खेती किसानी

देश में सबसे अधिक जैविक उत्पाद उगाता है मध्य प्रदेश

देश जैविक खेती की तरफ अग्रसर हो रहा है। किसान खेत, इंसानों और पर्यावरण की सेहत को ध्यान में रखते हुए रासायनिक खेती छोड़ रहे हैं। देश के कई राज्य इसे अपना रहे हैं लेकिन मध्य प्रदेश जैविक खेती करके फसलों का उत्पादन करने में नंबर एक पर है, उसके बाद हिमाचल प्रदेश और राजस्थान का नंबर आता है।

गाँव कनेक्शन की टीम ने पिछले वर्ष नवंबर महीने में मध्य प्रदेश के कई ज़िलों की यात्रा की थी। उस दौरान ऐसे तमाम किसानों से मुलाकात हुई जो अब पूरी तरह से जैविक खेती कर रहे हैं। उन्हीं में से एक किसान थे सागर जिले के आकाश चौरसिया न सिर्फ खुद जैविक खेती करते हैं बल्कि देश भर के तमाम किसानों को जैविक खेती के बारे में प्रशिक्षण भी देते हैं।

मध्य प्रदेश में हाल के कुछ वर्षों में जैविक खेती के मामले में तेजी से काम हुआ है। कृषि क्षेत्र की संस्था एग्रीकल्चर एण्ड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेव्हलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) के अनुसार मध्य प्रदेश में सबसे अधिक जैविक उत्पादों का उत्पादन किया जाता है।

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एपीडा के अनुसार वर्ष 2013 में जैविक खेती के मामले में भारत 15 नंबर पर था। तबतक भारत में 5.70 लाख हेक्टेयर भूमि जैविक खेती के लिए रजिस्टर्ड थी। इसमें 26% खेती योग्य क्षेत्र शामिल हैं जिनमें 14.9 लाख हेक्टेयर और शेष 74% (42.2 लाख हेक्टेयर) वन और वन्य क्षेत्र में लघु वन उत्पादन का संग्रह किया गया है।

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये मध्य प्रदेश में वर्ष 2011 में जैविक कृषि नीति लागू की गई। इसके बाद से जैविक खेती में लगातार वृद्धि हो रही है। प्रदेश में व्यावसायिक संगठन एसोचैम ने सर्वे किया था। सर्वे में यह बताया गया था कि प्रदेश मे अगले 5 वर्षों में 600 करोड़ रुपये के जैविक उत्पाद के निर्यात की संभावना है।

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मध्य प्रदेश के विदिशा, सागर और सीहोर जिलों में उगाये जा रहे शर्बती गेहूं, मालवा क्षेत्र का ड्यूरम गेहूं, नर्मदा पठार के होशंगाबाद और नरसिंहपुर जिले में जैविक तरीके से उगाई जा रही अरहर दाल की मांग देशभर में है। मण्डला और डिण्डौरी जिलों के कोदो-कुटकी, बैगानी दाल की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है। रायसेन, भोपाल, जबलपुर, मण्डला एवं बालाघाट क्षेत्र का बासमती चावल एवं निमाड़ एवं मालवा के जैविक कपास की माँग देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है।

भारत सरकार ने जैविक उत्पादन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीओपी) लागू किया है। ताकि देश में किसान ज्यादा से ज़्यादा जैविक खेती को अपनाएं। राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रमाणन निकायों के लिए मान्यता कार्यक्रम, जैविक उत्पादन के लिए मानक, जैविक खेती आदि को बढ़ावा देना शामिल है। भारत ने 13.5 लाख टन (2015-16) प्रमाणित जैविक उत्पादों का उत्पादन किया जिसमें सभी प्रकार के खाद्य उत्पादों जैसे कि गन्ना, तेल बीज, अनाज और बाजरा, कपास, दलहन, औषधीय पौधे, चाय, फलों, मसालों, सूखी फल, सब्जियां, कॉफी आदि शामिल हैं।

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वर्ष 2015-16 के दौरान 263687 मीट्रिक टन जैविक उत्पादों का निर्यात किया गया था, जिसके बदले भारत को लगभग 298 मिलियन अमरीकी डालर मिले थे। जैविक उत्पादों को यूरोपीय संघ, अमेरिका, कनाडा, स्विटजरलैंड, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण पूर्व एशियाई देशों, मध्य पूर्व, दक्षिण अफ्रीका आदि में निर्यात किया जाता है।

जैविक खेती में हो रहे नये-नये अनुसंधान की जानकारी देने के लिये मण्डला में जैविक अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की जा रही है। प्रदेश में जैविक उत्पादों की बिक्री के लिये भी किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने जैविक उत्पाद की बिक्री के लिये चयनित कृषि उपज मण्डियों में अलग व्यवस्था की है।

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