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उड़द मूंग की फसल में फैल रहा है पीला मोजेक रोग

Divendra SinghDivendra Singh   5 Aug 2017 6:11 PM GMT

उड़द मूंग की फसल में फैल रहा है पीला मोजेक रोगउड़द में लग रहा रोग।

लखनऊ। इस बार अच्छे मानसून से किसानों ने राहत की सांस ली थी, उन्हें फसल की बार-बार सिंचाई नहीं करना होगी, लेकिन इस समय उड़द, मूंग और मिर्च की फसल में पीला मोजेक रोग लगने से किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

मध्य प्रदेश के देवास जिले कुंडगाँव के किसान उमा शंकर बिश्नोई ने बीस एकड़ में मूंग की फसल बोई है, जिसमें से करीब एकड़ फसल की पत्तियां पीली पड़ गईं हैं। उमाशंकर बिश्नोई बताते हैं, "इस बार बीस एकड़ में मूंग की फसल लगाई है, दस एकड़ की फसल में पत्तियां चितकबरी हो गईं हैं, पहले एक दो पौधों में पीली पत्तियां दिखायी दी थीं, लेकिन अब पूरे खेत में रोग फैल गया है। ऐसे ही रहा तो सारी फसल बर्बाद हो जाएगी।"

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भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के वैज्ञानिक डॉ. पुरुषोत्तम कुमार पौधों के पीलेपन के बारे में बताते हैं, "पौधों में पीलापन पीला मोजेक बीमारी की वजह से होता है, जो एक विषाणु जनित बीमारी होती है। इसकी शुरुआत एक पौधे से होती है धीरे-धीरे पूरे खेत में फैल जाता है। ऐसे में अगर बारिश लगातार हो रही है तो, पौधों पर कोई असर नहीं होता है। अगर दो, तीन दिनों के अंतराल पर वर्षा होती है, तो सफेद मक्खी का डर रहता है।’’

एग्रोपीडिया वेबसाइट के अनुसार देश में राजस्थान, मध्य प्रदेश महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडू और उत्तर प्रदेश में मूंग और उड़द की लगभग 65 लाख हेक्टेयर में खेती होती है।

इन रोगों से पौधे की वृद्धि कम हो जाती है, पौधों का पीलापान, ऐंठ जाना, सिकुड़ जाना इत्यादि लक्षण हैं। कभी-कभी पत्तियां भी खुरदरी हो जाती हैं, मोटापन लिए गहरा हरा रंग धारण कर लेती है और सलवट पड़ जाती है। रोग के लक्षण प्रारंभ में फसल पर कुछ ही पौधे पर प्रकट होते हैं और धीरे -धीरे बढ़कर भयंकर रूप धारण कर लेते हैं। रोगग्रस्त फसल में शुरू में खेत में कहीं-कहीं स्थानों पर कुछ पौधों में चितकबरे गहरे हरे पीले धब्बे दिखाई देते हैं और एक दो दिन बाद में संपूर्ण पौधे बिल्कुल पीले हो जाते हैं और पूरे खेत में फैल जाते हैं।

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पीला मोजेक रोग सफेद मक्खी द्वारा फैलती है, मक्खी एक रोगग्रस्त पौधे की पत्ती पर बैठती है और मक्खी जब दूसरे पौधे पर बैठती है तो पूरे खेत में संक्रमण फैल जाता है। डॉ. पुरुषोत्तम कुमार बताते हैं, "बुवाई के समय ही सही बीजोपचार और उन्नत बीज के चयन से इस संक्रमण से बचाया जा सकता है। अगर एक पौधे में संक्रमण में हो तो उस पौधों को उखाड़कर खेत से दूर जमीन में गाड़ देना चाहिए। ऐसे में पौधों में संक्रमण नहीं होगा।"

समय रहते करें उपचार।

पीले मोजेक का संक्रमण सिर्फ सिर्फ उड‍़द या मूंग की फसल में नहीं होता है, सफेद मक्खी मिर्च, बैंगन में संक्रमण में फैला देती है।

डॉ. पुरुषोत्तम बताते हैं, "किसान जब कीटनाशक की दुकान पर जाता है, तो दुकानदार उन्हें कोई न कोई दवा दे देता है, जिससे कोई लाभ नहीं होता है। इसलिए संक्रमण होते ही पौधों को उखाड़ दें।"

सफेद मक्खी से रासायनिक बचाव
रोग से बचाव हेतु बीजोपचार के लिए बीजों को इमिडाक्लोप्रिड या एसिटामिप्रिड घोल में डुबोकर रोपण करें। बीमार पौधों के शीर्ष भाग काट कर जला दें तथा सफेद मक्खी पर नियंत्रण के लिए पौध रोपण के 30 दिन बाद इमिडाक्लोप्रिड या एसिटामिप्रिड की 125 प्रति मिली. हेक्टेयर या मिथाइल डिमेटान या एसिफेट की 300 प्रति मिली हेक्टेयर छिड़काव करें। साथ ही प्रत्येक छिड़काव के समय सल्फेक्स 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर के मान से मिश्रित करें।

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