पास भी मौका है। इसमें पशुधन और कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार, महिला सशक्तिकरण, सतत ऊर्जा और वित्तीय समावेशन प्रमुख क्षेत्र हैं, जिसमें आप अपने विचारों और उसमें किए गए कामों को पूरे देश के सामने ला सकते है।

हर समाज और प्रान्त में नए विचार, प्रयास और उद्यमों की आवश्यकता है, जिससे कि समाज में व्याप्त समस्याओं का समाधान किया जा सके। इस प्रतियोगिता में हेस्टर बायो साइंसेज लिमिटेड वित्तीय सहायता कर रहा है। हेस्टर बायो साइंसेज लिमिटेड के वेटनरी सोशल बिज़नेस विभाग ने इस प्रतियोगिता में पशुधन को भी एक महत्वपूर्ण अंग के रूप में सम्मिलित किया है।


कोशिश की जा रही है कि वेटनरी कॉलेज और संस्थानों में पढ़ने वाले हज़ारों छात्र भी इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकें। 132 करोड़ भारतीयों के लिए पशु उत्पाद (दूध, मीट और अंडे) की उपलब्धता के लिए पशुधन में संगठित और समावेशित प्रयास की आवश्यकता है। पशु धन भारत में एक ऐसा संसाधन है जिसमें कि रोजगार, खाद्य व पोषण सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य की असीम संभावनाएं है, अगर सही तरीके से और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक कार्य किया जाए। दूध, अंडे और पोल्ट्री मीट में काम करने वाले किसान और उद्यमी काफी व्यवस्थित हैं। इस संगठित क्षेत्र में और नवीन प्रयासों की जरुरत है, जिससे कि संगठित क्षेत्र की समस्याओं का समाधान हो और पशुपालकों को उचित दाम और उपभोक्ता को बिना मिलावट के पशु उत्पाद मिले।

भारत में पशुधन ज्यादा से ज्यादा 20 प्रतिशत ही संगठित क्षेत्र में है और वह भी सिर्फ दूध उत्पादन और पोल्ट्री में। लगभग 7 करोड़ पशुपालक असंगठित क्षेत्र में मुख्यतः बकरी, भेड, सूकर और देशी मुर्गी पालते हैं। दुर्गम क्षेत्रों में मिथुन और याक की उपयोगिता को देखते हुए स्थानीय प्रयास की जरुरत है। ढुलाई और स्थानीय क्षेत्रों में आवागमन के लिए घोड़े, खच्चर गधों का भी उपयोग होता है। गौर करने की बात यह है कि, कौन लोग हैं जो इस असंगठित क्षेत्र में पशुओं को पालते है ? इनका स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार क्या है? क्या इन पशुओं और पशुपालकों के स्वास्थ्य के लिए उचित प्रबंध हैं? क्या इन पशु पालकों की खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित है ? क्या इन संगठित और असंगठित क्षेत्र के पशु पालकों को अपने उद्यम को विकसित और उचित पशुपालन की जानकारी है ?

इस प्रतियोगिता की कुछ खास बातें निम्नलिखित हैं:

  • निःशुल्क पंजीकरण।
  • कोई भी विषय विशेषज्ञ, कर्मचारी, कृषक, उद्यमी, और खास तौर पर छात्र इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं।
  • सफल उद्यमी और विशेषज्ञों द्वारा विचारों और प्रस्तावों की विवेचना की जाएगी और प्रतिभागियों को सफलता के गुर सिखाए जाएंगे।
  • यह प्रतियोगिता तीन चरण में संपन्न होगी। ज्यादा जानकारी के लिए http://www.abhyudayiitb.org/Actionplan/ वेबसाइट देखें
  • इस प्रतियोगिता में भाग लेने की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर है

प्र्रतियोगिता का उद्देश्य-

इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्द्येश्य नए विचारों को मूर्तरूप देना है जिसमें कि कार्यों की रुपरेखा तैयार होने के साथ ही जमीनी रूप से काम भी हो और यह सिर्फ एक कागज पर ही न रह जाए।

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