पिछले एक दशक में पहली बार समय पर मानूसन ने दी दस्तक

पिछले एक दशक में पहली बार समय पर मानूसन ने दी दस्तककृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश में खरीफ की बुवाई की तैयारी में लगे किसानों को इससे फायदा मिलेगा

लखनऊ। मानसून की बरसात के लिए टकटकी लगाए किसानों के लिए मंगलवार की बारिश की बूंदों ने राहत की सांस दी। पिछले एक दशक में ऐसा पहली बार है जब उत्तर प्रदेश में मानसून ने पहली बार अपने निश्चित समय पर दस्तक दिया है।

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने अपनी रिपोर्ट जारी करके बताया था कि देश में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून 30 मई को केरल में आ चुका है जिसके कारण 20-21 जून तक बंगाल की खाड़ी से मानूसन उत्तर प्रदेश में पहुंच जाएगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग अमौसी लखनऊ के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया, ‘यूपी में मानूसन की शुरुआत हो चुकी है। मंगलवार रात और बुधवार की सुबह लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में 60.2 मिलीमीटर वर्षा हुई।’ मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल सामान्य मानूसन की भविष्यवाणी की थी जिसके मुताबिक इस बार अच्छी बरसात होगी और इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।

मौसम विज्ञान विभाग की तरफ से साल 2005 से लेकर 2016 तक मानूसन का जो पूर्वानुमान जारी किया गया था उसके मुताबिक यूपी में 15 जून से लेकर 18 जून के बीच मानसून आने की घोषणा थी लेकिन कभी भी इन वर्षों में मानसून तय तिथियों पर नहीं पहुंचा, लेकिन इस बार मानसून अपने तय समय पर आया है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश में खरीफ की बुवाई की तैयारी में लगे किसानों को इससे फायदा मिलेगा।

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नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय के एग्रीकल्चर मेट्रोलाजी विभाग के वैज्ञानिक प्रोफेसर डॉ. एके सिंह ने बताया, ‘भारत में मानसून का आगमन पर सरकार से लेकर आम किसान की निगाह लगी रहती है। देश में मानसून का सीजन चार महीनों का होता है। मानसून जून में शुरू होता है और सितंबर तक सक्रिय रहता है। दीर्घावधि पूर्वानुमान के दौरान मौसम विभाग कई पैमानों का इस्तेमाल कर इन चार महीनों के दौरान होने वाली मानसूनी बारिश की मात्रा को लेकर संभावना जारी करता है।’ उन्होंने कहा कि प्रदेश में मानसून की शुरुआत हो चुकी है। किसानों को इससे खरीफ की बुवाई करने में मदद मिलेगी।

इस बार सामान्य मानूसन के आगमन से बारिश अच्छी होगी जिसका प्रदेश की कृषि पर सबसे अच्छा प्रभाव पड़ेगा। इससे जहां सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां बारिश होने से फसल अच्छी हो सकेगी। जहां सिंचाई के साधन हैं भी, तो समय पर अच्छी बारिश होने से किसानों को नलकूप और पंपिंग सेट्स नहीं चलाने पड़ेंगे। उनके डीजल की बचत होगी। इससे किसानों की लागत घटेगी। अच्छे उत्पादन से किसानों को फायदा होगा। खाद्यान्नों की मूल्यवृद्धि भी नियंत्रित रहेगी। कृषि का अर्थव्यवस्था में योगदान है, इसलिए पूरी अर्थव्यवस्था को मानसून मजबूती प्रदान करेगा।

इस बार मानूसन के चार महीनों में झमाझम बारिश से नदियों, जलाशयों का जलस्तर बढ़ेगा जिससे बिजली उत्पादन अच्छा रहेगा। अच्छे मानसून से प्रदेश में पानी की समस्या का भी काफी हद तक समाधान होगा। एक तो नदियों, तालाबों में पर्याप्त पानी हो जाएगा वहीं भूजल भी रिचार्ज होगा।

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